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बदौलत सैनिकों से ही हमारा देश जिंदा है
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मैनपुरी। होली पब्लिक स्कूल में शनिवार को आचार्य रामचंद्र शुक्ल के जन्म माह पर काव्य गोष्ठी हुई। इसमें डॉ. अरविंद कुमार पाल ने बदौलत सैनिकों से ही हमारा देश जिंदा है... कविता सुनाई।
साहित्यकार श्रीकृष्ण मिश्र एडवोकेट ने आचार्य रामचंद्र शुक्ल के संबंध में जानकारी दी। जयप्रकाश मिश्र ने कंसमल्ल फोकट में माखन खाए बृज को, यश कुमार मिश्रा ने नहीं तुमसे शिकायत है यही तकदीर है कविता सुनाई। प्रशांत भदौरिया ने मशवरा है तुम्हें डर जरूरी हैं, धर्मेंद्र सिंह धरम ने हमारे गांव में आओ तुम्हारा खैर मकदम हैं, ईएम अनम ने आप हरसिंगार की शाखें हिलाना छोड़िए, मनोज कुमार सक्सेना ने जब जब घना अंधेरा छाए कविता पढ़ी।
ब्रजेंद्र सिंह सरल ने उन्नति के पथ पर चलकर हम इतने मद में चूर हो गए, संतोष दुबे ने इस निशा में कोई दीप वाले चलो, वासुदेव मिश्रा लालबत्ती ने राजनिति में उड़ती चिड़िया बहुत सुहानी लगती है, संजय दुबे ने कसैला स्वाद हूं फिर भी आबाद हूं कविता सुनाई। संकल्प दुबे ने संबंधों का मेला लगा रे आज फिर है, श्रीकृष्ण मिश्र ने सूख निचुड़ रीता हुआ हर्षानन का नीर कविता सुनाई। काव्यगोष्ठी में रमेशचंद्र चक, अभय शर्मा, ज्ञानेंद्र दीक्षित, अनुराग दुबे, शिवराम सिंह चौहान, उर्मिला पांडेय, अनुभव सक्सैना, बालकराम राठौर, उमेश दुबे, ज्ञानेश्वर सक्सेना ने काव्य पाठ किया। संयोजक विनोद माहेश्वरी ने धन्यवाद दिया। अध्यक्षता ओमप्रकाश वर्मा, संचालन बदन सिंह मस्ताना ने किया।
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साहित्यकार श्रीकृष्ण मिश्र एडवोकेट ने आचार्य रामचंद्र शुक्ल के संबंध में जानकारी दी। जयप्रकाश मिश्र ने कंसमल्ल फोकट में माखन खाए बृज को, यश कुमार मिश्रा ने नहीं तुमसे शिकायत है यही तकदीर है कविता सुनाई। प्रशांत भदौरिया ने मशवरा है तुम्हें डर जरूरी हैं, धर्मेंद्र सिंह धरम ने हमारे गांव में आओ तुम्हारा खैर मकदम हैं, ईएम अनम ने आप हरसिंगार की शाखें हिलाना छोड़िए, मनोज कुमार सक्सेना ने जब जब घना अंधेरा छाए कविता पढ़ी।
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ब्रजेंद्र सिंह सरल ने उन्नति के पथ पर चलकर हम इतने मद में चूर हो गए, संतोष दुबे ने इस निशा में कोई दीप वाले चलो, वासुदेव मिश्रा लालबत्ती ने राजनिति में उड़ती चिड़िया बहुत सुहानी लगती है, संजय दुबे ने कसैला स्वाद हूं फिर भी आबाद हूं कविता सुनाई। संकल्प दुबे ने संबंधों का मेला लगा रे आज फिर है, श्रीकृष्ण मिश्र ने सूख निचुड़ रीता हुआ हर्षानन का नीर कविता सुनाई। काव्यगोष्ठी में रमेशचंद्र चक, अभय शर्मा, ज्ञानेंद्र दीक्षित, अनुराग दुबे, शिवराम सिंह चौहान, उर्मिला पांडेय, अनुभव सक्सैना, बालकराम राठौर, उमेश दुबे, ज्ञानेश्वर सक्सेना ने काव्य पाठ किया। संयोजक विनोद माहेश्वरी ने धन्यवाद दिया। अध्यक्षता ओमप्रकाश वर्मा, संचालन बदन सिंह मस्ताना ने किया।
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