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कासगंज : सुन्नगढ़ी के प्रधान के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज
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कासगंज। जिलाधिकारी ने गंजडुंडवारा की ग्राम पंचायत सुन्नगढ़ी के ग्राम प्रधान के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए हैं। पंचायत के कामकाज के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। समाज कल्याण अधिकारी को जांच अधिकारी नामित किया गया है।
ग्राम पंचायत में वर्ष 2015-16 से 2020-21 में कराए गए कार्यों में धनराशि के दुरुपयोग की शिकायत की गई थी। इस पर जिलाधिकारी हर्षिता माथुर ने 6 जून को जिला गन्ना अधिकारी को मामले की जांच सौंपी। जांच अधिकारी ने 25 कार्यों का सत्यापन ग्राम प्रधान संध्या के पति सुतिम कुमार और ग्रामीणों के सामने किया। 5 कार्य मौके पर नहीं पाए गए। इसके अलावा कुछ कार्यों में अनियमितताएं पाई गई थीं। इसकी जांच रिपोर्ट 26 जून को जिलाधिकारी को उपलब्ध करा दी गई थी।
जिलाधिकारी ने 26 जुलाई को ग्राम प्रधान को पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया था। ग्राम प्रधान ने18 जुलाई को दिए गए नोटिस के जवाब में सभी कार्य होना बताया। इस संबंध में फोटोग्राफ व ग्रामीणों के शपथ पत्र भी दिए गए। इसके बाद परीक्षण में कार्य योजना से अलग जगह कार्य कराया जाना पाया गया। इसके चलते वित्तीय अनियमितताओं का दोषी माना गया। जिलाधिकारी ने अब अंतिम जांच के लिए समाज कल्याण अधिकारी को नामित किया है। अंतिम जांच में आरोपों से मुक्त न होने तक प्रधान के वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियों के प्रयोग एवं कामों के संपादन पर रोक लगा दी है। तब तक ग्राम पंचायत की शक्तियों के प्रयोग के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया जाएगा।
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ग्राम पंचायत में वर्ष 2015-16 से 2020-21 में कराए गए कार्यों में धनराशि के दुरुपयोग की शिकायत की गई थी। इस पर जिलाधिकारी हर्षिता माथुर ने 6 जून को जिला गन्ना अधिकारी को मामले की जांच सौंपी। जांच अधिकारी ने 25 कार्यों का सत्यापन ग्राम प्रधान संध्या के पति सुतिम कुमार और ग्रामीणों के सामने किया। 5 कार्य मौके पर नहीं पाए गए। इसके अलावा कुछ कार्यों में अनियमितताएं पाई गई थीं। इसकी जांच रिपोर्ट 26 जून को जिलाधिकारी को उपलब्ध करा दी गई थी।
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जिलाधिकारी ने 26 जुलाई को ग्राम प्रधान को पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया था। ग्राम प्रधान ने18 जुलाई को दिए गए नोटिस के जवाब में सभी कार्य होना बताया। इस संबंध में फोटोग्राफ व ग्रामीणों के शपथ पत्र भी दिए गए। इसके बाद परीक्षण में कार्य योजना से अलग जगह कार्य कराया जाना पाया गया। इसके चलते वित्तीय अनियमितताओं का दोषी माना गया। जिलाधिकारी ने अब अंतिम जांच के लिए समाज कल्याण अधिकारी को नामित किया है। अंतिम जांच में आरोपों से मुक्त न होने तक प्रधान के वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियों के प्रयोग एवं कामों के संपादन पर रोक लगा दी है। तब तक ग्राम पंचायत की शक्तियों के प्रयोग के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया जाएगा।
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