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कारगिल शहीद के परिवार को 21 वर्ष बाद भी पट्टे की जमीन पर नहीं मिल सका कब्जा
Thu, 23 Jul 2020 03:48 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 23 Jul 2020 03:48 PM IST
सार
- नायब सूबेदार लायक सिंह कारगिल युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए थे
- शहीद लायक सिंह के परिवार को 10 बीघा जमीन का पट्टा मिला था
- पेंशन और आवास के इंतजार में चल बसी शहीद लायक सिंह की मां
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शहीद लायक सिंह की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वायुसेना प्रमुख आरके सिंह भदौरिया के गांव कोरथ निवासी नायब सूबेदार लायक सिंह कारगिल युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए थे। शहीद लायक सिंह के परिवार को 10 बीघा जमीन का पट्टा मिला था। तब से 21 वर्ष गुजर चुके हैं। परिवार को पट्टे की जमीन परकब्जा नहीं मिल सका है।
शहीद लायक सिंह के भाई सतेंद्र सिंह ने बताया कि 10 बीघा जमीन का पट्टा मिला था। जिसमें से दो बीघा जमीन पर ही कब्जा मिल सका है। पट्टे की जमीन पर कब्जे के लिए विभिन्न स्तरों पर शिकायत की गई, लेकिन कब्जा नसीब नहीं हो सका है। सरकार की यह घोषणा अधूरी रह गई।
ये भी पढ़ें- कारगिल विजय दिवस: पाक को घुटने टेकने पर किया था मजबूर, ऐसे थे बाह के 400 सौ रणबांकुर
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शहादत के बाद से परिवार का हाल जानने के लिए प्रशासन ने कभी ध्यान नहीं दिया है। पहले शहादत दिवस पर एसडीएम जरूर श्रद्धांजलि देने के लिए आए थे। सतेंद्र सिंह ने बताया कि मां रामश्री को पेंशन और आवास के लिए भी अधिकारियों से आश्वासन मिला था। लेकिन 4 साल पहले वह आश्वासन पूरा होने का इंतजार करते करते चल बसीं। सैनिक बोर्ड द्वारा उनकी समस्या जानने का भी कभी प्रयास नहीं किया।
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शहीद लायक सिंह के भाई सतेंद्र सिंह ने बताया कि 10 बीघा जमीन का पट्टा मिला था। जिसमें से दो बीघा जमीन पर ही कब्जा मिल सका है। पट्टे की जमीन पर कब्जे के लिए विभिन्न स्तरों पर शिकायत की गई, लेकिन कब्जा नसीब नहीं हो सका है। सरकार की यह घोषणा अधूरी रह गई।
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शहादत के बाद से परिवार का हाल जानने के लिए प्रशासन ने कभी ध्यान नहीं दिया है। पहले शहादत दिवस पर एसडीएम जरूर श्रद्धांजलि देने के लिए आए थे। सतेंद्र सिंह ने बताया कि मां रामश्री को पेंशन और आवास के लिए भी अधिकारियों से आश्वासन मिला था। लेकिन 4 साल पहले वह आश्वासन पूरा होने का इंतजार करते करते चल बसीं। सैनिक बोर्ड द्वारा उनकी समस्या जानने का भी कभी प्रयास नहीं किया।
स्मारक बनवाकर वीरगाथा की यादों को सहेजा
वीरनारी शकुंतला देवी ने स्मारक बनवाकर वीरगाथा की यादों को सहेजा है। उनके छोटे भाई सतेंद्र सिंह की पत्नी रजनी देवी शहीद को रोजाना पूजती है। बच्चे भी उनके साथ पूजा में शामिल होते हैं।
कारगिल जंग में बहादुरी से लड़कर शहीद हुए बाह के कोरथ गांव के नायब सूबेदार लायक सिंह की स्मृति में वीरनारी शकुंतला देवी ने 2001 में शहीद स्मारक बनवाया था। स्मारक में चार साल पहले तक मां रामश्री शहीद को लड्डू गोपाल की तरह रोज भोग लगाती थी।
अब छोटे भाई सतेंद्र सिंह की पत्नी रजनी शहीद की सुबह पूजा करती हैं। पूजा के बाद देवता की तरह जल अर्पित करती हैं। शहीद के भाई एवं उनके पति सतेंद्र सिंह, भतीजी प्रगति, भतीजा सचिन भी पूजा में शामिल होते हैं। सुबह की पूजा की तरह ही शाम को आरती होती है। शहीद से जुड़ी यादें ताजा कर भतीजी प्रगति और भतीजा सचिन ने सेना में जाने की अपनी ख्वाहिश जाहिर की।
वीरनारी शकुंतला देवी ने स्मारक बनवाकर वीरगाथा की यादों को सहेजा है। उनके छोटे भाई सतेंद्र सिंह की पत्नी रजनी देवी शहीद को रोजाना पूजती है। बच्चे भी उनके साथ पूजा में शामिल होते हैं।
कारगिल जंग में बहादुरी से लड़कर शहीद हुए बाह के कोरथ गांव के नायब सूबेदार लायक सिंह की स्मृति में वीरनारी शकुंतला देवी ने 2001 में शहीद स्मारक बनवाया था। स्मारक में चार साल पहले तक मां रामश्री शहीद को लड्डू गोपाल की तरह रोज भोग लगाती थी।
अब छोटे भाई सतेंद्र सिंह की पत्नी रजनी शहीद की सुबह पूजा करती हैं। पूजा के बाद देवता की तरह जल अर्पित करती हैं। शहीद के भाई एवं उनके पति सतेंद्र सिंह, भतीजी प्रगति, भतीजा सचिन भी पूजा में शामिल होते हैं। सुबह की पूजा की तरह ही शाम को आरती होती है। शहीद से जुड़ी यादें ताजा कर भतीजी प्रगति और भतीजा सचिन ने सेना में जाने की अपनी ख्वाहिश जाहिर की।
पेंशन और आवास के इंतजार में चल बसी शहीद लायक सिंह की मां