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Navratri 2020: जानिये कन्या पूजा की विधि, जिससे सभी कार्य हों सिद्ध
Thu, 22 Oct 2020 10:17 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 22 Oct 2020 10:17 AM IST
सार
नवमी को दो वर्ष की कन्या के स्वरूप में पूजा करने से ऐश्वर्य, तीन वर्ष की त्रिमूर्तिनी के पूजन से भोग व मोक्ष, चार वर्ष की कल्याणी
के पूजन से धर्म, अर्थ व काम, पांच वर्ष रोहिणी की पूजा से राज्यपद की प्राप्ति, छह वर्ष की काली की पूजा से विद्या, सात वर्ष की
चंडिका की पूजा से षट्कर्म सिद्धि, आठ वर्ष की शाम्भवी की पूजा से राज्य, नौ वर्ष की दुर्गा की पूजा से संपदा व दस वर्ष की कुमारी
कन्या का सुभद्रा के रूप में पूजा करने से पृथ्वी के प्रभुत्व की प्राप्ति होती है।
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kanya pujan
- फोटो : kanya pujan
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विस्तार
नवरात्र में शक्ति की उपासना की प्रधानता मानी गयी है, नवरात्रियों में शक्ति स्वरूपा नवदुर्गा सच्चे अर्थों में नवकन्या ही है। दो वर्ष से दस वर्ष की कुमारी ही, कन्या कहलाती है। यही दुर्गा व शक्ति के नाम से प्रसिद्ध है। नवरात्रियों में अष्टमी व नवमी की प्रधानता है।
नवरात्र के आठवें दिन मां शक्ति धारण कर भक्तों का कल्याण करती हैं और उनके भय व कष्टों को दूर करती हैं। नवमी को नवदुर्गा के स्वरूप में नव कन्याओं के पूजन से नवदुर्गा की पूजा का फल प्राप्त होता है। भारद्वाज ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान, इंदौर के शोध निदेशक आचार्य पंडित रामचंद्र शर्मा वैदिक ने बताया कि 24 को महाअष्टमी है और 25 अक्तूबर को नवमी और दशहरा एक साथ हैं।
देवी व्रतों की सांगता कुमारि पूजन से ही होती है। वैसे नवरात्र में दो से दस वर्ष की कन्या पूजन किया जाना चाहिए। प्रतिपदा को मां शैलपुत्री के रूप में दो वर्ष की आगे इसी क्रम से नवमी को दस वर्ष की मां सिद्धिदात्री की पूजा का विधान है। यदि नवरात्र में ये संभव न हो तो महानवमी के दिन कुमारि पूजन से चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है। नवमी को दुर्गासप्तसती के सातसौ महामंत्र से हवन व कुमारी पूजन से मां की कृपा प्राप्त होती है।
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नवरात्र के आठवें दिन मां शक्ति धारण कर भक्तों का कल्याण करती हैं और उनके भय व कष्टों को दूर करती हैं। नवमी को नवदुर्गा के स्वरूप में नव कन्याओं के पूजन से नवदुर्गा की पूजा का फल प्राप्त होता है। भारद्वाज ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान, इंदौर के शोध निदेशक आचार्य पंडित रामचंद्र शर्मा वैदिक ने बताया कि 24 को महाअष्टमी है और 25 अक्तूबर को नवमी और दशहरा एक साथ हैं।
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देवी व्रतों की सांगता कुमारि पूजन से ही होती है। वैसे नवरात्र में दो से दस वर्ष की कन्या पूजन किया जाना चाहिए। प्रतिपदा को मां शैलपुत्री के रूप में दो वर्ष की आगे इसी क्रम से नवमी को दस वर्ष की मां सिद्धिदात्री की पूजा का विधान है। यदि नवरात्र में ये संभव न हो तो महानवमी के दिन कुमारि पूजन से चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है। नवमी को दुर्गासप्तसती के सातसौ महामंत्र से हवन व कुमारी पूजन से मां की कृपा प्राप्त होती है।
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आचार्य शर्मा वैदिक ने बताया कि इस वर्ष 24 अक्तबर शनिवार को महाअष्टमी व 25 अक्तूबर रविवार को प्रातः 7.41 बजे तक नवमी व उसके बाद दशमी प्रारम्भ होगी। इसलिए नवमी और दशहरा दोनों एक ही दिन होने से देवी भक्तों को दोहरा लाभ प्राप्त होगा।
दो से दस वर्ष की कन्या का पूजन
नवमी को दो वर्ष की कन्या के स्वरूप में पूजा करने से ऐश्वर्य, तीन वर्ष की त्रिमूर्तिनी के पूजन से भोग व मोक्ष, चार वर्ष की कल्याणी के पूजन से धर्म, अर्थ व काम, पांच वर्ष रोहिणी की पूजा से राज्यपद की प्राप्ति, छह वर्ष की काली की पूजा से विद्या, सात वर्ष की चंडिका की पूजा से षट्कर्म सिद्धि, आठ वर्ष की शाम्भवी की पूजा से राज्य, नौ वर्ष की दुर्गा की पूजा से संपदा व दस वर्ष की कुमारी कन्या का सुभद्रा के रूप में पूजा करने से पृथ्वी के प्रभुत्व की प्राप्ति होती है। इसप्रकार नवरात्र में नवमी के दिन दो से दस वर्ष की कन्या के पूजन का देवी भागवत, मार्कण्डेय पुराण आदि धर्म शास्त्रों में बड़ा महत्व बताया है।
कन्या के पूजन की विधि
देवी स्वरूपा कन्याओं को अलग-अलग चौकी, आसन पर बैठाकर उनके चरण धोना चाहिए। गन्ध, अक्षत पुष्प आदि से पूजन कर उन्हें मिष्ठान आदि भोजन कराने के बाद दक्षिणा व उपहार सामग्री भेंटकर उनसे आशीर्वाद ग्रहण करना चाहिए। इसप्रकार अष्टमी को हवन व नवमी को महापूजा के साथ कन्या पूजन व दशमी को नीराजन व विसर्जन करने से नवरात्र पूजा पूर्ण होती है।
दो से दस वर्ष की कन्या का पूजन
नवमी को दो वर्ष की कन्या के स्वरूप में पूजा करने से ऐश्वर्य, तीन वर्ष की त्रिमूर्तिनी के पूजन से भोग व मोक्ष, चार वर्ष की कल्याणी के पूजन से धर्म, अर्थ व काम, पांच वर्ष रोहिणी की पूजा से राज्यपद की प्राप्ति, छह वर्ष की काली की पूजा से विद्या, सात वर्ष की चंडिका की पूजा से षट्कर्म सिद्धि, आठ वर्ष की शाम्भवी की पूजा से राज्य, नौ वर्ष की दुर्गा की पूजा से संपदा व दस वर्ष की कुमारी कन्या का सुभद्रा के रूप में पूजा करने से पृथ्वी के प्रभुत्व की प्राप्ति होती है। इसप्रकार नवरात्र में नवमी के दिन दो से दस वर्ष की कन्या के पूजन का देवी भागवत, मार्कण्डेय पुराण आदि धर्म शास्त्रों में बड़ा महत्व बताया है।
कन्या के पूजन की विधि
देवी स्वरूपा कन्याओं को अलग-अलग चौकी, आसन पर बैठाकर उनके चरण धोना चाहिए। गन्ध, अक्षत पुष्प आदि से पूजन कर उन्हें मिष्ठान आदि भोजन कराने के बाद दक्षिणा व उपहार सामग्री भेंटकर उनसे आशीर्वाद ग्रहण करना चाहिए। इसप्रकार अष्टमी को हवन व नवमी को महापूजा के साथ कन्या पूजन व दशमी को नीराजन व विसर्जन करने से नवरात्र पूजा पूर्ण होती है।