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Agra: राजा कलिंग की कुलदेवी का मंदिर, यहां तीन दिन चलेगा ऐतिहासिक मेला; जानें क्या है इसका इतिहास
Fri, 04 Apr 2025 01:53 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
सोनवीर सिंह चाहर, संवाद न्यूज एजेंसी, मलपुरा
सोनवीर सिंह चाहर, संवाद न्यूज एजेंसी, मलपुरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 04 Apr 2025 01:53 PM IST
सार
राजा कलिंग की कुलदेवी का इटारो में भव्य दरबार है। यहां हर वर्ष की तरह इस बार तीन दिवसीय मेला शुरू हो रहा है। आइये जानते हैं इस मंदिर से जुड़ी मान्यता...
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राजा कलिंग की कुलदेवी का मंदिर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आगरा ग्वालियर रोड स्थित गांव इटोरा कैला देवी ब्रज धाम मंदिर पर लगने वाले तीन दिवसीय ऐतिहासिक मेले का प्रारंभ आज से हो गया। इस ऐतिहासिक मेले में जनपद के कोने-कोने से श्रद्धालु माता रानी के दरबार दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं,और मेले का लुत्फ उठाते हैं। मंदिर के विषय में मान्यता है कि सच्चे मन से जो श्रद्धालु माता रानी के दरबार आते हैं उनकी हर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।इस मंदिर पर चैत्र नवरात्रि एवम् भादो माह में मेले का आयोजन होता है।
मंदिर पर 1986 में एक ट्रस्ट का गठन हुआ, इसके बाद दिन वह दिन मंदिर पर विकास कार्य हो रहे हैं,मंदिर को आज भव्य रूप दिया जा चुका है।पिछली साल 2024 में योगी सरकार की तरफ से जिले में इस मंदिर में देवी जागरण और सुंदरकांड का पाठ आयोजित कराया गया था। क्षेत्रीय लोगों की ऐसी मान्यता है,कि राजस्थान के करौली केला मैया मंदिर पर जाने वाली श्रद्धालु जब तक इटोरा केला देवी मंदिर पर दर्शन नहीं करते उनकी यात्रा अधूरी मानी जाती है।
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मंदिर पर 1986 में एक ट्रस्ट का गठन हुआ, इसके बाद दिन वह दिन मंदिर पर विकास कार्य हो रहे हैं,मंदिर को आज भव्य रूप दिया जा चुका है।पिछली साल 2024 में योगी सरकार की तरफ से जिले में इस मंदिर में देवी जागरण और सुंदरकांड का पाठ आयोजित कराया गया था। क्षेत्रीय लोगों की ऐसी मान्यता है,कि राजस्थान के करौली केला मैया मंदिर पर जाने वाली श्रद्धालु जब तक इटोरा केला देवी मंदिर पर दर्शन नहीं करते उनकी यात्रा अधूरी मानी जाती है।
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मंदिर ट्रस्ट पदाधिकारियों ने बताया कि इस बार तीन दिवसीय मेले में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की उम्मीद है,मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष मनमोहन गोयल का कहना है कि मेले में भारी भीड़ रहती है,अतःलोगों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन से अपील है कि मेला परिसर में फायर ब्रिगेड की गाड़ियां,अत्यधिक पुलिस फोर्स लगाया जाए।मंदिर परिसर में कृत्रिम शौचालय प्रशासन की तरफ से मिले तो श्रद्धालुओं को राहत मिले। मंदिर ट्रस्ट के संरक्षक प्रभुदयाल शर्मा ने बताया कि कैला देवी पैदल यात्री इटोरा कैला देवी मंदिर पर अवश्य आते हैं,यह एक ऐतिहासिक मेला है। मनोकामना पूर्ण होने पर भक्ति मंदिर पर नेजा चढ़ाते हैं।
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क्या है मंदिर का स्वरूप
मंदिर परिसर के गर्भ गृह में माता रानी की तीन मूर्तियां स्थापित हैं,जिसमें मां काली मां सरस्वती,मां लक्ष्मी विराजमान है।वहीं मंदिर प्रांगण में लगी हनुमान जी की विशालकाय प्रतिमा श्रद्धालुओं का मन अपनी ओर आकर्षित करती है। वही मंदिर में माता रानी की सवारी शेर,और पीतल के नंदी महाराज की प्रतिमा भी हैं,साथ ही भोलेनाथ,पार्वती मैया के साथ उनके परिवार की प्रतिमा एवं राधा कृष्ण और शनिदेव की अलग से प्रतिमा विराजमान है।
मंदिर परिसर के गर्भ गृह में माता रानी की तीन मूर्तियां स्थापित हैं,जिसमें मां काली मां सरस्वती,मां लक्ष्मी विराजमान है।वहीं मंदिर प्रांगण में लगी हनुमान जी की विशालकाय प्रतिमा श्रद्धालुओं का मन अपनी ओर आकर्षित करती है। वही मंदिर में माता रानी की सवारी शेर,और पीतल के नंदी महाराज की प्रतिमा भी हैं,साथ ही भोलेनाथ,पार्वती मैया के साथ उनके परिवार की प्रतिमा एवं राधा कृष्ण और शनिदेव की अलग से प्रतिमा विराजमान है।
क्या है मंदिर का इतिहास?
कैला देवी ब्रज धाम मंदिर इटोरा प्राचीन मंदिर है। बुजुर्गों की मानें तो यह बताया जाता है कि सैकड़ों साल पहले मुरसान की रानी कुंदन देवी ने इस मंदिर का जीर्दोंद्वार कराया था, तभी से लेकर आज तक क्षेत्रीय लोग इस मंदिर पर विशाल मेले का आयोजन करते आ रहे हैं, जिसमें आज लाखों श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं। साथ बताया जाता है कि मांडों के राजा कलिंग की कैला मैया कुलदेवी थीं, राजा कलिंग करीब तीन किलोमीटर दूर कबूलपुर गांव में रहते थे।
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कैला देवी ब्रज धाम मंदिर इटोरा प्राचीन मंदिर है। बुजुर्गों की मानें तो यह बताया जाता है कि सैकड़ों साल पहले मुरसान की रानी कुंदन देवी ने इस मंदिर का जीर्दोंद्वार कराया था, तभी से लेकर आज तक क्षेत्रीय लोग इस मंदिर पर विशाल मेले का आयोजन करते आ रहे हैं, जिसमें आज लाखों श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं। साथ बताया जाता है कि मांडों के राजा कलिंग की कैला मैया कुलदेवी थीं, राजा कलिंग करीब तीन किलोमीटर दूर कबूलपुर गांव में रहते थे।
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मेला प्रांगण में जल विभाग की जर्जर टंकी लोगों को डरा रही है...
ग्राम प्रधान गौरव चौधरी का कहना है कि मेला प्रांगण में लगी जल निगम की टंकी जर्जर हो चुकी है,मेला में भारी भीड़ रहेगी हादसे की हादसे डर बना रहता है।इसको लेकर कई बार शासन प्रशासन को पत्र लिख चुके हैं लेकिन इसका ध्वस्तीकरण नहीं हुआ है।
ग्राम प्रधान गौरव चौधरी का कहना है कि मेला प्रांगण में लगी जल निगम की टंकी जर्जर हो चुकी है,मेला में भारी भीड़ रहेगी हादसे की हादसे डर बना रहता है।इसको लेकर कई बार शासन प्रशासन को पत्र लिख चुके हैं लेकिन इसका ध्वस्तीकरण नहीं हुआ है।