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जोंस मिल: 107 करोड़ रुपये की जमीन पर कब्जे की प्रक्रिया अधर में

Mon, 23 Aug 2021 01:39 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Mon, 23 Aug 2021 01:39 AM IST
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johns mill case
आगरा। जोंस मिल में 107 करोड़ रुपये कीमत की सरकारी जमीन पर कब्जे की प्रक्रिया आठ महीने से अधर में लटकी है। 8.83 एकड़ कलक्टर की जमीन और 48319 वर्ग मीटर सिंचाई व नगर निगम की जमीन जोंस मिल में खुर्दबुर्द हो गई। दिसंबर में डीएम प्रभु एन सिंह ने सरकारी जमीनों पर कब्जा लेने के आदेश दिए थे। आदेश के बाद अफसर धरातल पर कार्रवाई नहीं करा पाए हैं।
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जोंस मिल के खसरा संख्या 272 में पुलिस महकमा की जमीन है। पुलिस चौकी की जमीन पर मार्केट बन गई। दूसरी तरफ जोंस परिवार को कलक्टर व राज्य सरकार की तरफ से 8.83 एकड़ भूमि शर्तों पर दी गई थी। नगर निगम और सिंचाई विभाग की 48319 वर्ग जमीन पर अवैध निर्माण हो गए। कुल सरकारी जमीन की मालकियत 107 करोड़ रुपये है। जोंस मिल में कुल 2596 करोड़ रुपये की जमीनों का फर्जीवाड़ा एडीएम प्रशासन निधि श्रीवास्तव की जांच में सामने आया था। जिसके बाद डीएम ने मौजा घटवासन के खसरा संख्या 1734, 1737, 1739, 1741, 2078, 2079, 2080, 2081, 2085, 2086 और 2087 में जमीनों के खरीदने-बेचने पर रोक लगा दी है। इन खसरों में ही सिंचाई, नगर निगम, राज्य सरकार की जमीन शामिल है। 11 खसरा नंबरों में भू मानचित्र स्वीकृति, नए बिजली-पानी कनेक्शन व निर्माण प्रतिबंधित हैं। प्रशासन ने जोंस मिल में 23 खसरों की जांच कराई थी। जिनमें करीब 101 बीघा जमीन है। जिसे खुर्दबुर्द करने के आरोप में गंभीरमल पांड्या, हीरालाल पाटनी और मुन्नी लाल मेहरा के अलावा उनके विधिक वारिसों व राजेंद्र जैन उर्फ रज्जो, हेमेंद्र अग्रवाल उर्फ चुनमुन और कंवलदीप सिंह के विरुद्ध भूमाफिया एक्ट के तहत कार्रवाई की संस्तुति एडीएम प्रशासन ने डीएम से की थी। परंतु तीन लोगों को ही डीएम ने भूमाफिया घोषित किया। बाकी अन्य हिस्सेदारों के विरुद्ध आठ महीने बाद भी कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई जा सकी है।
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आर्थिक शाखा कर रही दोबारा जांच
डीएम प्रभु एन सिंह के आदेश पर एडीएम प्रशासन निधि श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय समिति ने छह महीने की जांच के बाद 2596 करोड़ रुपये की जमीनों के फर्जीवाड़े की रिपोर्ट बनाई थी। जिसके आधार पर रज्जो जैन, चुनमुन और कंवलदीप को प्रशासने भूमाफिया घोषित किया। मामले की विस्तृत जांच के लिए एसपी सिटी की अध्यक्षता में एर्सआटी बनाई। करीब दो महीने बाद अचानक नाटकीय ढंग से जांच एसआईटी की जगह आर्थिक अपराध शाखा को स्थानांतरित हो गई। जिसके बाद नए सिरे से दोबारा कागजी कवायद चल रही है।
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हाईकोर्ट की रोक
हाईकोर्ट ने उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगा रखी है। सरकारी जमीन पर कब्जा लिया जाएगा। सिंचाई विभाग को फोर्स उपलब्ध कराएंगे। जिले में अभी कहीं कोई उत्पीड़नात्मक कार्रवाई नहीं की जा रही है। - प्रभु एन सिंह, जिलाधिकारी
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