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UP: 'नेताओं में राष्ट्र के प्रति प्रेम कम', जगदगुरु शंकराचार्य बोले- सनातन को सत्ता नहीं, संस्कार की जरूरत

Wed, 14 Jan 2026 10:05 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: अरुन पाराशर Updated Wed, 14 Jan 2026 10:05 PM IST
सार

शारदा पीठाधीश्वर अनंत श्री विभूषित जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज बुधवार को आगरा पहुंचे। इस दाैरान उन्होंने कहा कि भारत कृषि प्रधान देश है, लेकिन ऐसा लगने लगा है कि कुर्सी प्रधान होकर रह गया है। 

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Jagadguru Shankaracharya Swami Rajarajeshwarashram made statement regarding political leaders
जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

सनातन का अंत नहीं है। वह न नूतन है और न ही पुरातन, जो सृष्टि के साथ आया है वह सनातन है। कई युग बीत गए, तमाम विदेशी ताकतें आईं और चली गईं। कोई भी सनातन का कुछ नहीं बिगाड़ सका। इसलिए सनातन को सत्ता की नहीं संस्कार की जरूरत है। सत्ता सनातन के आगे झुकती है। ये बातें शारदा पीठाधीश्वर अनंत श्री विभूषित जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहीं।
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वे बुधवार को जयपुर हाउस आए थे। उन्होंने कहा कि जो भी राजनेता और लोग कहते हैं कि भारत को सनातन राष्ट्र और हिंदू राष्ट्र बनाना है। उनका शब्द प्रयोग गलत है। बनाया उसे जाता है जो हो नहीं। सनातन और हिंदू राष्ट्र पहले से ही हैं। सनातन धर्म मानने वाले कुछ सत्ता के लिए खुद की मूल पहचान को भूल चुके हैं। सत्ता में बहुत खराबी होती है। वह वोट के लिए झुकती है, तुष्टीकरण करती है। भारत कृषि प्रधान देश है, लेकिन ऐसा लगने लगा है कि कुर्सी प्रधान होकर रह गया है। 
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कहा कि देश के वातावरण को देखकर लगता है कि अल्पसंख्यकों से ज्यादा बहुसंख्यकों को सत्ता की जरूरत है। वैसे तो कोई अल्पसंख्यक नहीं है, लेकिन जो खुद को मानते हैं वे अपनी परंपराओं और पंथ के विस्तार में लगे हैं। लेकिन हिंदू न एकजुट हुआ है और न ही जाग रहा है। उसे एकजुटता की जरूरत है। कहा कि राजनेताओं में जनता और राष्ट्र के प्रति प्रेम कम है। नेता अपने हित साधने में लगे हैं। जनता की भावनाओं के अनुरूप संविधान को बदला जा सकता है। नेताओं को चुना ही संविधान बदलने के लिए जाता है। वह उस व्यवस्था को करें जो राष्ट्रहित में हो।
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