{"_id":"68d8bb9f0fcc06b1990c531e","slug":"jack-fent-battling-brain-tumor-is-running-on-four-thousand-kilometers-2025-09-28","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"UP: 'अब जिंदगी लंबी नहीं...', ब्रेन ट्यूमर से जूझ रहे जैक फेंट बने मिसाल; चार हजार किमी की लगा रहे दाैड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP: 'अब जिंदगी लंबी नहीं...', ब्रेन ट्यूमर से जूझ रहे जैक फेंट बने मिसाल; चार हजार किमी की लगा रहे दाैड़
Sun, 28 Sep 2025 10:09 AM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: अरुन पाराशर
Updated Sun, 28 Sep 2025 10:09 AM IST
सार
ब्रेन ट्यूमर से जूझ रहे जैक सियाचिन से कन्याकुमारी तक 4000 किलोमीटर की दौड़ पर निकले हैं। रोज करीब 50 किलोमीटर दौड़ते हैं और ब्रेन ट्यूमर से जूझ रहे मरीजों के लिए फंड भी जुटा रहे हैं।
विज्ञापन
ब्रिटिश धावक जैक फेंट।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
ब्रेन ट्यूमर की बीमारी से जूझकर भी ब्रिटिश धावक जैक फेंट ने जिंदगी को हारने नहीं दिया। उन्होंने निराशा को पीछे छोड़ उम्मीद, मुस्कान और पॉजिटिविटी को अपनाया। इसी संदेश के साथ निकली उनकी दौड़ शनिवार को आगरा पहुंची, जहां कमला नगर में उनका स्वागत किया गया। इस मौके पर जैक फेंट ने कहा कि जिंदगी लंबी हो या छोटी फर्क नहीं पड़ता, फर्क पड़ता है कि आप उसे मुस्कुराकर कैसे जीते हैं।
डॉक्टरों ने उनसे 25 साल की उम्र में कह दिया था कि अब जिंदगी लंबी नहीं है। यह सुनकर जैक फेंट ने कुछ ही समय में ठान लिया कि अगर जिंदगी कम भी है तो इसे मुस्कान और जिंदादिली से जीना होगा। उन्होंने योग, ध्यान और संतुलित आहार से खुद को बदला और निराशा के बजाय उम्मीद को अपनी ताकत बनाया।
विज्ञापन
डॉक्टरों ने उनसे 25 साल की उम्र में कह दिया था कि अब जिंदगी लंबी नहीं है। यह सुनकर जैक फेंट ने कुछ ही समय में ठान लिया कि अगर जिंदगी कम भी है तो इसे मुस्कान और जिंदादिली से जीना होगा। उन्होंने योग, ध्यान और संतुलित आहार से खुद को बदला और निराशा के बजाय उम्मीद को अपनी ताकत बनाया।
विज्ञापन
बीमारी का पता चले 6 साल हो गए हैं। पिछले कई वर्षों से वह दुनिया के अलग-अलग देशों में दौड़ लगाकर लोगों को जिंदगी को उत्सव की तरह जीने का संदेश दे रहे हैं। इन दिनों जैक सियाचिन से कन्याकुमारी तक 4000 किलोमीटर की दौड़ पर निकले हैं। रोज करीब 50 किलोमीटर दौड़ते हैं और ब्रेन ट्यूमर से जूझ रहे मरीजों के लिए फंड भी जुटा रहे हैं।
शनिवार को कमला नगर में आयोजित कार्यक्रम में ताज हाॅफ मैराथन और आगरा स्कूल फाउंडेशन के सदस्यों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। न्यूरो सर्जन डॉक्टर संजय गुप्ता का कहना है कि बीमारी में दवाएं जितनी ही जरूरी है पॉजिटिविटी और संतुलित जीवनशैली।
जैक इसका जीता-जागता उदाहरण हैं, जिनसे मरीजों को प्रेरणा मिलती है। इस दौरान आयोजन समिति के अध्यक्ष संदीप ढल, उपाध्यक्ष डॉ. संजय गुप्ता, इवेंट हेड डॉ. विकास मित्तल, कोषाध्यक्ष आवेग मित्तल, दीपक नेगी और जय यादव भी मौजूद रहे।
ये भी पढ़ें-आश्रम कांड: रूम नंबर 101 और रात तीन बजे... यूपी के इस होटल में छिपा था चैतन्यानंद सरस्वती; गिरफ्तारी की कहानी
ये भी पढ़ें-आश्रम कांड: रूम नंबर 101 और रात तीन बजे... यूपी के इस होटल में छिपा था चैतन्यानंद सरस्वती; गिरफ्तारी की कहानी