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कोरोना...कोरोना सुनकर बुजुर्गों में बढ़ा चिड़चिड़ापन, मनोचिकित्सक से लेनी पड़ रही सलाह

Wed, 22 Jul 2020 01:27 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Wed, 22 Jul 2020 01:27 AM IST
सार

  • मनोचिकित्सकों के पास रोजाना आ रहे 170 से 200 कॉल, बुजुर्गों की संख्या ज्यादा 
  • चिड़चिड़ापन से बुजुर्गों में डिप्रेशन का खतरा, मनोचिकित्सकों कर रहे काउंसिलिंग 

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Irritability in the elderly due to coronavirus in agra
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

विस्तार

'पापा, आप बीमार हैं और बाहर जा रहे हैं, बाहर कोरोना का कितना खतरा है? दादू, आप भी ना, समझते नहीं, बुजुर्गों को ज्यादा खतरा है, फिर भी पार्क में जाने की जिद।' इन बातों को सुनकर बुजुर्गों में झल्लाहट और चिड़चिड़ापन बढ़ गया है। गुस्सा करने लगे हैं, कभी-कभार तो दवा और खाना तक छोड़ देते हैं। 

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आगरा के मनोचिकित्सकों के पास कोरोना से जुड़े 170 से 200 कॉल आ रहे हैं, इनमें बुजुर्गों से जुड़ी परेशानी ज्यादा है। परिजन बताते हैं कि बुजुर्गों को बाहर जाने से रोकने पर वो गुस्सा होते हैं, खाना छोड़ देते हैं, बातचीत नहीं करते या गुमसुम रहते हैं। यह सुनकर मनोचिकित्सक मरीज और परिजनों दोनों की काउंसिलिंग कर रहे हैं। 
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मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के डॉ. दिनेश राठौर ने कहा कि लॉकडाउन में सभी के घर पर रहने से बुजुर्गों की मनोदशा पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा। अब अनलॉक में लोग बाहर जा रहे हैं, बुजुर्गों पर रोकटोक होने लगी है। वह अकेलापन महसूस कर रोजमर्रा की जीवनशैली को याद कर रहे हैं। बार-बार कोरोना का हवाले से उनका दिमाग थक गया है, इससे तनाव, गुस्सा, घबराहट, बैचेनी रहने लगती है।  

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डिप्रेशन का खतरा बढ़ गया : डॉ. यूसी गर्ग

वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. यूसी गर्ग का कहना है कि कोरोना से मौत भी सबसे ज्यादा बीमार बुजुर्गों की हो रही है। उनके संक्रमण होने से परिजनों को भी खतरा है, इसके चलते बुजुर्गों को बाहर जाने से रोक रहे हैं। इससे उनकी मधुमेह, बीपी समेत अन्य परेशानी की जांच भी प्रभावित हो रही है। 

लोगों के मन में दहशत भी है और अपने हमउम्र के साथ मिल-बैठ भी नहीं पा रहे हैं। इससे बुजुर्गों में डिप्रेशन का खतरा बढ़ गया है। फोन पर इन परेशानी को सुनकर बुजुर्गों के अलावा परिजनों को भी कैसे व्यवहार करें, इसकी भी काउंसिलिंग कर रहे हैं।  

ये करें परिजन 
- रात-सुबह का खाने का समय न हो तो परिजन सुबह की चाय उनके साथ पीएं। 
- बच्चों को बोलें कि वो अपने दादा-दादी के साथ ज्यादा समय बिताएं।
- कोरोना वायरस से जुड़ी खबरों वाले समाचार से बचाएं, धार्मिक सीरियल दिखाएं।
- बाहर जाने के खतरे को मित्रवत भाषा में समझाएं, बताएं कि घर पर रहने में ही भलाई है।
- घर की गैलरी और बगीचा है तो उसमें घुमाएं, योग नियमित करने के लिए प्रेरित करें। 
 

केस 1

दयालबाग रहने वाले 68 साल के व्यक्ति बैंक से रिटायर्ड हैं। बीपी-मधुमेह की दिक्कत है। सुबह-शाम अपने मंदिर परिसर में सीनियर सिटीजन के साथ बैठकर समय गुजारते थे, वायरस के चलते उनके बेटे बाहर जाने से रोकते हैं। वह झल्लाने लगे हैं, कभी-कभार तो दवा तक नहीं लेते।
 

केस 2

विजय नगर में 72 साल के बुजुर्ग को सांस रोग की परेशानी है। दवा चल रही है, सरकारी शिक्षक थे। पालीवाल पार्क तक घूमने आते, साथियों के साथ घंटों समय बिताते। अनलॉक होने पर भी बेटा उनकी सेहत-उम्र का हवाला देकर घूमने से रोकते हैं। लगातार ऐसा होने से चिड़चिड़े हो गए हैं।

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