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UP: देह व्यापार...आईपीएस ने शर्मनाक हालत में पकड़े थे युवक-युवतियां, 12 साल बाद गवाही देने पहुंचे
Fri, 22 Aug 2025 07:56 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 22 Aug 2025 07:56 AM IST
सार
आईपीएस प्रभाकर चौधरी देह व्यापार के मुकदमे में 12 साल बाद गवाही देने पहुंचे। सीजेएम ने गैर जमानती वारंट जारी कर वेतन रोकने के आदेश दिए थे, जिसके बाद आईपीएस कोर्ट पहुंचे।
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प्रभाकर चौधरी
- फोटो : यूपी पुलिस वेबसाइट
विस्तार
आगरा के लोहामंडी के तत्कालीन सीओ प्रभाकर चौधरी ने न्यू आगरा थाने में 23 जून 2013 को देह व्यापार का केस दर्ज कराया था। वह वादी थे। अदालत में गवाही दर्ज कराने नहीं पहुंचने पर सीजेएम ने गैर जमानती वारंट जारी कर वेतन रोकने के आदेश दिए। इस पर बुधवार को वह गवाही देने पहुंचे। वर्तमान में आईपीएस प्रभाकर चौधरी डीआईजी अलीगढ़ हैं।
न्यू आगरा थाने में दर्ज केस के अनुसार लोहामंडी के तत्कालीन सीओ प्रभाकर चौधरी ने तहरीर दी थी। आरोप लगाया था 23 जून 2013 को उन्हें बल्केश्वर चौकी क्षेत्र स्थित एक मकान के अंदर देह व्यापार कराने की जानकारी मिली थी। वह न्यू आगरा थाना पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे। अंदर जाकर देखा तो तीन कमरों में महिला और युवक आपत्तिजनक हालत में मिले।
मौके से उनके अलावा अन्य महिला और युवक हिरासत में लिए थे। पुलिस ने विपिन शाक्य व अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया था जो सीजेएम की अदालत में राज्य बनाम विपिन शाक्य के नाम से है। अदालत ने मुकदमे के विचारण के दौरान उनकी गवाही दर्ज कराने के लिए कई नोटिस जारी किए। हाजिर न होने पर गैर जमानती वारंट जारी कर 350 सीआरपीसी का नोटिस देकर वेतन रोके जाने के आदेश दिए थे।
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न्यू आगरा थाने में दर्ज केस के अनुसार लोहामंडी के तत्कालीन सीओ प्रभाकर चौधरी ने तहरीर दी थी। आरोप लगाया था 23 जून 2013 को उन्हें बल्केश्वर चौकी क्षेत्र स्थित एक मकान के अंदर देह व्यापार कराने की जानकारी मिली थी। वह न्यू आगरा थाना पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे। अंदर जाकर देखा तो तीन कमरों में महिला और युवक आपत्तिजनक हालत में मिले।
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मौके से उनके अलावा अन्य महिला और युवक हिरासत में लिए थे। पुलिस ने विपिन शाक्य व अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया था जो सीजेएम की अदालत में राज्य बनाम विपिन शाक्य के नाम से है। अदालत ने मुकदमे के विचारण के दौरान उनकी गवाही दर्ज कराने के लिए कई नोटिस जारी किए। हाजिर न होने पर गैर जमानती वारंट जारी कर 350 सीआरपीसी का नोटिस देकर वेतन रोके जाने के आदेश दिए थे।
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