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Agra News: आग की लपटों में दब कर रह गईं मासूम चीखें
Thu, 09 Jan 2025 11:14 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Thu, 09 Jan 2025 11:14 PM IST
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कासगंज। सोरोंजी के मानपुर नगरिया में बृहस्पतिवार की शाम को छप्पर में लगी आग की लपटों में दो मासूम बहनों की चीखें दबकर रह गईं। उनकी इस आग में जिंदा ही जलकर मौत हो गई। इनका परिवार दोनों को छप्पर में सोते हुए छोड़कर खेत में चला गया था। दो मासूमों की दर्दनाक मौत की बात जिसने भी सुनी, हर कोई द्रवित हो उठा।
गांव में मोहर सिंह की दयनीय स्थिति है। घर भी पक्का नहीं है। झोंपड़ी ही डली हुई है। मोहर सिंह मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण कर रहा था। मोहर सिंह के आठ बच्चे हैं। इनमें तीन पुत्र व पांच पुत्रियां शामिल हैं। बृहस्पतिवार की शाम को मोहर सिंह अपनी दो पुत्रियों को राधिका (5 वर्ष) और नंदिनी (1 वर्ष) को छप्पर में छोड़कर अपने परिवार के साथ खेत पर बथुआ तोड़ने चला गया था। छप्पर में भैंस भी बंधी हुई थी।
इसी दौरान छप्पर में अचानक आग लग गई। आग की लपटें उठते देख ग्रामीण आग बुझाने के लिए दौड़े। सभी ने आग बुझाने के लिए अपनी तरफ से प्रयास किए। इस आग की लपटों में ही दोनों मासूम बहनों की चीखें दबकर रह गईं। जब तक आग पर काबू पाया जाता, तब तक दोनों बच्चियों की ह्रदय विदारक मौत हो चुकी थी। दो पुत्रियों की मौत से परिवार में चीत्कार मच गया।
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हर आंख हुई नम, नहीं जले चूल्हे
जिसने भी इस घटना के बारे में सुना, वही इस घटना के प्रति द्रवित हो उठा। घटनास्थल पर भी हर ग्रामीण की आंखें नम नजर आईं। दो मासूम बच्चियों की मौत के बाद गांव में किसी के चूल्हे नहीं जले। हर कोई इस घटना को लेकर रोता दिखाई दिया।
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गांव में मोहर सिंह की दयनीय स्थिति है। घर भी पक्का नहीं है। झोंपड़ी ही डली हुई है। मोहर सिंह मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण कर रहा था। मोहर सिंह के आठ बच्चे हैं। इनमें तीन पुत्र व पांच पुत्रियां शामिल हैं। बृहस्पतिवार की शाम को मोहर सिंह अपनी दो पुत्रियों को राधिका (5 वर्ष) और नंदिनी (1 वर्ष) को छप्पर में छोड़कर अपने परिवार के साथ खेत पर बथुआ तोड़ने चला गया था। छप्पर में भैंस भी बंधी हुई थी।
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इसी दौरान छप्पर में अचानक आग लग गई। आग की लपटें उठते देख ग्रामीण आग बुझाने के लिए दौड़े। सभी ने आग बुझाने के लिए अपनी तरफ से प्रयास किए। इस आग की लपटों में ही दोनों मासूम बहनों की चीखें दबकर रह गईं। जब तक आग पर काबू पाया जाता, तब तक दोनों बच्चियों की ह्रदय विदारक मौत हो चुकी थी। दो पुत्रियों की मौत से परिवार में चीत्कार मच गया।
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हर आंख हुई नम, नहीं जले चूल्हे
जिसने भी इस घटना के बारे में सुना, वही इस घटना के प्रति द्रवित हो उठा। घटनास्थल पर भी हर ग्रामीण की आंखें नम नजर आईं। दो मासूम बच्चियों की मौत के बाद गांव में किसी के चूल्हे नहीं जले। हर कोई इस घटना को लेकर रोता दिखाई दिया।