महंगाई: किचन से कारोबार तक लगी पेट्रोलियम की 'आग', सुबह का नाश्ता भी हुआ महंगा
घर के किचन से लेकर हर कारोबार पेट्रोलियम की महंगाई की आग से झुलस रहा है। सुबह का नाश्ता तक महंगा हो गया है। आगरा में इस साल जनवरी से अक्तूबर के बीच पेट्रोल और डीजल के दामों में 20 फीसदी तक इजाफा हुआ है। वहीं रसोई गैस सिलिंडर के दाम जनवरी से अब तक 205 रुपये बढ़ गए हैं। डीजल के रेट में उछाल से मालभाड़ा बढ़ गया है, जिसका असर प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से आम आदमी की जेब पर ही पड़ रहा है।
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पेट्रोलियम की बढ़ती कीमतों ने रोजमर्रा की जिंदगी और सुबह के नाश्ते पर भी असर डाला है। आगरा में बीते सप्ताह तक जो ब्रेड 20 रुपये की थी, वह अब 25 रुपये की और 40 रुपये वाली ब्रेड 45 रुपये की हो गई है। सभी ब्रेड निर्माता कंपनियों ने मिलकर दामों में बढ़ोतरी की है। इसके पीछे मैदा, ऑयल और मालभाड़े में बढ़ोतरी बताई है।
बेड़ई-कचौड़ी के दाम बढ़े
केवल ब्रेड नहीं, बल्कि सुबह बेड़ई और कचौड़ी का नाश्ता करने वालों को भी महंगाई का झटका लगा है। बेड़ई के दाम कई हलवाइयों ने बढ़ाकर 7 से 8 रुपये तो कुछ ने 10 रुपये तक कर दिए हैं। यही हाल समोसे का है। मिठाई की कीमतें के भाव 40 से 80 रुपये किलो तक बढ़े हैं। मिष्ठान विक्रेता शिशिर भगत के मुताबिक कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की कीमतें बढ़ने से सुबह के नाश्ते और मिठाइयों के दाम बढ़े हैं।
जूते की लागत 30 फीसदी तक बढ़ी
सोने की तर्ज पर जूते के रॉ मैटेरियल के दाम हर दिन तय हो रहे हैं। आगरा की 3.50 लाख आबादी जूते के कारोबार पर निर्भर है। पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़ने से जूते के रॉ मैटेरियल के दाम भी 20 से 30 प्रतिशत बढ़ गए हैं।
आगरा शू मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन अध्यक्ष उपेंद्र सिंह लवली के मुताबिक सिंथेटिक अपर, पीयू सोल, एडहेसिव और ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ गई है। इससे ऑर्डर पूरे करना मुश्किल हो रहा है। जिस समय ऑर्डर लिए थे, उस समय और अब की रॉ मैटरियल की कीमतें 30 फीसदी तक ज्यादा है। आधा माल तैयार हो चुका है, ऐसे में मजबूरी में ऑर्डर पूरे कर रहे हैं। मुनाफा एकदम खत्म हो गया। कोरोना के बाद ऑर्डर तो आने लगे, पर रॉ मैटेरियल की कीमतों ने मुसीबत बढ़ा दी है।
दिवाली पर घर सजाना हुआ 25 फीसदी तक महंगा
पेट्रोलियम पदार्थों की महंगाई का असर घर सजाने पर भी पड़ा है। दरअसल, पेट्रोलियम पदार्थों से ही घर सजाने के लिए डिस्टेंपर्स, इमल्शन, पेंट तैयार किए जाते हैं। इस साल जनवरी से 30 सितंबर के बीच पेंट कंपनियां 7 बार दाम बढ़ा चुकी हैं।
पेंट कारोबारी और आगरा पेंट व्यापार मंडल के अध्यक्ष मुरारी लाल गोयल के मुताबिक 15 साल में जितनी बार रेट बढ़े, उससे ज्यादा एक साल में बढ़ गए। 1000 रुपये तक प्रति बाल्टी पर बढ़ रहे हैं। डिस्टेंपर हो या पीयू या फिर मेलामाइन, तारपीन का तेल, प्राइमर तक के दाम में इजाफा है। बीते साल से ही घर सजाने के लिए पेंट के दामों में 25 फीसदी तक का उछाल आया है। उन्होंने पहली बार इतनी तेजी देखी है।
जूते और पेंट की तरह ही लोहा बाजार में हर दिन रेट तय हो रहे हैं। माल भाड़ा और लागत बढ़ने का असर लोहा कारोबार पर पड़ रहा है। ग्राहक जिस दिन रेट पूछकर जा रहे हैं, उसके दो या तीन दिन बाद खरीदने के लिए जब पहुंच रहे हैं तो रेट बढ़े मिल रहे हैं।
आगरा लोहा व्यापार एसोसिएशन के दिनेश अग्रवाल ने बताया कि एक सप्ताह पहले तक जो सरिया, 55 हजार रुपये प्रति टन थी, अब उसका रेट 61 हजार रुपये हो गया। कोयले की कमी, लागत में बढ़ोतरी के कारण छोटी कंपनियों ने उत्पादन बंद कर दिया है, जिससे माल की कमी और बढ़ गई, जिसका असर कीमतों पर पड़ रहा है। रियल एस्टेट की जो फर्म सरिया के रेट मांग रही हैं, वह दो दिन के अंदर ही बदल रही है। कीमतों में इतनी तेजी पहली बार ही हुई है।