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रेलवे बोर्ड के चेयरमैन बोले, टैल्गो के लायक नहीं देश के रेलवे ट्रैक
ब्यूरो/ अमर उजाला आगरा
Updated Sat, 27 May 2017 09:25 PM IST
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हाईस्पीड ट्रेन टैल्गो
आगरा में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन का यह बयान हाईस्पीड ट्रेन टैल्गो के दीवानों को मायूस कर सकता है। उनके बयान को सुनकर यह भी तय लग रहा है कि अब ये ट्रेन देश में शायद ही दौड़ेगी।
शनिवार को आगरा पहुंचे रेलवे बोर्ड के चेयरमैन एके मित्तल ने बताया कि टेल्गो ट्रेन की तकनीक भारत में सफल नहीं रही। इसके कई ट्रायल किए गए लेकिन भारतीय पटरियां इस तरह की ट्रेनों के संचालन के लिए नहीं बनी हैं।
चेयरमैन का कहना है कि टेल्गो के कोच का डिजाइन इस तरह का है कि इसे भारतीय ट्रैक पर चलाया जाना संभव नहीं है। बहुत से तकनीकी कारण हैं। इनमें सबसे बड़ा रोड़ा तो भारतीय रेलवे के ट्रैक की बनावट ही है। ऐसे में इस ट्रेन का संचालन मुश्किल ही है।
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बता दें कि देश की पहली हाईस्पीड ट्रेन के रूप में टैल्गो का ट्रायल जुलाई 2016 में पलवल और मथुरा जंक्शन स्टेशन के बीच किया गया था। अपने ट्रायल में ट्रेन ने 180 किमी प्रति घंटा की स्पीठ भी तय करी। इस ट्रेन की खूबियां जानकार लाखों लोग इसके दीवाने हो गए थे।
मथुरा में ट्रेन के ट्रायल वाले दिन ही हजारों लोग इसे देखने पहुंचे। ऐसे में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन की बात सुनकर उनको मायूसी हो सकती है जो टैल्गो में सफर करने का सपना सजा रहे थे।
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शनिवार को आगरा पहुंचे रेलवे बोर्ड के चेयरमैन एके मित्तल ने बताया कि टेल्गो ट्रेन की तकनीक भारत में सफल नहीं रही। इसके कई ट्रायल किए गए लेकिन भारतीय पटरियां इस तरह की ट्रेनों के संचालन के लिए नहीं बनी हैं।
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चेयरमैन का कहना है कि टेल्गो के कोच का डिजाइन इस तरह का है कि इसे भारतीय ट्रैक पर चलाया जाना संभव नहीं है। बहुत से तकनीकी कारण हैं। इनमें सबसे बड़ा रोड़ा तो भारतीय रेलवे के ट्रैक की बनावट ही है। ऐसे में इस ट्रेन का संचालन मुश्किल ही है।
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बता दें कि देश की पहली हाईस्पीड ट्रेन के रूप में टैल्गो का ट्रायल जुलाई 2016 में पलवल और मथुरा जंक्शन स्टेशन के बीच किया गया था। अपने ट्रायल में ट्रेन ने 180 किमी प्रति घंटा की स्पीठ भी तय करी। इस ट्रेन की खूबियां जानकार लाखों लोग इसके दीवाने हो गए थे।
मथुरा में ट्रेन के ट्रायल वाले दिन ही हजारों लोग इसे देखने पहुंचे। ऐसे में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन की बात सुनकर उनको मायूसी हो सकती है जो टैल्गो में सफर करने का सपना सजा रहे थे।