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UP: बंटवारे का दंश झेल रहा था देश, तब सत्संगी नाप रहे थे खेत; जानें पूरी कहानी

Sun, 20 Aug 2023 01:47 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sun, 20 Aug 2023 01:47 PM IST
सार

देश में बंटवारे के कारण शरणार्थी आ रहे थे। तब ब्रिटिश सरकार में 1 0 अगस्त 1947 को आजादी से पांच दिन पहले जमीन अधिग्रहण के लिए सत्संग सभा ने मुआयना कराया था।
 

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India facing brunt of partition then satsangi measuring fields
नक्शा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा में राधा सत्संग सभा दयालबाग में मनोहरपुर, खासपुर के ग्रामीणों के साथ जमीन के कई विवादों के कारण चर्चित हो चुकी है। दयालबाग की राधास्वामी सत्संग सभा का जमीनों के प्रति मोह नया नहीं है, बल्कि ब्रिटिश काल में जब देश बंटवारे का दंश झेल रहा था, ठीक उसी समय सत्संग सभा ब्रिटिश सरकार से नगला पदी, मऊ, घटवासन, जगनपुर, लश्करपुर में जमीन अधिग्रहण के लिए खेतों को नपवा रही थी। 10 अगस्त 1947 को आजादी से पांच दिन पहले सुबह प्रशासन की टीम के साथ निरीक्षण किया गया था, जबकि तब पूरे देश में बंटवारे के कारण शरणार्थी आ रहे थे।
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यमुना नदी के किनारे पोइया घाट पर डूब क्षेत्र की चरागाह में दर्ज जमीन की तारबंदी और सड़क निर्माण करने के मामले में राधास्वामी सत्संग सभा इन दिनों चर्चाओं में है। सत्संग सभा ने आजादी से पहले ही जमीनों के प्रति अपना रुझान जाहिर कर दिया था। पुराने रिकार्ड में दर्ज है कि 15 जनवरी 1946 को राधास्वामी सत्संग सभा, दयालबाग के सचिव बाबूराम जादौन ने 567 बीघा जमीन प्रशासन से मांगी थी। दयालबाग कॉलोनी के एक्सटेंशन, मेडिकल काॅलेज और डेरी फार्म के साथ चिल्ड्रन पार्क के लिए जमीन मांगी गई थी। 10 अगस्त 1947 की सुबह 7.30 बजे प्रशासन के अधिकारियों के साथ दयालबाग में जमीन की नापजोख चल रही थी। सभा के लिए 314.40 बीघा जमीन नगला पदी में और 248.10 बीघा जमीन मऊ में मांगी गई थी। तत्कालीन नायब तहसीलदार भगवती प्रसाद ने जमीन की नापजोख के लिए 40 लोगों की टीम तहसीलदार से मांगी थी।
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सभा ने इसलिए मांगी थी जमीन
- मेडिकल काॅलेज 367 बीघा
- ईंट निर्माण भट्ठा 45 बीघा
- डेयरी फार्म 61.42 बीघा
- दयालबाग काॅलोनी 642 बीघा
- टेक्निकल काॅलेज 305 बीघा
- दयालबाग एक्सटेंशन 367 बीघा
- एग्रीकल्चर फार्म 240 बीघा

 

इन जगहों पर चिन्हित की गई थी जमीन
- मऊ, नगला पदी में 563 बीघा
- जगनपुर में 246.13 बीघा
-जगनपुर घटवासन 305 बीघा
- लश्करपुर घटवासन 636 बीघा
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अधिकारी की रिपोर्ट पर गवर्नर ने किया खारिज
अभिलेखों के मुताबिक बंटवारे के बाद जब शरणार्थियों के लिए काॅलोनी बनाने के लिए जमीनों का अधिग्रहण किया जा रहा था और अन्न उपजाने की योजना पर काम चल रहा था, तब 29 जून 1949 को राधास्वामी सत्संग सभा के सचिव बाबूराम जादौन को तत्कालीन स्पेशल एलएओ एचएन कुलश्रेष्ठ ने पत्र भेजकर कहा कि जिस जमीन का अधिग्रहण सभा करना चाहती है, वह कृषि योग्य और उपजाऊ है। यह ध्यान में रखते हुए वह कम से कम एक तिहाई जमीन का प्रस्ताव पेश करें। इससे पहले 8 लोगों की आपत्तियों पर 8 जनवरी 1948 को प्रशासन की टीम समेत 13 सदस्यों ने संयुक्त निरीक्षण किया था, जिसमें सत्संग सभा से कहा गया कि उनके पास पहले ही मांगी गई जमीन से ज्यादा खाली जमीन पड़ी है। बाद में 10 अगस्त 1949 को सत्संग सभा का जमीन अधिग्रहण प्रस्ताव तत्कालीन राज्यपाल की आपत्ति के बाद खारिज कर दिया गया।
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