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देश में बढ़ रहीं ‘डबल इनकम नो किड्स’ फैमिली

Thu, 14 Jan 2016 02:02 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा Updated Thu, 14 Jan 2016 02:02 AM IST
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incrisisng in double income, no kids faimily
संतान नहीं होना, मेट्रो सिटी के हर तीसरे कामकाजी दंपति की समस्या है। मल्टी कंपनी में ऊंचा पद तो पत्नी भी नौकरी वाली। ऐसे में दोनों की व्यस्तता इतनी कि ‘विशेष दिनों’ में निजी पलों के लिए समय नहीं। 59वीं आल इंडिया कांग्रेस ऑफ आब्स्टेट्रिक्स एंड गाइनेकोलॉजी (आईकोग-2016) में आए विशेषज्ञ ऐसे दंपति को ‘डबल इनकम नो किड्स’ का नाम देते हैं। सूरत की इनफर्टिलिटी एक्सपर्ट डा. पूर्णिमा नाडकर्णी ने बताया कि ऐसे दंपति आईवीएफ (इनविंट्रो फर्टिलाइजर) पद्धति से संतान पा रहे हैं। ये मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
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फतेहाबाद रोड स्थित कलाकृति मैदान में बुधवार से शुरू हुई कांफ्रेंस में छह हजार डाक्टर शामिल हुए। पहले दिन प्री-कांफ्रेंस के तहत रवि हास्पिटल, टंडन नर्सिंग होम और सरकार नर्सिंगहोम में 40 मरीजों के रसौली, सर्वाइकल-ब्रेस्ट कैंसर, ब्लाक नस, अंडाशय की गांठ के आपरेशन हुए। कांफ्रेंस के दौरान इनका प्रसारण भी हुआ। विशेषज्ञों ने तकनीकी के बारे में चिकित्सकों को विस्तार से बताया। इससे पूर्व एसएन मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. एसके गर्ग ने प्री-कांफ्रेंस का शुभारंभ किया। कांफ्रेंस संयोजक डा. नरेंद्र मल्होत्रा, डा. अमित टंडन, चेयरपर्सन डा. सरोज सिंह, सचिव डा. जयदीप मल्होत्रा, डा. देवाशीष सरकार, डा. पूनम यादव ने भी आपरेशन किए।
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रहिए कहीं, स्टोर कराइए स्पर्म-अंडे
पति बाहर है या फिर विदेश में। विशेष दिनों में साथी के न होने पर स्थिति और विकराल। ऐसी हालत से निपटने के लिए पत्नी के अंडे और पति के स्पर्म को स्टोर किया जा रहा है। डा. वैशाली टंडन बताती हैं कि कामकाजी या व्यवसायी दंपति इस प्रक्रिया इस्तेमाल ज्यादा कर रहे हैं। विशेष तापमान में इनको लैब में सुरक्षित रखा जाता है।
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फीस के बदले कर दो स्पर्म डोनेट
आईवीएफ पद्धति अपनाने वाले दंपति में स्वस्थ पुरुष मिलने पर डाक्टर उन्हें हाथों हाथ लेते हैं। डाक्टरों ने बताया कि कई मौकों पर तो फीस के एवज में पुरुष से स्पर्म डोनेट करवा लिया जाता है। इनका उपयोग अन्य मरीज के लिए किया जाता है।

स्मोकिंग से नष्ट हो रहे स्पर्म
20 साल पहले औसतन हर पुरुष में स्पर्म की संख्या पांच करोड़ तक थी। अब ये संख्या 50 हजार तक सिमट गई है। 8-12 फीसदी पुरुषों में तो पांच हजार से भी कम रहते हैं। ऐसी स्थिति में संतानोपत्ति में दिक्कत रहती है। इसके लिए ग्लोबल वार्मिंग, धूम्रपान, स्वस्थ जीवन शैली का पालन न करना जैसे कारण हैं। महिलाओं की बात करें तो देर से शादी और बिगड़ी जीवनशैली से अंडे भी कम हो रहे हैं।
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