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Agra News: जैविक खेती की ओर किसानों का बढ़ रहा रुझान, तरल खाद बन रहा वरदान

Sun, 22 Oct 2023 01:02 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Updated Sun, 22 Oct 2023 01:02 AM IST
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Increasing trend of farmers towards organic farming, liquid fertilizer is becoming a boon
कासगंज। जैविक खेती को अपनाने के लिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (वल्ड वाइल्ड लाइफ फंड) के द्वारा जिले में पिछले काफी दिनों से पहल चल रही है। 70 गांव तक यह पहल पहुंची है। जहां किसान जैविक रूप से अमृत पानी (तरल खाद) तैयार करके खेती कर रहे हैं। जिससे किसानों को लाभ हो रहा है। वहीं रासायनिक खादों से खराब होने वाली मिट्टी की सेहत में भी सुधार हो रहा है।जिले के लखीमपुर, बजीरपुर, यादगारपुर, गेंदूपुरा, जारई, जाटऊ, महेशपुर, ढिलावली, अमरपुर, तवालपुर सहित तमाम ऐसे गांव हैं जहां के करीब 1500 किसानों इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम इन किसानों के संपर्क में हैं। जो लगातार खेती किसानी में अमृत पानी का प्रयेाग कर रहे। साथ ही शोध टीम भी जांच करने के लिए पहुंचती है, और किसानों को आवश्यक सलाह भी दे रही है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अधिकारियों का मानना है कि रसायनिक खाद के माध्यम से तैयार होने वाली उपज में रासायनिक तत्व रहते हैं। जो सेहत के लिए भी खतरनाक साबित हो रहे हैं। इसको देखते हुए भारत सरकार जैविक विधि से खेती पर जोर दे रही है। अमृत पानी के माध्यम से न केवल फसलों को पोषण मिल रहा है बल्कि कीट का प्रकोप भी नहीं होता। अमृत पानी के छिड़काव से खेतों में पर्याप्त नमी बनी रहती है।
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इस तरह तैयार होता है तरल खाद और यह होती है बचत
कासगंज। अमृत पानी तैयार करने में 1 लीटर गोमूत्र, 1 किलोग्राम गाय का गोबर, 1 किलोग्राम नीम की पत्ती, 1 किलोग्राम चने की दाल या बेसन, 100 ग्राम गुड़ को दस लीटर पानी में मिलाकर प्लास्टिक के डिब्बे में सुरक्षित करना है। इस डिब्बे के ढक्कन को मिट्टी से ढककर छांव में 15 दिन के लिए रख दिया जाता है। जिससे घोल तैयार हो जाता है। 15 मिलीलीटर पानी को इतनी ही मात्रा के सामान्य पानी में मिलाकर खेतों में छिडक़ाव किया जाता है। एक लीटर अमृत पानी का एक एकड़ फसल में छिड़काव होता है। इस तरह एक एकड़ फसल के लिए मात्र 50 रुपये का खर्च आता है। अमृत पानी लगान से खेतों में नमी बनी रहती और उर्वरकों की अधिक जरूरत नहीं रहती।
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कासगंज के किसानों ने अमृत पानी तैयार कर एक नया इतिहास रचा है। मुरादाबाद, कानपुर के किसानों को यहां प्रशिक्षण दिया जा चुका है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वैज्ञानिकों ने यहां रिसर्च भी किया है। अमृत पानी से किसानों की फसलों में लागत कम आ रही है और पैदावार ज्यादा हो रही है। - नितिन कौशल, डायरेक्टर, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ
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