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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Income from the horrors of the survey open locks

आयकर सर्वे के खौफ से नहीं खुले ताले

Sun, 15 Mar 2015 01:47 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला
ब्यूरो, अमर उजाला Updated Sun, 15 Mar 2015 01:47 AM IST
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आयकर विभाग का ताबड़तोड़ सर्वे कार्रवाई आतंक बन गया है। दहशतजदा व्यापारी प्रतिष्ठानों के ताले खोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे। सराफा कारोबारियों पर हुए सर्वे के बाद जौहरी बाजार, चौबेजी का फाटक, नमक की मंडी, किनारी बाजार में सन्नाटा छाया रहा। पड़ोसी कारोबारी भी प्रतिष्ठानों में ताले लगाकर चले गए।
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शनिवार को भी चौबेजी का फाटक सहित सराफा कारोबारियों में सर्वे को लेकर डर बना रहा। दरअसल, सराफा कमेटी के अध्यक्ष और महामंत्री दोनों पर ही सर्वे होने से आम व्यापारी स्थानीय अधिकारियों से अपना दर्द बयां करने से भी बच रहा है। शुक्रवार शाम को नमक की मंडी स्थित नितेश चेंस और चौबे जी का फाटक स्थित एपी ज्वैलर्स पर आयकर विभाग के सर्वे हुए थे। शनिवार को दोनों ग्रुप ने 8 करोड़ रुपये की अघोषित आय सरेंडर की। इनमें 5 करोड़ एपी ज्वैलर्स के तो 3 करोड़ नितेश चेंस के हैं। प्रधान आयकर आयुक्त अनिरूद्ध कुमार के निर्देशन में हुई सर्वे की कार्रवाई में विभाग को करीब पौने तीन करोड़ रुपये का टैक्स मिलेगा।
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जबरा मारे, रोने भी न दे
आगरा। कहावत है जबरा मारे और रोने भी न दे। आयकर सर्वे और सरेंडर, कुछ ऐसा ही है। महज तीन महीने में ताबड़तोड़ 150 करोड़ की आय सरेंडर करा चुके आयकर विभाग के आगे शहर के कारोबारी सहमे हुए हैं। अब उन्होंने अपना दुखड़ा सरकार को सुनाने का फैसला किया है। उनका प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय वित्त सचिव और वित्त मंत्री से मिलकर जबरन कराया जा रहा सरेंडर को रुकवाने की मांग करेगा। कारोबारी अपने साथ ऐसे तथ्य भी ले जा रहे हैं, जिनमें हाईकोर्ट और ट्रिब्यूनल के आदेश के खिलाफ विदेशी खरीदार का टीडीएस काट लिया गया है।
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तकलीफ की जड़ आयकर विभाग का टारगेट है। इसे पूरा करने में विभाग ‘जबरा’ बन बैठा है। जबकि हालत यह है कि कारोबार में बढ़ोतरी 5 से 10 फीसदी हुई, लेकिन आयकर विभाग का टारगेट 22 फीसदी बढ़ा दिया गया है। कारोबार जगत की तकलीफ यह है कि विभाग टारगेट पूरा करने को जब चाहे ‘सरेंडर का चिराग’ घिस देता है और वे रो भी नहीं पाते। कई सर्वे में तो अधिकारियों पर जबरन सरेंडर कराने का आरोप लगा। जूता उद्योग पहले ही यूरो के 85 से घटकर 65 रुपये पर आने से मुसीबत में है। रियल इस्टेट, सराफा और टिंबर मर्चेंट भी निशाने पर रहे। चंद सप्ताह पहले आगरा आए मुख्य आयकर आयुक्त के सामने भी व्यापारियों, उद्यमियों ने आयकर सर्वे से उत्पीड़न न करने की गुहार लगाई थी।

 

मोदी सरकार के खिलाफ बना माहौल
बीते साल चुनाव के दौरान व्यापारियों, उद्यमियों ने भाजपा को खुलकर समर्थन दिया। इसके नेताओं की रैलियों में भी उद्यमी, व्यापारी नजर आए। आयकर विभाग के ताबाड़तोड़ सर्वे के बाद उन्हीं व्यापारियों में आक्रोश तो फैला ही, केंद्रीय राज्यमंत्री डा. रामशंकर कठेरिया तक से रोष जताया। वे कहते हैं मोदी राज में टैक्स कानूनों का शिकंजा तो ढीला हुआ नहीं, आयकर विभाग का और कस गया। इस साल आयकर सर्वे ज्यादा ही हुए।
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