श्री पारस अस्पताल प्रकरण: 'साहब... 26 अप्रैल को कुछ तो हुआ था, अफरातफरी मची थी'
साहब, ऑक्सीजन की कमी बताई, यह कहा कि मरीजों को कहीं और लेकर जाओ। कुछ हो जाए तो हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं। 26 अप्रैल को कुछ तो हुआ साहब, अफरातफरी मची रही। यह बातें मरीज और उनके तीमारदारों ने आईएमए की जांच समिति को फोन पर बताई हैं।
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आगरा के श्री पारस अस्पताल प्रकरण में आईएमए की जांच समिति के हाथ 91 मरीजों की सूची आने के बाद करीब 20 मरीज और उनके परिजनों से बात की। पूछा गया कि आपका मरीज कब भर्ती था, क्या उन्हें कोरोना हुआ था। समिति के एक सदस्य से जानकारी मिली कि मरीज और तीमारदारों से फोन पर ऑक्सीजन की कमी थी, क्या स्टाफ ने उन्हें इसके बारे में बताया।
26 अप्रैल को मॉकड्रिल या फिर कई मरीजों की जान जाने की कोई जानकारी हुई। उनसे तमाम सवाल कर 26 की सुबह की हकीकत जाननी चाही। इनमें से लगभग हर एक मरीज और उनके परिजनों ने ऑक्सीजन की किल्लत और कुछ गड़बड़ होने की बात कही। उन्होंने बताया कि ऑक्सीजन की कमी के कारण सभी लोग घबराए हुए थे। डॉक्टर साहब भी थे, कोई कुछ भी बता नहीं रहा था।
मीडिया से तीन दिन नहीं करेंगे बात
आईएमए समिति की जांच में देरी पर लोगों ने सवाल उठाए थे। 24 दिन की जांच में किसी निष्कर्ष पर न निकलने पर समिति की लोगों ने खिंचाई भी की, ऐसे में मंगलवार को हुई बैठक में समिति के एक सदस्य ने मीडिया से बात न करने का सुझाव दिया। इस पर अन्य सदस्यों ने मरीजों से बयान पूरे होने के बाद मीडिया से बात करने को कहा, इसके बाद तीन दिन तक मीडिया से बात नहीं करने पर निर्णय हुआ।
जांच समिति के सदस्य डॉ. मुनीश्वर गुप्ता ने बताया कि आईएमए की बैठक में यह तय हुआ है कि तीन दिन तक मीडिया से बात नहीं की जाएगी, अब तीन दिन बाद ही मरीजों के परिजनों से बात करने के बाद मीडिया को जानकारी दी जाएगी।
जांच अब अंतिम दौर में
डॉ. राजीव उपाध्याय ने कहा कि श्री पारस अस्पताल में भर्ती मरीजों की सूची मिल गई है, उनसे बातकर रिपोर्ट बनाई जा रही है। तीन दिन में इन मरीजों से बात कर रिपोर्ट मिल जाएगी। जांच अब अंतिम दौर में है।
सूची में मरीजों का विवरण
25 अप्रैल: रात के 12 बजे तक 88 मरीज भर्ती थे।
26 अप्रैल: तड़के तीन और भर्ती हुए, संख्या 91 हुई।
27 अप्रैल: 81 मरीजों की सूची है, 26 अप्रैल को 10 मरीजों की मौत दर्शाई।
आधे मरीज एटा, इटावा, मैनपुरी, फिरोजाबाद के
श्री पारस अस्पताल में भर्ती 91 मरीजों में लगभग आधे इटावा, एटा, मैनपुरी, फिरोजाबाद क्षेत्र के हैं। इन सभी को कोरोना वायरस के लक्षण थे, लेकिन इनकी जांच नहीं कराई गई थी, लेकिन इलाज कोरोना वायरस का ही चल रहा था।