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इस मंडल के हर स्टेशन पर 'बिकती' हैं ट्रेनें, अफसरों व वर्दीधारियों की मिलीभगत से होता है ये कारोबार

Mon, 09 Jul 2018 08:00 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा Updated Mon, 09 Jul 2018 08:00 AM IST
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illegal vending business running in trains and railway stations
कैंट रेलवे स्टेशन पर खड़ी ट्रेन - फोटो : अमर उजाला
आगरा रेल मंडल के स्टेशन और ट्रेनों में अवैध वेंडिंग का बड़ा कारोबार चल रहा है। हर स्टेशन और ट्रेन का रेलवे से जुड़े वर्दीधारियों के पास पूरा हिसाब-किताब रहता है। वाणिज्य विभाग के कुछ कारिंदे भी इसमें हिस्सा लेते हैं। 
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कौन सी ट्रेन में किस स्टेशन से कितने वेंडर माल बेचने चढ़ने हैं। पूड़ी-सब्जी वाला, समोसे वाला और खिलौने वाले से लेकर मांगने वाले भी अपना हिस्सा देते हैं। ट्रेनें बिकती हैं और उनमें माल बेचने को रकम अदा करनी होती है। 
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वाणिज्य विभाग का अभियान चले तो अवैध वेंडरों से ही जुर्माना लिया जाता है, ताकि खेल चलता रहे। आगरा कैंट रेलवे स्टेशन से रोजाना 60-70 यात्री ट्रेनें (मेल, एक्सप्रेस) गुजरती हैं।
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अवैध वेंडर चुकाते हैं कीमत

इसी तरह आगरा कैंट स्टेशन पर रोजाना 30 से 35 हजार यात्री भी आते जाते हैं। सूत्रों ने बताया कि ट्रेनों में अवैध वेंडरों को 'कीमत' चुकानी पड़ती है। ट्रेनें बिकती हैं। यह सब एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक तय होता है। 

आगरा से मथुरा के बीच कहां कहां वेंडर चढ़ेंगे और उतरेंगे, इसकी जानकारी भी रहती है। कैंट के पास स्थित सराय ख्वाजा बस्ती के दर्जनों युवक ट्रेनों में अवैध वेंडिंग करते हैं। अवैध वेंडरों ने यहां गोदाम बना रखे हैं, इनमें वर्दीधारियों की शह रहती है। 

इसी तरह ट्रेनों में पेठा बेचने वाले, मथुरा में पेड़ा बेचने वाले वेंडर अलग हैं। वहीं स्टेशनों पर रहकर वेंडिंग करने वाले अलग हैं। इनका काम सुबह और शाम से लेकर रात तक की ट्रेनों में सामान बेचना है। 

जैसी ट्रेन, वैसा दाम

कैंट स्टेशन से गुजरने वाली हर ट्रेन में वेंडरों से वसूले जाने वाले पैसे से ही ट्रेन का दाम तय होता है। जैसे- सचखंड एक्सप्रेस से लगभग 50 हजार रुपये की उगाही हो जाती है। झेलम एक्सप्रेस में 40 से 45 हजार रुपये तक लिए जाते हैं। 

इसमें मथुरा से आगरा तक चलने वाले वेंडरों के रेट अलग-अलग हैं। पेठे वाले वेंडर 500 रुपये देगा तो पानी वाला 300 रुपये। पेटीज वाले के दाम अलग हैं तो खिलौने बेचने वाले के अलग। किन्नर ज्यादातर मथुरा तक सीमित हैं।

सुबह और शाम को गुजरने वाली ट्रेनों के दाम ज्यादा होते हैं, क्योंकि इन दोनों वक्त में यात्री खानपान पर पैसा खर्च करते हैं। जबकि दोपहर और रात्रिकालीन ट्रेनों में लोग खानपान का सामान कम खरीदते हैं।

जीआरपी से सेटिंग

यह अकसर स्टेशनों के आसपास रहने वाले लोग हैं। कई दफा चेकिंग में इन्हें पकड़ा भी जाता है, लेकिन आरपीएफ जुर्माना लगाकर इन्हें छोड़ देती है। बहुत ही कम मामलों में इन्हें जेल भेजा जाता है। जीआरपी के मुलाजिमों की भी इनसे सेटिंग रहती है। 

आगरा मंडल के वाणिज्य प्रबंधक डॉ संचित त्यागी ने बताया कि स्टेशन और ट्रेनों में वाणिज्य विभाग अवैध वेंडरों के खिलाफ अभियान चलाता है। लगातार इनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। इसके बाद भी यदा कदा घटनाएं हो जाती हैं।
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