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UP: मरीजों को निशुल्क दी जाती हैं जो दवाएं उनमें भी खेल, ऐसे चल रहा 50 फीसदी पर कमीशन का धंधा
Wed, 27 May 2026 09:28 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Wed, 27 May 2026 09:28 AM IST
सार
आगरा में फिजिशियन सैंपल दवाओं के अवैध कारोबार का खुलासा हुआ है, जहां ‘नॉट फॉर सेल’ दवाओं को नया लेबल लगाकर कई राज्यों में बेचा जा रहा था। औषधि विभाग की जांच में दवा प्रतिनिधि, हॉकर और मेडिकल विक्रेताओं की मिलीभगत सामने आई है।
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नकली दवाएं हुईं जब्त
- फोटो : संवाद
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विस्तार
मरीजों को निशुल्क दिए जाने वाली फिजिशियन सैंपल की दवाओं का अवैध कारोबार हो रहा है। नॉट फॉर सेल को मिटाकर इनको कई राज्यों में खपाया जा रहा है। इन दवाओं से होने वाली कमाई में विक्रेता और दवा प्रतिनिधि का 50-50 फीसदी का कमीशन है।
मेडिकल फर्म और अवैध गोदाम से जब्त सैंपल की दवाओं को उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में खपाया जा रहा है। इनमें 30 से अधिक नामी कंपनियों की दवाएं हैं। औषधि विभाग ने जांच में दवा प्रतिनिधि, हॉकर और विक्रेता की मिलीभगत पकड़ी है। केमिकल से नॉट फॉर सेल को मिटाकर नया लेबल (दवाओं की वास्तविक कीमत) लगाकर बाजार में बेची जा रही है।
दवा की कुल कीमत का प्रतिनिधि-हॉकर को 50 फीसदी और बाकी का विक्रेता को मिलते हैं। ये सैंपल दवाएं दूसरे शहरों से भी मंगवाई जाती हैं। सहायक आयुक्त औषधि बृजेश यादव ने बताया कि प्रारंभिक जांच में कमीशन पर सैंपल दवाओं का कई राज्यों में अवैध धंधा होने के इनपुट मिले हैं। दवा कंपनी प्रतिनिधि, हॉकर और विक्रेता की मिलीभगत है। इस रैकेट में शामिल लोगों की जांच की जा रही है। विभिन्न दवाओं के 85 नमूने लिए हैं। रिपोर्ट में फेल होने पर केस में धारा और बढ़ाई जाएंगी।
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18 मेडिकल फर्म को नोटिस, खरीद-बिक्री के बिल मांगे
औषधि विभाग की मुख्यालय की टीम ने तीन दिन में 18 से अधिक मेडिकल फर्म से दवाई जब्त की हैं। इनमें सैंपल, सरकारी, नकली और एक्सपायर्ड दवाएं पकड़ी गईं। इन कंपनियों को नोटिस किए जा रहे हैं। दवाओं की खरीद-बिक्री के तीन माह के बिल मांगे गए हैं।
चौथे दिन भी दवा बाजार बंद
औषधि विभाग की कार्रवाई के डर से चौथे दिन भी रविवार को दवा बाजार बंद रहा। इक्का-दुक्का दुकान ही खुली नजर आई। अभी औषधि विभाग की टीम आगरा में ही है। ऐसे में अन्य मेडिकल स्टोर पर जांच कर कार्रवाई की जा सकती है।
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मेडिकल फर्म और अवैध गोदाम से जब्त सैंपल की दवाओं को उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में खपाया जा रहा है। इनमें 30 से अधिक नामी कंपनियों की दवाएं हैं। औषधि विभाग ने जांच में दवा प्रतिनिधि, हॉकर और विक्रेता की मिलीभगत पकड़ी है। केमिकल से नॉट फॉर सेल को मिटाकर नया लेबल (दवाओं की वास्तविक कीमत) लगाकर बाजार में बेची जा रही है।
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दवा की कुल कीमत का प्रतिनिधि-हॉकर को 50 फीसदी और बाकी का विक्रेता को मिलते हैं। ये सैंपल दवाएं दूसरे शहरों से भी मंगवाई जाती हैं। सहायक आयुक्त औषधि बृजेश यादव ने बताया कि प्रारंभिक जांच में कमीशन पर सैंपल दवाओं का कई राज्यों में अवैध धंधा होने के इनपुट मिले हैं। दवा कंपनी प्रतिनिधि, हॉकर और विक्रेता की मिलीभगत है। इस रैकेट में शामिल लोगों की जांच की जा रही है। विभिन्न दवाओं के 85 नमूने लिए हैं। रिपोर्ट में फेल होने पर केस में धारा और बढ़ाई जाएंगी।
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18 मेडिकल फर्म को नोटिस, खरीद-बिक्री के बिल मांगे
औषधि विभाग की मुख्यालय की टीम ने तीन दिन में 18 से अधिक मेडिकल फर्म से दवाई जब्त की हैं। इनमें सैंपल, सरकारी, नकली और एक्सपायर्ड दवाएं पकड़ी गईं। इन कंपनियों को नोटिस किए जा रहे हैं। दवाओं की खरीद-बिक्री के तीन माह के बिल मांगे गए हैं।
चौथे दिन भी दवा बाजार बंद
औषधि विभाग की कार्रवाई के डर से चौथे दिन भी रविवार को दवा बाजार बंद रहा। इक्का-दुक्का दुकान ही खुली नजर आई। अभी औषधि विभाग की टीम आगरा में ही है। ऐसे में अन्य मेडिकल स्टोर पर जांच कर कार्रवाई की जा सकती है।