{"_id":"6a053a7d48ceb2c6ef0c06ee","slug":"illegal-sand-mining-threatens-chambal-sanctuary-supreme-court-to-deliver-crucial-verdict-today-2026-05-14","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"चंबल में बालू माफिया बेलगाम: घड़ियाल-डॉल्फिन पर संकट, सुप्रीम कोर्ट आज सुनाएगा बड़ा फैसला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चंबल में बालू माफिया बेलगाम: घड़ियाल-डॉल्फिन पर संकट, सुप्रीम कोर्ट आज सुनाएगा बड़ा फैसला
Thu, 14 May 2026 08:29 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 14 May 2026 08:29 AM IST
सार
चंबल सेंक्चुअरी में अवैध बालू खनन से घड़ियाल, डॉल्फिन और मगरमच्छों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। सुप्रीम कोर्ट आज इस मामले में बड़ा फैसला सुनाएगा, जबकि रिपोर्ट में वनकर्मियों के पास हथियार और सुरक्षा संसाधनों की भारी कमी उजागर हुई है।
विज्ञापन
चंबल सेंक्चुअरी में अवैध बालू खनन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
नेशनल चंबल सेंक्चुअरी क्षेत्र में बालू के अवैध खनन के मामले में सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच बृहस्पतिवार को फैसला सुनाएगी। अवैध खनन से चंबल सेंक्चुअरी में जलीय जीवों पर छाए संकट को देखते हुए स्वत: संज्ञान के इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 11 मई को सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी की रिपोर्ट पर सुनवाई की थी और फैसला सुरक्षित कर लिया था। कमेटी की ओर से निरीक्षण के लिए आगरा और मध्य प्रदेश, राजस्थान के सेंक्चुअरी क्षेत्र में आए सीपी गोयल ने कोर्ट के सामने पर्यावरण पर छाए संकट को बयां किया था।
विज्ञापन
1,695 वर्ग किलोमीटर में फैली चंबल सेंक्चुअरी 2026 घड़ियालों, 869 मगरमच्छ और 221 डॉल्फिनों का घर है। यहां राजस्थान और मध्य प्रदेश की सीमा में बालू का अवैध खनन जलीय जीवों के लिए संकट बन चुका है। सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी के सीपी गोयल ने अपनी रिपोर्ट नंबर 10 में स्पष्ट कहा है कि संगठित अवैध रेत खनन, अभयारण्य के अंतर-राज्यीय स्वरूप और अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों पर हिंसक हमलों के खतरे को देखते हुए सेंक्चुअरी में वन रक्षकों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
यूपी में 42 किमी. पर केवल एक वन रक्षक
रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश में प्रति 42 वर्ग किमी क्षेत्र में केवल एक वन रक्षक है। यहां 33 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 15 वन्यजीव रक्षक हैं। मध्य प्रदेश में 435 वर्ग किमी. के लिए 50 वन रक्षक हैं। इस तरह यहां हर 8.7 वर्ग किमी. पर एक वन रक्षक निगरानी रखता है। राजस्थान में 318 वन रक्षक हैं, जो दो वर्ग किमी. में निगरानी रखते हैं, लेकिन यहां बालू खनन के मामले ज्यादा हैं। नदी में गश्त के लिए नाविक, वायरलेस ऑपरेटर, चालक, फील्ड सहायक और सुरक्षा प्रहरी की जरूरत कमेटी ने बताई है। मध्य प्रदेश में वन रक्षक हरकेश गुर्जर की हत्या सहित वन अधिकारियों पर बार-बार होने वाले हमलों से संवेदनशील घाटों और पुल स्थलों पर समर्पित विशेष सशस्त्र पुलिस/एसएएफ/आरएसी कर्मियों की तैनाती की जरूरत बताई।
रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश में प्रति 42 वर्ग किमी क्षेत्र में केवल एक वन रक्षक है। यहां 33 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 15 वन्यजीव रक्षक हैं। मध्य प्रदेश में 435 वर्ग किमी. के लिए 50 वन रक्षक हैं। इस तरह यहां हर 8.7 वर्ग किमी. पर एक वन रक्षक निगरानी रखता है। राजस्थान में 318 वन रक्षक हैं, जो दो वर्ग किमी. में निगरानी रखते हैं, लेकिन यहां बालू खनन के मामले ज्यादा हैं। नदी में गश्त के लिए नाविक, वायरलेस ऑपरेटर, चालक, फील्ड सहायक और सुरक्षा प्रहरी की जरूरत कमेटी ने बताई है। मध्य प्रदेश में वन रक्षक हरकेश गुर्जर की हत्या सहित वन अधिकारियों पर बार-बार होने वाले हमलों से संवेदनशील घाटों और पुल स्थलों पर समर्पित विशेष सशस्त्र पुलिस/एसएएफ/आरएसी कर्मियों की तैनाती की जरूरत बताई।
हथियार हैं न बुलेटप्रूफ जैकेट
उत्तर प्रदेश सीमा में मौजूद सेंक्चुअरी क्षेत्र की सुरक्षा के लिए वन विभाग को 30 सीसीटीवी सिस्टम, 9 ड्रोन, 48 बुलेटप्रूफ जैकेट, 33 नाइट विजन डिवाइस, 11 वायरलेस सिस्टम, बालू में चलने के लिए 4x4 विशेष वाहन, 39 मोटरसाइकिल, नाव और सुरक्षा किट की आवश्यकता है। गोयल ने रिपोर्ट में कहा है कि संगठित अवैध खनन गिरोहों से निपटने के लिए सेंक्चुअरी क्षेत्र के वन्यजीव कर्मियों के पास हथियार हैं न ही जैकेट। सुरक्षा उपकरणों की घोर कमी है। बुलेटप्रूफ जैकेट, आधुनिक राइफलें, वायरलेस सिस्टम, थर्मल निगरानी न होने से सेंक्चुअरी को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया है।
उत्तर प्रदेश सीमा में मौजूद सेंक्चुअरी क्षेत्र की सुरक्षा के लिए वन विभाग को 30 सीसीटीवी सिस्टम, 9 ड्रोन, 48 बुलेटप्रूफ जैकेट, 33 नाइट विजन डिवाइस, 11 वायरलेस सिस्टम, बालू में चलने के लिए 4x4 विशेष वाहन, 39 मोटरसाइकिल, नाव और सुरक्षा किट की आवश्यकता है। गोयल ने रिपोर्ट में कहा है कि संगठित अवैध खनन गिरोहों से निपटने के लिए सेंक्चुअरी क्षेत्र के वन्यजीव कर्मियों के पास हथियार हैं न ही जैकेट। सुरक्षा उपकरणों की घोर कमी है। बुलेटप्रूफ जैकेट, आधुनिक राइफलें, वायरलेस सिस्टम, थर्मल निगरानी न होने से सेंक्चुअरी को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया है।