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सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी की रिपोर्ट: ईको सेंसिटिव जोन में हुआ अवैध खनन, घड़ियाल-डॉल्फिन पर मंडराया खतरा

Wed, 06 May 2026 09:47 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Wed, 06 May 2026 09:47 AM IST
सार

चंबल सेंक्चुअरी के ईको सेंसिटिव जोन में अवैध खनन से घड़ियाल, डॉल्फिन और अन्य वन्यजीवों का अस्तित्व खतरे में है। सीईसी रिपोर्ट में तीनों राज्यों की लापरवाही और समन्वय की कमी उजागर हुई है।

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Illegal Mining Threatens Gharials and Dolphins in Chambal Sanctuary
चंबल सेंक्चुअरी में मगरमच्छ और घड़ियाल। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

घड़ियाल, मगरमच्छ, डॉल्फिन और दुर्लभ प्रजाति के कछुओं का घर चंबल नदी में बालू के अवैध खनन से इनके जीवन पर संकट मंडरा रहा है। चंबल सेंक्चुअरी के एक किमी दायरे में बनाए गए ईको सेंसिटिव जोन में ऊंटों और ट्रैक्टर के जरिये अवैध खनन किया जा रहा है। बीते एक साल में उत्तर प्रदेश की सीमा में ऐसे 10 मामले पकड़े गए, जिनमें से 7 में ऊंटों के जरिये बालू खनन करके ले जाई जा रही थी तो तीन में ट्रैक्टर-ट्रॉली का उपयोग किया गया। पुलिस की ढिलाई के कारण इन 10 में से 7 मामलों में जांच जारी है, केवल तीन मामले ही कोर्ट तक पहुंच सके हैं।
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सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी (सीईसी) की रिपोर्ट में तीनाें राज्यों उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान ने अवैध खनन के एक साल में दर्ज किए गए मामलाें को स्वीकार किया है। इनमें उत्तर प्रदेश ने 10, राजस्थान ने 68 और मध्य प्रदेश ने 24 प्राथमिकी अवैध खनन और परिवहन में दर्ज की हैं।
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उत्तर प्रदेश के वन विभाग के अफसरों ने सीईसी सदस्य सीपी गोयल के सामने अपनी सीमा में अवैध खनन से इन्कार किया था, लेकिन एक किमी. के ईको सेंसिटिव जोन में बीते साल अप्रैल से इस साल 31 मार्च तक 10 मामले रंगेहाथ पकड़े गए, जबकि कई मामलों में खनन माफिया पकड़ में नहीं आ पाए।
 
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सीईसी ने कहा- तीनों राज्यों की कमेटी फेल
चंबल सेंक्चुअरी में अवैध खनन मामले में सुप्रीम कोर्ट के स्वत: संज्ञान के बाद दाखिल की गई सीईसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि तीनों राज्यों के समन्वय के लिए बनाई गई कमेटी फेल साबित हुई है। राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति ने राष्ट्रीय त्रि-राज्य चंबल अभयारण्य प्रबंधन एवं समन्वय समिति (एनटीआरआईआईएस-सीएएस एमएसीसी) का गठन किया था। यह कमेटी गंभीर रूप से विफल रही है। सीईसी ने कहा है कि मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश तीनाें ही संयुक्त रूप से राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य का प्रबंधन और संचालन करते हैं। यह देखा गया है कि वन, खनन, पुलिस और राजस्व विभागों सहित नियामक प्राधिकरण अक्सर समन्वित और प्रभावी ढंग से कार्य करने में विफल रहे हैं, जिससे अवैध संचालकों को अधिकार क्षेत्र की कमियों का फायदा उठाने का अवसर मिला है। प्रवर्तन को लागू ही नहीं किया गया।

चंबल में इन पर है संकट
चंबल सेंक्चुअरी क्षेत्र में 2026 घड़ियाल, 850 मगरमच्छ, 225 डॉल्फिन के साथ दुर्लभ प्रजाति के कछुए हैं। इसके अलावा तेंदुआ, नीलगाय, काला हिरण (ब्लैकबक), जंगली सूअर जैसे जानवर भी यहां देखे जा सकते हैं। पक्षी प्रेमियों के लिए यहां 69 से अधिक प्रजातियां मौजूद हैं, जिनमें सारस क्रेन, बारहेडेड गूज, मयूर (मोर), किंगफिशर और विभिन्न प्रकार के प्रवासी पक्षी आते हैं, जिन पर अवैध खनन के कारण संकट है। इसी संकट को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में 11 मई को महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है।

 
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