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पानी की बर्बादी नहीं रोकी तो बूंद-बूंद के लिए तरसेंगी आने वाली पीढिय़ां

Tue, 06 Jul 2021 11:04 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Tue, 06 Jul 2021 11:04 PM IST
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If the wastage of water is not stopped, then the coming generations will yearn for drop by drop
फिरोजाबाद। कहा जाता है कि जल ही जीवन है, लेकिन जिस तीव्र गति से जल का दोहन हो रहा है उसके दुष्परिणाम आने वाले समय में भोगने होंगे। भूगर्भ जल निरंतर नीचे जा रहा है।
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29 लाख आबादी वाली सुहागनगरी में भूगर्भ जल की स्थिति ठीक नहीं है। फिरोजाबाद शहर की सात लाख से अधिक आबादी तो गंगा (नहर) का पानी पी रही है। शहर में 280 से 300 फुट गहराई में बोरिंग करने पर भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है। शहर के हिमायूंपुर, सुहागनगर, मुरलीनगर इलाकों में साढ़े तीन सौ फीट गहरी बोरिंग करने के बाद भी पीने योग्य पानी नहीं मिलता। ग्रामीण अंचल में यमुना की तलहटी वाले इलाकों में पीने का शुद्ध पानी नहीं मिलता है। ग्रामीण अंचल में नारखी ब्लॉक के गोथुआ, मिलिक और एटा से फिरोजाबाद में शामिल किए गए करीब 24 से अधिक गांवों का पानी भी खारा है। उसे पीना तो दूर बल्कि कपड़े धोने तक में उसका प्रयोग करना भी मुनासिब नहीं है।
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ग्रामीण दूसरे गांव से पीने के पानी का इंतजाम करते हैं। मिलिक में पानी इतना खराब है कि ग्रामीणों के हाथ-पैर तक खराब (कुबड़े) हो जाते हैं। हालात हाथवंत ब्लॉक के भी अच्छे नहीं है। यहां खारे पानी की शिकायत होने के कारण 24 गांवों में तो पानी की सप्लाई टंकी से हो रही है। जसराना एवं एका में नहरें होने के कारण यहां भूगर्भ जल की स्थिति जरूर ठीक है, लेकिन शिकोहाबाद क्षेत्र में पानी काफी तेजी से घट रहा है।
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- शहरी क्षेत्र में प्रति व्यक्ति 135 लीटर पानी प्रतिदिन चाहिए।
- ग्रामीण अंचल में प्रति व्यक्ति 70 से 80 लीटर पानी खर्च करता है।
जिले में पेयजल के संसाधन-
पेयजल टंकियां-149
हैंडपंप-38,161
ब्लॉकवार हैंडपंपों का विवरण
एका-4653
हाथवंत-3627
टूंडला-4375
फिरोजाबाद-6341
नारखी-3577
मदनपुर-4566
शिकोहाबाद-4055
जसराना-3140
अरांव- 3827
यह बरतें सावधानी तो भूगर्भ में बढ़ सकता है पानी...
- किसान यदि ड्रिप एरीगेशन प्रणाली अपनाएं तो फसलों की सिंचाई में पानी की होने वाली बर्बादी को रोका जा सकता है।
- किसान यदि अधिक पानी वाली फसलों के बजाय कम पानी में उत्पादित होने वाली फसलों को बोए तो भी जल संरक्षित होगा।
- प्रत्येक मकान में वाटर रीचार्ज वेल को अनिवार्य किया जाए चाहे मकान छोटा हो या फिर बड़ा। यदि कोई ऐसा न करे तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
- शहर के सार्वजनिक स्थलों- पार्कों, मैदानों के साथ तालाबों व जलाशयों का चिह्नांकन करके वहां पानी रिचार्ज वेल की व्यवस्था की जाए ताकि बारिश का पानी जमीन के अंदर पहुंचे। इससे जलस्तर बढ़ेगा।

- शहर के साथ ग्रामीण अंचल में जहां तालाबों पर कब्जा हो गया है, उन तालाबों को कब्जामुक्त करके खुदाई कराई जाए ताकि जलस्तर बढ़ सके।
- खेतों की मेड़बंदी को ठीक कराया जाए। खेत का पानी खेत में रुकेगा, तो उससे जलस्तर बढ़ेगा। वर्तमान में मेड़बंदी भी काफी कम है।
ग्रामीण अंचल में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 70 लीटर पानी की जरूरत होती है। पेयजल टंकी, टीटीएसपी एवं हैंडपंप के माध्यम से जरूरत के अनुरूप पानी मुहैया कराया जा रहा है। कुछ टंकियां खराब हैं जिन्हें ठीक कराने की प्रक्रिया चल रही है।
आरके सोलंकी, एक्सईएन, जल निगम, फिरोजाबाद।
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