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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: सड़क की डिजाइन या रखरखाव में कमी से हुआ हादसा, तो अधिकारी होंगे जिम्मेदार

Wed, 08 Oct 2025 08:17 AM IST
आगरा ब्यूरो अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: आगरा ब्यूरो Updated Wed, 08 Oct 2025 08:17 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं कि सड़क के डिजाइन और रखरखाव में कमी से अगर हादसा हुआ तो उसके लिए अफसर और ठेकेदार जिम्मेदार होंगे। 

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If a road accident occurs due to lack of design and maintenance, the officers will be held responsible.
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सड़क के डिजाइन और रखरखाव में कमी से अगर हादसा हुआ तो उसके लिए अफसर और ठेकेदार जिम्मेदार होंगे। पैदल यात्रियों व सड़क पर सुरक्षित सफर को लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही बढ़ेगी। यातायात नियमों के पालन में सख्ती होगी।
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आगरा डेवलपमेंट फाउडेंशन के सचिव केसी जैन और हेमंत जैन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए फुटपाथ, जेब्रा लाइन, रोड डिजाइन व अन्य कमियों के कारण पैदल यात्रियों की जान का जोखिम कम करने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने याचिका की सुनवाई के बाद देशव्यापी सड़क सुरक्षा में सुधार के लिए निर्देश जारी किए हैं।
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कोर्ट ने माना कि अच्छी सड़कें होना नागरिकों का अधिकार है। अतिक्रमण और लापरवाही पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। पैदल यात्री की सुरक्षा सर्वोपरि हो और जिम्मेदार एजेंसियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए। केसी जैन ने पिछले 2016 से 2023 तक पैदल यात्रियों की मौत के आंकड़े पेश किए। बताया कि सड़क दुर्घटनाओं में 20 प्रतिशत से अधिक मौत पैदल यात्रियों की हो रही है।
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ऐसे में पैदल यात्री सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 50 लाख जनसंख्या से अधिक शहरों में फुटपाथों का सात महीने में ऑडिट कराने के निर्देश दिए। ऑडिट में बाजार, विद्यालय, अस्पताल, रेलवे-बस स्टेशन व धार्मिक स्थलों को प्राथमिकता पर रखने, इंडियन रोड कांग्रेस की गाइडलाइन के अनुसार फुटपाथ की चौड़ाई, ऊंचाई, रैम्प, टेक्सटाइल पेवर्स का पालन करने, सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए हैं। दो पहिया वाहनों पर चालक व सवार दोनों के लिए हेलमेट अनिवार्य करने, उल्लंघन पर लाइसेंस निलंबन की रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।


इसके अलावा गलत लेन में ड्राइविंग, ओवरटेकिंग पर कार्रवाई करने, अवैध लाइट और हूटर पर रोक लगाने, नए नियमों का निर्माण करने के निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सुरक्षित और अतिक्रमण-मुक्त फुटपाथ नागरिकों का अधिकार है। राज्य सरकारों का कर्तव्य है कि वह इसे सुनिश्चित करें। सड़क से संबंधित विभाग को डाटा-आधारित कार्ययोजना बनानी चाहिए जिससे किसी भी डिजाइन या रखरखाव की त्रुटि से होने वाली माैत या चोट के लिए जिम्मेदारी सुनिश्चित की जा सके। मामले की अगली सुनवाई सात महीने बाद होगी।
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