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UP: मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे दबी हैं भगवान कृष्ण की मूर्तियां, वैज्ञानिक सर्वे के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल
Fri, 15 Mar 2024 02:24 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 15 Mar 2024 02:24 PM IST
सार
आगरा के लघुवाद न्यायालय में विचाराधीन योगेश्वर श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ ट्रस्ट के केस में जामा मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे दबे श्रीकृष्ण के विग्रह के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा वैज्ञानिक सर्वे के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया है। वादी का कहना है कि इस बात का जिक्र औरंगजेब के शासनकाल में लिखी मासिर-ए-आलमगीरी पुस्तक के 13 वें अध्याय में किया गया है।
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श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
आगरा लघुवाद न्यायालय में योगेश्वर श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ ट्रस्ट के श्रीकृष्ण विग्रह, भगवान श्रीकृष्ण लला विराजमान आदि बनाम उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड का मामला विचाराधीन है। इसमें जामा मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे दबे प्रभु श्रीकृष्ण के विग्रह के वैज्ञानिक सर्वे के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने प्रार्थनापत्र दाखिल किया है।
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वादी व अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने बताया कि वर्ष 1670 ई. में मुगल शासक औरंगजेब के आदेशानुसार मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर के प्रभु श्रीकृष्ण के विग्रह आगरा की जामा मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे दबा दिए गए थे। जिसका उल्लेख औरंगजेब के शासनकाल में लिखी मासिर-ए-आलमगीरी पुस्तक के 13वें अध्याय में किया गया है। शाहजहां की बड़ी बेटी जहांआरा थी, जिसे मुगलकाल में बेगम साहिबा की पदवी प्राप्त थी। उस समय जामा मस्जिद को बेगम साहिब की मस्जिद कहा जाता था।
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अधिवक्ता ने बताया कि जामा मस्जिद परिसर में फारसी भाषा का एक शिलालेख है, जिसमें लिखा है कि जामा मस्जिद को बेगम ने बनवाया था। अधिवक्ता ने बताया कि जामा मस्जिद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधीन एक संरक्षित स्मारक है। आरटीआई से पुरातत्व विभाग से जानकारी मांगी गई थी कि जामा मस्जिद का आज तक किसी प्रकार का उत्खनन अथवा शोध कार्य किया गया है। 27 फरवरी को भेजे जवाब में एएसआई ने किसी प्रकार के उत्खनन कार्य से इन्कार किया। ऐसी स्थिति में यह आवश्यक हो गया है कि जामा मस्जिद की सीढ़ियों का वैज्ञानिक सर्वे कराया जाए। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने एएसआई को प्रतिवादी बनाए जाने का आदेश जारी किया। सुनवाई की अगली तिथि 29 मार्च नियत की गई।
वहीं, लघु वाद न्यायाधीश मृत्युंजय श्रीवास्तव की कोर्ट में विचाराधीन देवकीनंदन ठाकुर बनाम जामा मस्जिद मामले में पुरातत्व विभाग एवं केंद्र सरकार की ओर से शुक्रवार को कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। कोर्ट ने दोनों को नोटिस जारी करते हुए 29 मार्च की तिथि नियत की। यह जानकारी देवकीनंदन ठाकुर की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता विनोद कुमार शुक्ला और राजेश कुलश्रेष्ठ ने दी है।
वहीं जामा मस्जिद मामले में कामरेड भजनलाल लोधी की ओर से अलग-अलग जिला जज की कोर्ट में प्रस्तुत की गई रिवीजन कोर्ट ने पंजीकृत कर ली है। उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, प्रबंधक कमेटी जामा शाही मस्जिद, दूसरी रिवीजन में इंतजामिया कमेटी शाही मस्जिद एवं श्रीकृष्ण जन्म सेवा संस्थान के लिए जवाब के लिए नोटिस जारी करते हुए 16 अप्रैल की तिथि नियत कर दी गई है। भजनलाल ने स्वयं को पक्षकार बनाने के लिए प्रार्थनापत्र दिया गया था, जिसे 26 फरवरी को निरस्त कर दिया गया था।