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नोटबंदी में ‘असहयोग’ पर घिरी आईसीआईसीआई बैंक
नोटबंदी में ‘असहयोग’ पर घिरी आईसीआईसीआई बैंक
Updated Tue, 12 Sep 2017 02:53 PM IST
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नोटबंदी में ‘असहयोग’ पर घिरी आईसीआईसीआई बैंक
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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आठ नवंबर को नोटबंदी के बाद रिजर्व बैंक ने आगरा की बैंकों को कैश आपूर्ति के लिए आईसीआईसीआई बैंक, संजय प्लेस ब्रांच को करेंसी चेस्ट बनाया, लेकिन बैंक ने ग्रामीण बैंकों को कैश उपलब्ध कराने से ही मना कर दिया। एक तरफ सरकारी बैंक कैश के लिए जूझ रहे थे, तो दूसरी ओर आईसीआईसीआई बैंक सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों के साथ नोटबंदी में ‘असहयोग’ कर रहा था। डीएम गौरव दयाल ने आईसीआईसीआई बैंक के इस असहयोग की शिकायत रिजर्व बैंक से की है। दूसरी ओर बैंक द्वारा आठ नवंबर से अब तक मिली करेंसी और पुराने नोट जमा होने का रिकार्ड न देने पर वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक को पत्र भेजने की तैयारी की जा रही है।
सरकारी बैंकों खासकर ग्रामीण बैंकों को नोटबंदी के दौरान कैश उपलब्ध न कराने का मामला वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक तक पहुंच गया है। डीएम गौरव दयाल ने आईसीआईसीआई बैंक द्वारा ग्रामीण बैंकों को कैश उपलब्ध न कराने की शिकायत रिजर्व बैंक से की है। नोटबंदी के बाद किसानों को फसल बुवाई के लिए सबसे ज्यादा रुपयों की जरूरत थी, लेकिन अन्नदाताओं को कैश नहीं दिया गया। डीएम ने बैंक के इस असहयोग पर कड़ा रुख दिखाते हुए मामले की शिकायत की है। लीड बैंक मैनेजर पंकज सक्सेना ने बताया कि आगरा को नोटबंदी के बाद कितना कैश रिजर्व बैंक से मिला है, इसका ब्यौरा आईसीआईसीआई करेंसी चेस्ट से नहीं दिया गया है। कई बार बैंक को लिखा और कहा जा चुका है। हर दिन पुराने नोटों के जमा होने और नए नोटों को देने का रिकार्ड भी बैंक ने उपलब्ध नहीं कराया है।
इस संबंध में आईसीआईसीआई बैंक के डिस्ट्रिक्ट कोआर्डिनेटर मेषपाल सिंह से उनके फोन नंबर पर कई बार संपर्क किया लेकिन कोई कॉल रिसीव नहीं की गई।
आठ नवंबर के बाद का रिकार्ड नहीं
आठ नवंबर को रात आठ बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी का एलान किया। उसके बाद नौ नवंबर को सभी बैंक बंद रखे गए। बैंकों ने नौ नवंबर को अपने पास मौजूद कैश का पूरा ब्यौरा रिजर्व बैंक को भेजा था कि उनके पास पुराने 500 और 1000 के साथ चलन वाली करेंसी कितनी है ताकि कोई गड़बड़ी न की जा सके। आईसीआईसीआई बैंक ने आठ नवंबर के बाद से अब तक मिले कैश और नोटों का ब्यौरा नहीं दिया, जबकि सरकारी बैंक हर शाम रिजर्व बैंक के प्रोफार्मा के मुताबिक ही नोट और कैश की रिपोर्ट भेजते हैं। लीड बैंक मैनेजर ने आईसीआईसीआई बैंक से यह रिपोर्ट मांगी, लेकिन बैंक के डिस्ट्रिक्ट कोआर्डिनेटर मेषपाल सिंह और क्लस्टर हेड तक यह रिपोर्ट उपलब्ध नहीं करा रहे। बैंकरों की बैठक में डीएम गौरव दयाल ने आईसीआईसीआई बैंक प्रबंधन को कड़ी फटकार भी लगाई थी।
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नोटबंदी प्रीमियम कस्टमर तोड़ रहे बैंक
नोटबंदी में कैश की लंबी कतारें सरकारी बैंकों में हैं, जबकि प्राइवेट बैंक अपने कस्टमर को लिमिट के तहत पूरी रकम दे रहे हैं। इसी का फायदा उठाते हुए निजी बैंक सरकारी बैंकों के प्रीमियम कस्टमर के एकाउंट अपनी ब्रांच में खुलवा रहे हैं। रिजर्व बैंक ने सरकारी बैंकों को भी उतना ही कैश दिया है, जितना प्राइवेट बैंकों को। जबकि सरकारी बैंकों की जिले में 460 शाखाएं हैं और प्राइवेट बैंकों की दो दर्जन भी नहीं।
सवालों के घेरे में आरबीआई
आगरा में लीड बैंक केनरा बैंक है। सबसे ज्यादा शाखाएं स्टेट बैंक आफ इंडिया की हैं। स्टेट बैंक ने अपनी करेंसी चेस्ट से 10 बैंकों को नोटबंदी में करेंसी उपलब्ध कराई ताकि लोगों को कैश मिलता रहे, लेकिन रिजर्व बैंक ने स्टेट बैंक की जगह निजी बैंक आईसीआईसीआई को करेंसी चेस्ट की जिम्मेदारी दी। ऐसे में आईसीआईसीआई से प्राइवेट बैंकों को तो करेंसी उपलब्ध कराई गई, लेकिन सरकारी बैंकों को उनकी शाखा और ग्राहक संख्या के अनुरूप कैश दिया ही नहीं गया।
‘रिजर्व बैंक कुछ बैंकों को ज्यादा कैश दे रहा है, जबकि सरकारी बैंकों को नई करेंसी नहीं दी जा रही। आरबीआई हर दिन बैंकों को आपूर्ति किए जाने वाले नोटों का विवरण सार्वजनिक कर दे तो सच सामने आ जाएगा’
मदन मोहन राय, महामंत्री, यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन
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सरकारी बैंकों खासकर ग्रामीण बैंकों को नोटबंदी के दौरान कैश उपलब्ध न कराने का मामला वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक तक पहुंच गया है। डीएम गौरव दयाल ने आईसीआईसीआई बैंक द्वारा ग्रामीण बैंकों को कैश उपलब्ध न कराने की शिकायत रिजर्व बैंक से की है। नोटबंदी के बाद किसानों को फसल बुवाई के लिए सबसे ज्यादा रुपयों की जरूरत थी, लेकिन अन्नदाताओं को कैश नहीं दिया गया। डीएम ने बैंक के इस असहयोग पर कड़ा रुख दिखाते हुए मामले की शिकायत की है। लीड बैंक मैनेजर पंकज सक्सेना ने बताया कि आगरा को नोटबंदी के बाद कितना कैश रिजर्व बैंक से मिला है, इसका ब्यौरा आईसीआईसीआई करेंसी चेस्ट से नहीं दिया गया है। कई बार बैंक को लिखा और कहा जा चुका है। हर दिन पुराने नोटों के जमा होने और नए नोटों को देने का रिकार्ड भी बैंक ने उपलब्ध नहीं कराया है।
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इस संबंध में आईसीआईसीआई बैंक के डिस्ट्रिक्ट कोआर्डिनेटर मेषपाल सिंह से उनके फोन नंबर पर कई बार संपर्क किया लेकिन कोई कॉल रिसीव नहीं की गई।
आठ नवंबर के बाद का रिकार्ड नहीं
आठ नवंबर को रात आठ बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी का एलान किया। उसके बाद नौ नवंबर को सभी बैंक बंद रखे गए। बैंकों ने नौ नवंबर को अपने पास मौजूद कैश का पूरा ब्यौरा रिजर्व बैंक को भेजा था कि उनके पास पुराने 500 और 1000 के साथ चलन वाली करेंसी कितनी है ताकि कोई गड़बड़ी न की जा सके। आईसीआईसीआई बैंक ने आठ नवंबर के बाद से अब तक मिले कैश और नोटों का ब्यौरा नहीं दिया, जबकि सरकारी बैंक हर शाम रिजर्व बैंक के प्रोफार्मा के मुताबिक ही नोट और कैश की रिपोर्ट भेजते हैं। लीड बैंक मैनेजर ने आईसीआईसीआई बैंक से यह रिपोर्ट मांगी, लेकिन बैंक के डिस्ट्रिक्ट कोआर्डिनेटर मेषपाल सिंह और क्लस्टर हेड तक यह रिपोर्ट उपलब्ध नहीं करा रहे। बैंकरों की बैठक में डीएम गौरव दयाल ने आईसीआईसीआई बैंक प्रबंधन को कड़ी फटकार भी लगाई थी।
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नोटबंदी प्रीमियम कस्टमर तोड़ रहे बैंक
नोटबंदी में कैश की लंबी कतारें सरकारी बैंकों में हैं, जबकि प्राइवेट बैंक अपने कस्टमर को लिमिट के तहत पूरी रकम दे रहे हैं। इसी का फायदा उठाते हुए निजी बैंक सरकारी बैंकों के प्रीमियम कस्टमर के एकाउंट अपनी ब्रांच में खुलवा रहे हैं। रिजर्व बैंक ने सरकारी बैंकों को भी उतना ही कैश दिया है, जितना प्राइवेट बैंकों को। जबकि सरकारी बैंकों की जिले में 460 शाखाएं हैं और प्राइवेट बैंकों की दो दर्जन भी नहीं।
सवालों के घेरे में आरबीआई
आगरा में लीड बैंक केनरा बैंक है। सबसे ज्यादा शाखाएं स्टेट बैंक आफ इंडिया की हैं। स्टेट बैंक ने अपनी करेंसी चेस्ट से 10 बैंकों को नोटबंदी में करेंसी उपलब्ध कराई ताकि लोगों को कैश मिलता रहे, लेकिन रिजर्व बैंक ने स्टेट बैंक की जगह निजी बैंक आईसीआईसीआई को करेंसी चेस्ट की जिम्मेदारी दी। ऐसे में आईसीआईसीआई से प्राइवेट बैंकों को तो करेंसी उपलब्ध कराई गई, लेकिन सरकारी बैंकों को उनकी शाखा और ग्राहक संख्या के अनुरूप कैश दिया ही नहीं गया।
‘रिजर्व बैंक कुछ बैंकों को ज्यादा कैश दे रहा है, जबकि सरकारी बैंकों को नई करेंसी नहीं दी जा रही। आरबीआई हर दिन बैंकों को आपूर्ति किए जाने वाले नोटों का विवरण सार्वजनिक कर दे तो सच सामने आ जाएगा’
मदन मोहन राय, महामंत्री, यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन