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शहीद पृथ्वी की अंतिम विदाई: श्रद्धांजलि देने पहुंचे 30 साल पुराने दोस्त, याद कीं सैनिक स्कूल की बातें
Sun, 12 Dec 2021 11:07 AM IST
Abhishek Saxena
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sun, 12 Dec 2021 11:07 AM IST
सार
शहीद विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान की अंतिम यात्रा में भारी जन सैलाब उमड़ा। उनके दोस्त भी अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
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शहीद पृथ्वी सिंह चौहान के दोस्त
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
शहीद विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान को अंतिम विदाई देने उनके घर पहुंचे उनके बचपन के दोस्त उनकी यादों में खो गए। इन दोस्तों का साथ सैनिक स्कूल से था। तीन दशक पुरानी मित्रता की यादें आज भी उनके जहन में ताजा हैं। पूछने पर बताया कि पृथ्वी जैसा कोई नहीं था। बचपन से ही डिफेंस सर्विस में जाना चाहता था। देशप्रेम उसके दिल में बसता था। रीवा के सैनिक स्कूल में वे सभी साल 1991 से 1998 तक साथ पढ़े थे। इसके बाद अलग-अलग जगह चले गए लेकिन दोस्ती अभी भी कायम थी।
जांबाज और जिंदादिल दोस्त खो दिया
हेलिकॉप्टर हादसे में शहीद हुए सरन नगर (दयालबाग) के विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान को अंतिम विदाई देने के लिए भोपाल और अन्य जगहों से उनके सैनिक स्कूल के दोस्त भी पहुंचे। हर दोस्त की आंख नाम थी। उन्हें विश्वास नहीं हो पा रहा है कि उन्होंने एक जांबाज और जिंदादिल दोस्त खो दिया है।
बचपन से था देश सेवा का जुनून
भोपाल से आए पृथ्वी सिंह के मित्र नितिन खरे ने बताया कि उनका अंदाज-ए-बयां अलग ही होता था। बचपन से ही देशसेवा की बातें करते थे। जिंदगी खुल कर जीते थे। नितिन एक प्राइवेट कंपनी में ऊंचे ओहदे पर कार्यरत हैं।
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ग्वालियर से पहुंचे हर्षित आनंद ने बताया कि पृथ्वी से अक्सर फोन या मैसेज पर बात होती रहती थी। कई बार मिले भी थे। उनकी शहादत को हमारा सलाम। स्कूल के दिनों में जंगी जहाज को उड़ता देख उन्होंने पायलट बनने के मन बना लिया था। हर्षित केंद्र सरकार के अधीन एक विभाग में कार्यरत हैं।
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जांबाज और जिंदादिल दोस्त खो दिया
हेलिकॉप्टर हादसे में शहीद हुए सरन नगर (दयालबाग) के विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान को अंतिम विदाई देने के लिए भोपाल और अन्य जगहों से उनके सैनिक स्कूल के दोस्त भी पहुंचे। हर दोस्त की आंख नाम थी। उन्हें विश्वास नहीं हो पा रहा है कि उन्होंने एक जांबाज और जिंदादिल दोस्त खो दिया है।
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बचपन से था देश सेवा का जुनून
भोपाल से आए पृथ्वी सिंह के मित्र नितिन खरे ने बताया कि उनका अंदाज-ए-बयां अलग ही होता था। बचपन से ही देशसेवा की बातें करते थे। जिंदगी खुल कर जीते थे। नितिन एक प्राइवेट कंपनी में ऊंचे ओहदे पर कार्यरत हैं।
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ग्वालियर से पहुंचे हर्षित आनंद ने बताया कि पृथ्वी से अक्सर फोन या मैसेज पर बात होती रहती थी। कई बार मिले भी थे। उनकी शहादत को हमारा सलाम। स्कूल के दिनों में जंगी जहाज को उड़ता देख उन्होंने पायलट बनने के मन बना लिया था। हर्षित केंद्र सरकार के अधीन एक विभाग में कार्यरत हैं।
शहीद विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान
- फोटो : अमर उजाला
सैनिक स्कूल में करते थे फौज में जाने की बातें
आगरा निवासी आशीष वर्मा ने बताया कि जब भी पृथ्वी सिंह छुट्टी पर आते थे, मुलाकात जरूर होती थी। हम पांचों की बॉडिंग बहुत अच्छी थी। एक-दूसरे को समझते थे। उन्हें जानवरों से बहुत लगाव था।
भोपाल से आए दोस्त हेमंत कुमार ने बताया कि दोस्त के बारे में बुधवार को ही हमें पता चल गया था। लगातार हम परिवार के संपर्क में थे। दोस्त भी एक-दूसरे से लगातार पृथ्वी को लेकर बातचीत कर रहे थे। सैनिक स्कूल के दिनों में ही वह फौज में जाने की बातें करते थे।
वॉट्सएप ग्रुप पर करते थे बातें
रीवा के सैनिक स्कूल के इन पूर्व विद्यार्थियों का एक वॉट्सएप ग्रुप भी है। इस ग्रुप पर अकसर ही वे आपस में चर्चा करते थे। पृथ्वी के दोस्तों ने बताया कि उन्हें हेलिकॉप्टर हादसे की जानकारी मिली थी। वे दुआ कर रहे थे कि पृथ्वी सही-सलामत रहे। उन्होंने विंग कमांडर पृथ्वी सिंह से मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया था, लेकिन बात नहीं हो पाई। देर शाम जानकारी मिली थी कि वे इस हादसे में शहीद हो गए हैं।
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आगरा निवासी आशीष वर्मा ने बताया कि जब भी पृथ्वी सिंह छुट्टी पर आते थे, मुलाकात जरूर होती थी। हम पांचों की बॉडिंग बहुत अच्छी थी। एक-दूसरे को समझते थे। उन्हें जानवरों से बहुत लगाव था।
भोपाल से आए दोस्त हेमंत कुमार ने बताया कि दोस्त के बारे में बुधवार को ही हमें पता चल गया था। लगातार हम परिवार के संपर्क में थे। दोस्त भी एक-दूसरे से लगातार पृथ्वी को लेकर बातचीत कर रहे थे। सैनिक स्कूल के दिनों में ही वह फौज में जाने की बातें करते थे।
वॉट्सएप ग्रुप पर करते थे बातें
रीवा के सैनिक स्कूल के इन पूर्व विद्यार्थियों का एक वॉट्सएप ग्रुप भी है। इस ग्रुप पर अकसर ही वे आपस में चर्चा करते थे। पृथ्वी के दोस्तों ने बताया कि उन्हें हेलिकॉप्टर हादसे की जानकारी मिली थी। वे दुआ कर रहे थे कि पृथ्वी सही-सलामत रहे। उन्होंने विंग कमांडर पृथ्वी सिंह से मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया था, लेकिन बात नहीं हो पाई। देर शाम जानकारी मिली थी कि वे इस हादसे में शहीद हो गए हैं।
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