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गंभीर जलसंकट के मुहाने पर खड़ा शहर

Mon, 25 Apr 2016 02:08 AM IST
अमर उजाला, आगरा
अमर उजाला, आगरा Updated Mon, 25 Apr 2016 02:08 AM IST
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Hreeparwat traffic 'picture'will change now
Yamuna satluj link
एक ओर भीषण गर्मी तो दूसरी ओर गंभीर जलसंकट के मुहाने पर खड़ा शहर। यमुना का पानी इतना दूषित हो चुका है कि जल संस्थान को मानक से दस गुने से अधिक क्लोरीन और एलम मिलाना पड़ रहा है। तब कहीं शहर में जैसे-तैसे जलापूर्ति हो पा रही है लेकिन और ज्यादा प्रदूषण बढ़ा तो जलापूर्ति ठप भी हो सकती है।
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नाले का रूप लेती जा रही यमुना का पानी बेहद दूषित है। इसके दो बड़े कारण हैं। गोकुल बैराज से मांग के अनुरूप पानी नहीं छोड़ा जा रहा। दर्जनों नालों का गंदा पानी सीधे नदी में आ रहा है। इससे नदी में पानी कम और सिल्ट ज्यादा रह गई है। जलीय जीव-जंतुओं के लिए तो संकट था ही, अब जलापूर्ति पर भी ठप होने से एक कदम ही दूर रह गई है। जानकारों के मुताबिक पानी के शोधन के लिए 5 से 10 पीपीएम (पार्ट पर मिलियन) के बीच क्लोरीन और एलम मिलाया जा सकता है। मगर, यमुना का पानी इतना प्रदूषित है कि जल संस्थान द्वारा इस पानी उपयोग लायक बनाने को इसमें 70 से 80 पीपीएम तक क्लोरीन और एलम मिलानी पड़ रही है। इससे ज्यादा इन दोनों रसायन का प्रयोग किसी भी कीमत पर नहीं किया जा सकता। यानी यमुना का पानी अब थोड़ा भी और दूषित हुआ या मांट ब्रांच पर कालिंदी के पानी में मिलने वाला गंगा का पानी बंद हुआ तो शहर में जलापूर्ति ठप होना तय है।  
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गंगाजल न आए यमुनाजल का शोधन भी संभव नहीं
यमुना की स्थिति दिल्ली से ही खराब होने लगती है। दिल्ली और इसके बाद नदी किनारे स्थित उद्योगों की गंदगी इसके पानी में मिलती जाती है। वाटर वर्क्स अधिकारियों के मुताबिक अगर, मांट ब्रांच पर गंगा का पानी यमुना में न मिले तो दिल्ली की तरफ से सीधे आने वाले यमुना के पानी का तो शोधन भी संभव नहीं है।
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कई रोगों का है खतरा 
मानक से इतना अधिक क्लोरीन और एलम युक्त पानी के उपयोग से सेहत को खतरा हो सकता है। रसायन विज्ञान के शोधार्थी प्रशांत वशिष्ठ का कहना है कि इससे श्वांस के अलावा त्वचा और आंखों के रोग हो सकते हैं। 


इन दिनों यमुना का पानी अपेक्षाकृत ज्यादा दूषित है, इसकी वजह से शोधन के लिए क्लोरीन और एलम की मात्रा बढ़ानी पड़ी है। मगर, खतरे की बात नहीं है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।

- मंजू गुप्ता, महाप्रबंधक, जलकल

विरोध के बाद टूटी जल संस्थान की नींद
जगदीशपुरा क्षेत्र में लोगों के विरोध के बाद जल संस्थान के अधिकारियों की नींद टूट गई है। यहां सालों से बंद पड़ी पाइप लाइन को जोड़ने का काम शुरू कर दिया गया है। बता दें, जल संकट से जूझते गुलाब नगर, बीधा नगर, सरस्वती नगर और शांति नगर के लोगों ने शनिवार को बोदला-लोहामंडी रोड जाम कर दी थी। जल संस्थान ने रविवार सुबह ही जगह-जगह खुदाई कराकर पाइप लाइन चेक कराई। महाप्रबंधक मंजू गुप्ता ने बताया कि रात में पाइप लाइन लीक होने से पानी बर्बाद होता है, इसी को रोकने के लिए नाइट चेकिंग भी शुरू करा दी गई है।  
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