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UP: पैरों की नसों से सीने तक पहुंचा दी डिवाइस, दिल का छेद बंद करने लिए चिकित्सकों ने किया बड़ा करिश्मा
Thu, 22 Jan 2026 10:12 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 22 Jan 2026 10:12 AM IST
सार
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में बिना चीरफाड़ के दिल का छेद बंद कर दिया गया। आधुनिक तकनीक से मरीज का उपचार कर उसको नया जीवन दिया गया।
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हृदय रोग विभाग के डॉ. हिमांशु यादव और उनकी टीम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में हृदय की ऊपरी परत में हुए छेद का आधुनिक तकनीक से इलाज हुआ। इसे डिवाइस से बंद किया गया। मरीज की हालत अब ठीक है। जल्द इसे डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।
हृदय रोग विभाग के डॉ. हिमांशु यादव ने बताया कि फतेहाबाद निवासी 32 साल के मरीज को सांस फूलना और घबराहट और सूजन की परेशानी पर हृदय रोग विभाग में दिखाने आए थे। जांच में उनके हृदय के ऊपरी परत पर छेद पाया गया। इसे एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (एएसडी) बोलते हैं।
मरीज का बिना चीरफाड़ इलाज किया गया। इसमें पैरों की नस के जरिये डिवाइस को हृदय के ऊपरी परत तक पहुंचा कर स्थापित किया। डिवाइस नहीं लगने पर मरीज को भविष्य में गंभीर समस्या बन सकती थी, जिससे मरीज की जान का खतरा रहता। प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि कैथ लैब में हृदय रोग की सभी जटिल बीमारियों की सर्जरी हो रही है। इस मरीज को आयुष्मान कार्ड योजना के तहत निशुल्क सुविधा मिली है।
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हृदय रोग विभाग के डॉ. हिमांशु यादव ने बताया कि फतेहाबाद निवासी 32 साल के मरीज को सांस फूलना और घबराहट और सूजन की परेशानी पर हृदय रोग विभाग में दिखाने आए थे। जांच में उनके हृदय के ऊपरी परत पर छेद पाया गया। इसे एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (एएसडी) बोलते हैं।
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मरीज का बिना चीरफाड़ इलाज किया गया। इसमें पैरों की नस के जरिये डिवाइस को हृदय के ऊपरी परत तक पहुंचा कर स्थापित किया। डिवाइस नहीं लगने पर मरीज को भविष्य में गंभीर समस्या बन सकती थी, जिससे मरीज की जान का खतरा रहता। प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि कैथ लैब में हृदय रोग की सभी जटिल बीमारियों की सर्जरी हो रही है। इस मरीज को आयुष्मान कार्ड योजना के तहत निशुल्क सुविधा मिली है।
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