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मथुराः हिस्ट्रीशीटर ने अस्थायी जेल में फांसी लगाकर जान दी, झगड़े में हुआ था गिरफ्तार
Sun, 26 Apr 2020 04:08 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sun, 26 Apr 2020 04:08 PM IST
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लॉकडाउन के दौरान बनाई अस्थायी जेल में बंद छाता कोतवाली के हिस्ट्रीशीटर ने रविवार की सुबह जेल के शौचालय में लगे वेंटीलेटर से लटक कर जान दे दी। उसने अपने गमछे से फांसी लगाई।
इसकी जानकारी लगते ही जेल अधिकारियों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में बंदी के शव को नीचे उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस के अनुसार आत्महत्या का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है।
लॉकडाउन के दौरान जिला जेल के अधिकारियों ने गोवर्धन रोड स्थित रतनलाल फूल कटोरी विद्यालय में अस्थायी जेल बनाई है, जिसमें वर्तमान में 23 बंदी थे।
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इसकी जानकारी लगते ही जेल अधिकारियों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में बंदी के शव को नीचे उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस के अनुसार आत्महत्या का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है।
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लॉकडाउन के दौरान जिला जेल के अधिकारियों ने गोवर्धन रोड स्थित रतनलाल फूल कटोरी विद्यालय में अस्थायी जेल बनाई है, जिसमें वर्तमान में 23 बंदी थे।
अस्थायी जेल में बंद छाता कस्बा के मोहल्ला सींगथोक निवासी हिस्ट्रीशीटर वीरेन्द्र उर्फ वीरू (30) ने रविवार सुबह करीब आठ बजे जेल के शौचालय में वेंटीलेटर से लटककर आत्महत्या कर ली। उसका शव उसके ही गमछे से लटका मिला।
सुबह करीब आठ बजे जेल में ही उसके साथ बंद भाई सुभाष को जब शक हुआ तो शौचालय का दरवाजा खुलवाने का प्रयास किया। जब दरवाजा नहीं खुला तो उसने जेल के अधिकारियों को सूचित किया और दरवाजा तोड़कर शव को बाहर निकाला गया।
सूचना पर वरिष्ठ जेल अधीक्षक शैलेन्द्र मैत्रेय, क्षेत्राधिकारी रिफाइनरी वरुण कुमार सिंह आदि मौके पर पहुंच गए। वरिष्ठ जेल अधीक्षक शैलेन्द्र मैत्रेय ने बताया कि वीरेन्द्र को 24 अप्रैल को बलवा और मारपीट के मामले में जेल में बंद किया गया था। सुबह शौचालय में वेंटीलेटर से गमछे का फंदा बनाकर वह फांसी से लटक गया। आत्महत्या का कारण नहीं पता चल सका।
शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम कराया गया है। जिस मामले में वीरेंद्र को बंद किया गया उसी मामले में उसके भाई सुभाष और भतीजे नीरज को भी बंद किया गया है। सीओ रिफाइनरी ने बताया कि वीरेंद्र छाता कोतवाली का हिस्ट्रीशीटर था।
सुबह करीब आठ बजे जेल में ही उसके साथ बंद भाई सुभाष को जब शक हुआ तो शौचालय का दरवाजा खुलवाने का प्रयास किया। जब दरवाजा नहीं खुला तो उसने जेल के अधिकारियों को सूचित किया और दरवाजा तोड़कर शव को बाहर निकाला गया।
सूचना पर वरिष्ठ जेल अधीक्षक शैलेन्द्र मैत्रेय, क्षेत्राधिकारी रिफाइनरी वरुण कुमार सिंह आदि मौके पर पहुंच गए। वरिष्ठ जेल अधीक्षक शैलेन्द्र मैत्रेय ने बताया कि वीरेन्द्र को 24 अप्रैल को बलवा और मारपीट के मामले में जेल में बंद किया गया था। सुबह शौचालय में वेंटीलेटर से गमछे का फंदा बनाकर वह फांसी से लटक गया। आत्महत्या का कारण नहीं पता चल सका।
शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम कराया गया है। जिस मामले में वीरेंद्र को बंद किया गया उसी मामले में उसके भाई सुभाष और भतीजे नीरज को भी बंद किया गया है। सीओ रिफाइनरी ने बताया कि वीरेंद्र छाता कोतवाली का हिस्ट्रीशीटर था।