फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   hindi poet Surdas was born in Runkata Agra

हिंदी हैं हम: हिंदी साहित्य के सूर्य हैं महाकवि सूरदास, रचनाओं में बसी है ब्रज की खुशबू

Fri, 03 Sep 2021 02:18 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 03 Sep 2021 02:18 PM IST
सार

महाकवि सूरदास का जन्म 1478 ईस्वी में आगरा के रूनकता में हुआ था। हालांकि कुछ विद्वान उनका जन्म दिल्ली के पास सीही का भी बताते हैं। उनकी मृत्यु गोवर्धन के पास पारसौली गांव में 1584 ई में हुई थी। 
 

विज्ञापन
hindi poet Surdas was born in Runkata Agra
सूरकुटी में महाकवि सूरदास की प्रतिमा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिंदी साहित्य के सूर्य की बात करें तो जहन में महाकवि सूरदास का नाम ही आता है। भक्तिकाल में उन्होंने उस समय की आम बोलचाल की भाषा को अपनाया और साहित्य का सृजन किया। उनकी लिखीं कृतियां आज भी प्रासंगिक हैं। श्रीकृष्ण के प्रति उनका अटूट प्रेम था। 

विज्ञापन


प्राकृतिक सौंदर्य के सजीव चित्रण में उन्हें महारथ हासिल थी। ताजनगरी की पहचान सूरदास से है। उनकी रचनाओं में ब्रज की खुशबू बसी हुई है। रुनकता में सूरकुटी और सूरसदन उन्हीं की याद में स्थापित किए गए थे। सूरदास की जन्म स्थली होने के चलते देश के तमाम कवियों-रचनाकारों का यहां आना लगा रहता है।
विज्ञापन


महाकवि सूरदास का जन्म 1478 ईस्वी में आगरा के रूनकता में हुआ था। हालांकि कुछ विद्वान उनका जन्म दिल्ली के पास सीही का भी बताते हैं। एक निर्धन सारस्वत परिवार में जन्मे सूरदास बचपन से ही बहुत विद्वान थे। वे जन्म से अंधे थे अथवा नहीं, इसे लेकर भी इतिहासकारों के अपने-अपने तर्क हैं। कुछ समय बाद वे मथुरा के बीच गऊघाट पर रहने चले गए थे। 

विज्ञापन
विज्ञापन

पिता थे बैरागी
उनके पिता रामदास बैरागी प्रसिद्ध गायक थे। सूरदास गुरु वल्लभाचार्य के शिष्य थे। गुरु ने ही उन्हें पुष्टिमार्ग में दीक्षित कर कृष्णलीला के पद गाने को कहा। माना जाता है कि महाकवि सूरदास ने ही साहित्य लहरी की रचना की थी। आइन-ए-अकबरी और मुतांखाब-उत-तवारीख नाम की कृतियों में सूरदास को अकबर के दरबारी संगीतज्ञों में भी शुमार किया गया है। 

उनकी कविताओं में पुराने आख्यानों और कथनों का उल्लेख तमाम  स्थानों पर मिलता है। वियोग के समय राधिका के मन का उन्होंने सजीव चित्रण किया है। उनकी लिखी कविताएं आज भी तमाम मंचों पर गुनगुनाई जाती हैं। महाकवि सूरदास की मृत्यु गोवर्धन के पास पारसौली गांव में 1584 ई में हुई थी। 

सूरदास ने लिखे तमाम ग्रंथ
सूरसागर उनकी प्रसिद्ध रचना है। इसमें सवा लाख पद संग्रहित हैं। सूरसारावली, नल दमयन्ती, ब्याहलो, दशमस्कंद टीका, नागलीला, भागवत, गोवर्धन लीला, सूरपच्चीसी, सूरसागर सार, प्राण प्यारी सहित कई ग्रंथ उन्होंने लिखे।

मिठास से भरा है उनका साहित्य
कवयित्री डॉ. शशि तिवारी ने कहा कि सूरदास की कृतियों में एक मिठास है। उन्होंने आमजन की भाषा में साहित्य लिखा। हर वर्ग के लोगों को उनकी भाषाशैली प्रभावित करती है। तमाम मंचों पर उनकी कृतियों का आज भी उल्लेख होता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed