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#हिंदीहैंहम: हिंदी प्रेम और रस की भाषा, अंग्रेजी-रसायन विज्ञान से ली शिक्षा, हिंदी से मिला सम्मान

Fri, 28 Aug 2020 12:14 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी Published by: Abhishek Saxena Updated Fri, 28 Aug 2020 12:14 AM IST
सार

अंग्रेजी, विज्ञान से मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद लोग हिंदी साहित्य को अपनी पहचान बताते हैं। उनका मानना है कि हिंदी प्रेम और रस की भाषा है। इससे अच्छी भाषा दूसरी ओर कोई नहीं है।

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Hindi Hai Hum: Masters In English But Government Job Found From Hindi
हिंदी से नौकरी करने वाले शिक्षक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कुछ लोगों ने दूसरे विषयों को अपना लक्ष्य बनाया। संबंधित विषय उनकी जीविकोपार्जन के साधन भी बने, लेकिन आज भी समाज में उनकी पहचान हिंदी से ही है। अंग्रेजी, विज्ञान से मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद लोग हिंदी साहित्य को अपनी पहचान बताते हैं। उनका मानना है कि हिंदी प्रेम और रस की भाषा है। इससे अच्छी भाषा दूसरी ओर कोई नहीं है।
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अंग्रेजी से हासिल की मास्टर डिग्री, बांट रहे हिंदी साहित्य का ज्ञान 
बेसिक में प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत गोविंद सिंह ने एमए अंग्रेजी से की। अंग्रेजी साहित्य का भी अध्ययन किया। इसके बाद भी हिंदी ने उन्हें सामाजिक क्षेत्र में पहचान दिलाई।
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उनका कहना है कि हिंदी एक ऐसी भाषा है जो पहचान बनाने में बड़ा सहयोग करती है। हिंदी साहित्य किसी भी हृदय पर प्रभाव जमा सकता है। वह स्कूल में जहां बच्चों को उनके विषयों का ज्ञान दे रहे हैं, वे हिंदी में काव्यपाठ करके ख्याति प्राप्त की है। 
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रसायन विज्ञान से किया एमए, हिंदी से मिली समाज में पहचान 
शिक्षक राघवेंद्र सिंह ने जवाहर नवोदय विद्यालय से सीबीएसई बोर्ड से शिक्षा प्राप्त करने के बाद रसायन विज्ञान को अपना विषय बनाया। रसायन विज्ञान विषय में मास्टर डिग्री हासिल की। रसायन विज्ञान से ही आज भी बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं।

समाज में उन्हें जो पहचान मिली वह हिंदी साहित्य से मिली। उनका कहना है कि हिंदी साहित्य में जो शक्ति है वह किसी अन्य भाषा या साहित्य में नहीं हो सकती। हिंदी साहित्य का प्रभाव मानव जीवन पर सीधा पड़ता है। युवा शक्ति टीम बनाई है जो हिंदी पर आधारित प्रतियोगिता कराते हैं। 

समाज सेवा के लिए हिंदी का ज्ञान जरूरी 
शिक्षक जुगलकिशोर ने भी विज्ञान और अंग्रेजी को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया। बायो से बीएससी करने के बाद एमए अंग्रेजी से किया। समाज में जब पहचान बनाने का नंबर आया तो उन्होंने हिंदी का ही सहारा लिया। उनका कहना है कि हिंदी एक ऐसी भाषा है जो लोगों के हृदय पर प्रभाव जमाने के साथ ही वर्षों तक छाप छोड़ने का कार्य करती है। जुगलकिशोर स्कूल में आज भी छात्र-छात्राओं को विभिन्न विषयों की शिक्षा दे रहे हैं, लेकिन समाज के लोगों को वह हिंदी साहित्य और भाषा की तरफ प्रेरित कर रहे हैं। युवा शक्ति टीम बनाई है जो हिंदी पर हिंदी पर गोष्ठी कराते हैं। 
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