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65 वर्ष बाद भी हाईकोर्ट बेंच का इंतजार कर रहा आगरा

Sun, 22 Aug 2021 02:02 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sun, 22 Aug 2021 02:02 AM IST
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highcourt bench demand
आगरा। वर्ष 1866 से लेकर 1868 तक संपूर्ण हाईकोर्ट आगरा में था। क्रांतिकारियों का गढ़ आगरा होने के कारण वर्ष 1869 में अंग्रेजों ने इसे इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में स्थानांतरित कर दिया। वर्ष 1956 में आगरा में नेशनल कांफ्रेंस (लॉयर्स) में खंडपीठ स्थापना की मांग उठी। वर्ष 1968 में हाईकोर्ट की शताब्दी वर्षगांठ आगरा में मनाई गई। तब से यह मांग पूरी नहीं हो सकी है।
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यह कहना है आगरा बार एसोसिएशन के कार्यकारिणी सदस्य वरिष्ठ अधिवक्ता सत्यप्रकाश सिंह का है। उन्होंने बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों की मांग पर तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी ने 14 मार्च 1981 को जसवंत सिंह आयोग का गठन किया था। आयोग ने 1985 में अपनी संस्तुति आगरा के पक्ष में देते हुए अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को दी। तब से लेकर आज तक हाईकोर्ट खंडपीठ की मांग पूरी नहीं हो सकी है। कई बार आगरा से लेकर दिल्ली तक अधिवक्ता आंदोलन कर चुके हैं। जनप्रतिनिधियों ने आश्वासन भी दिए। मगर, यह पूरी नहीं हो सकी।
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हाईकोर्ट को लेकर आंदोलन
- 25 सितंबर 2001 को नला चंद्रभान, फरह में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह की जनसभा में काले झंडे दिखाए गए थे।
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- 26 सितंबर 2001 को पुलिस ने दीवानी में घुसकर लाठीचार्ज किया था। इसमें अधिवक्ता, कर्मचारी और न्यायिक अधिकारी घायल हुए थे। इसकी जांच जस्टिस गिरधर मालवीय आयोग ने की। उन्होंने पुलिस के खिलाफ रिपोर्ट दी।
- 21 दिसंबर 2012 को अधिवक्ताओं ने खंडपीठ की मांग को लेकर ताजमहल का घेराव किया।
- 19 दिसंबर 2014 को दिल्ली के जंतरमंतर पर प्रदर्शन किया गया।
हाईकोर्ट बेंच हमारा अधिकार
हाईकोर्ट बेंच आगरा में बनना हमारा अधिकार है। केंद्रीय राज्यमंत्री प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल को बयान देने के बजाय बेंच बनाने के लिए पहल करें तो स्वागत योग्य है। केंद्र और राज्य सरकारें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कार्यरत हैं। संवैधानिक अड़चन दोनों सरकारों को दूर करनी हैं। - करतार सिंह भारतीय, वरिष्ठ अधिवक्ता, पूर्व डीजीसी
केंद्रीय राज्यमंत्री से उम्मीद
केंद्रीय राज्यमंत्री से आगरा की जनता को काफी उम्मीद है। इसके बावजूद उनका हाईकोर्ट बेंच को लेकर प्रस्ताव भिजवाने का बयान दुर्भाग्यपूर्ण है। जस्टिस जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट में आगरा को हाईकोर्ट बेंच के लिए उपयुक्त स्थान घोषित किया जा चुका है। - चौधरी अजय सिंह, अध्यक्ष, पश्चिम उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण जनमंच
बेंच के लिए प्रस्ताव की आवश्यकता नहीं
हाईकोर्ट बेंच के लिए किसी प्रस्ताव की आवश्यकता नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार को पूर्व में पत्र भेजा था। जस्टिस जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट में आगरा और मेरठ में से एक को चुनने को कहा गया था। आगरा को उपयुक्त स्थान माना था। आम जनता को मेरठ तक जाने के लिए काफी वाहन बदलने होंगे। - नितिन वर्मा, मंडल अध्यक्ष, युवा अधिवक्ता संघ
आगरा में हों बेंच की स्थापना
हाईकोर्ट बेंच की स्थापना के लिए अगारा सहित संपूर्ण पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिवक्ता और जनता आंदोलन कर चुके हैं। स्वस्थ एवं सुलभ न्याय दिलाने के लिए सरकार को आगरा में बेंच की स्थापना करानी चाहिए। इसके लिए किसी प्रस्ताव की भी आवश्यकता नहीं है। - सुनील शर्मा, अध्यक्ष, आगरा एडवोकेट एसोसिएशन
पहल करें केंद्रीय राज्यमंत्री
सांसद प्रो. एसपी सिंह बघेल के केंद्रीय राज्यमंत्री बनने से आगरा की जनता की वर्षों पुरानी आस पूरी हो सकती है। हाईकोर्ट बेंच बनने से वादकारियों को सुलभ और सस्ता न्याय मिल सकेगा। केंद्रीय राज्यमंत्री को बयान के बजाय अब पहल करनी चाहिए। वह अपनी जिम्मेदारी को निभाएं। - रामदत्त दिवाकर, वरिष्ठ अधिवक्ता
65 साल से की जा रही मांग
केंद्रीय राज्यमंत्री का हाईकोर्ट बेंच स्थापना के लिए यह कहना कि हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस प्रस्ताव भेजें, तब विचार होगा, यह ठीक नहीं है। हाईकोर्ट बेंच आगरा का अधिकार है। 65 साल से यह मांग की जाती रही है। कई बार अधिवक्ता आंदोलन कर चुके हैं। दिल्ली तक अपनी आवाज को उठा चुके हैं। - अमीर अहमद, अधिवक्ता

केंद्रीय राज्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन
युवा अधिवक्ता संघ ने शनिवार को केंद्रीय राज्य मंत्री प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल को हाईकोर्ट बेंच की स्थापना को लेकर एक ज्ञापन सौंपा। इसमें अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम भी लागू करने की मांग की। इस मौके पर आगरा एडवाकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील शर्मा, युवा अध्यक्ष दीवानी अरविंद गौतम, योगेश लवानिया, देव शर्मा, गौरव शर्मा, नितिन वर्मा आदि मौजूद रहे।
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