आगरा: 55 साल बाद भी खंडपीठ की आस नहीं हुई पूरी, आगरा के अधिवक्ता बोले- चुनाव बाद वादा भूल जाते हैं जनप्रतिनिधि
ताजनगरी के अधिवक्ता सड़क से लेकर संसद तक हाईकोर्ट बेंच स्थापना की मांग उठा चुके हैं, लेकिन 55 साल बाद भी मांग पूरी नहीं हुई है। अधिवक्ताओं का कहना है कि जनप्रतिनिधि वादा तो करते हैं, लेकिन चुनाव के बाद पूरा नहीं करते।
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आगरा में उच्च न्यायालय खंडपीठ स्थापना का मुद्दा 55 साल बाद भी जस का तस बना हुआ है। सस्ता और सुलभ न्याय जनता को दिलाने के लिए अधिवक्ता आंदोलन कर रहे हैं। सड़क से लेकर संसद तक में यह मांग उठ चुकी है। मगर, आस अब तक पूरी नहीं हो सकी। अधिवक्ताओं का कहना है कि चुनाव से पहले जनप्रतिनिधि वादे करते हैं, लेकिन चुनाव में जीत के बाद भूल जाते हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप कुमार शर्मा के मुताबिक, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आगरा भौगोलिक , आर्थिक, सामाजिक और संसाधनों से उपयुक्त शहर है, जिसकी कनेक्टिविटी लगभग 25 प्रदेशों से सीधी बनी है। सभी संसाधन को देखते ही जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट आगरा के पक्ष में दी गई। आगरा के टूरिस्ट, मजदूर वर्ग, बड़े व्यापारियों को रोजगार और उद्योग धंधे को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए भी जस्टिस जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, खंडपीठ की स्थापना तत्काल होनी चाहिए।
आंदोलन साल दर साल
- वर्ष 1856 में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने आगरा में उच्च न्यायालय की स्थापना की।
- वर्ष 1859 में आगरा में क्रांतिकारी गतिविधि बढ़ने पर ब्रिटिश सरकार ने उच्च न्यायालय को प्रयागराज (तब इलाहाबाद) स्थानांतरित कर दिया।
- वर्ष 1956 में हुई समिट में तत्कालीन गवर्नर ने उच्च न्यायालय खंडपीठ का मुद्दा उठाया था।
- वर्ष 1966 में आगरा में उच्च न्यायालय के सौ वर्ष पूरे होने पर शताब्दी समारोह मनाया गया, जिसमें उच्च न्यायालय खंडपीठ की स्थापना की मांग की गई।
- वर्ष 1970 में सरकार ने खंडपीठ पर अपनी मंशा जताई। आगरा, मेरठ, बरेली सहित चार कमिश्नरी में मांग उठने लगी।
- वर्ष 1971 में उच्च न्यायालय खंडपीठ स्थापना संघर्ष समिति गठित की गई। अध्यक्ष रमनलाल शर्मा बने।
- वर्ष 1981 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने खंडपीठ स्थापना का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा।
- वर्ष 1981 में ही प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जस्टिस जसवंत सिंह आयोग का गठन किया।
- वर्ष 1984 में जस्टिस जसवंत सिंह आयोग ने सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी।
- वर्ष 1985 में कमेटी की रिपोर्ट को संसद के पटल पर नहीं रखने पर खंडपीठ स्थापना संघर्ष समिति सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की।
- वर्ष 1986 में याचिका दायर होने पर रिपोर्ट को संसद के पटल पर लाया गया।
- वर्ष 1986 में ही खंडपीठ स्थापना की मांग को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने आगरा से दिल्ली तक पैदल मार्च किया।
- 26 सितंबर 2001 को दीवानी में खंडपीठ स्थापना की मांग करते अधिवक्ताओं पर लाठीचार्ज किया गया।
- वर्ष 2009 में उच्च न्यायालय खंडपीठ स्थापना के समर्थन में सांसद रामशंकर कठेरिया का राजामंडी रेलवे स्टेशन पर प्रदर्शन।
वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. हरी दत्त शर्मा ने कहा कि सन 1866 में हाईकोर्ट आगरा में था। क्रांतिकारी गतिविधियों की वजह से इलाहाबाद में शिफ्ट कर दिया गया। खंडपीठ आगरा का हक है। यह मिलना चाहिए।
न्याय मिलने में परेशानी
वरिष्ठ अधिवक्ता अचल कुमार शर्मा ने कहा कि सस्ता और सुलभ न्याय लंबी दूरी से नहीं मिलता। इससे परेशानी होती है। सरकार की मंशा न्याय को घरों तक पहुंचाने की है। दूरी के लिहाज से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बेंच आगरा में हो।
रोजगार के भी अवसर खुल जाएंगे
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रताप स्वामी मेहरा ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आगरा ताजमहल के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। पर्यटन के अलावा कई उद्योग धंधे उजड़ गए हैं। अगर, खंडपीठ की स्थापना होती है तो रोजगार के भी अवसर खुल जाएंगे।
आयोग की रिपोर्ट आगरा के पक्ष में
वरिष्ठ अधिवक्ता सुधीश चंद्र जैन ने कहा कि हमने खंडपीठ की मांग को लेकर आंदोलन किया। इस पर सरकार ने आयोग का गठन किया। जब आयोग की रिपोर्ट आगरा के पक्ष में दी गई तो फिर हाईकोर्ट की खंडपीठ स्थापित क्यों नहीं की जा सकती।
वरिष्ठ अधिवक्ता रमनलाल शर्मा ने कहा कि वर्ष 1971 में जब हमने आंदोलन किया, तब मैं संघर्ष समिति का अध्यक्ष था। संघर्ष से विवश होकर सरकार ने वर्ष 1981 में प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा और आयोग का गठन हुआ। मगर, राजनीतिक वोट बैंक के चलते आगरा में खंडपीठ की स्थापना नहीं हो सकी।
खंडपीठ बनने से आगरा की जनता को लाभ होगा
आगरा में उच्च न्यायालय खंडपीठ स्थापना की मांग को लेकर युवा अधिवक्ता संघ ने अभियान की शुरूआत की है। इसके तहत नुक्कड़ सभा की जा रही हैं। सोमवार को फतेहाबाद रोड स्थित एक रेस्टोरेंट में नुक्कड़ सभा का आयोजन किया गया।
युवा अधिवक्ता संघ के मंडल अध्यक्ष नितिन वर्मा ने बताया कि अभियान के दौरान खंडपीठ के बारे में लोगों को जानकारी दी गई। सस्ते, सुलभ और स्वरोजगार के बारे में जागरूक किया गया। यह भी कहा कि किसी भी राजनीतिक दल ने अपने घोषणा पत्र में खंडपीठ स्थापना को शामिल नहीं किया।
खंडपीठ बनने से आगरा की जनता को लाभ होगा। अभियान के दौरान बाजार कमेटियों ने अपने सहयोग का आश्वासन दिया। अभियान में संरक्षक सुनील शर्मा, नरेंद्र कुमार अरेला, रविंद्र कुमार, अजय दीप सिंह, सुशील शर्मा, वेद प्रकाश आदि मौजूद रहे।