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Agra News: एनएचएम कर्मियों की हड़ताल से चरमराई स्वास्थ्य सेवाएं
Sun, 11 Oct 2026 03:03 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Sun, 11 Oct 2026 03:03 AM IST
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बाह: एनएचएम कर्मियों की हड़ताल से बाह, जैतपुर में चरमराई स्वास्थ्य सेवाएं
- फोटो : samvad
बाह। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) और राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के संविदाकर्मी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। उनकी मांगों में समान काम-समान वेतन, नियमितीकरण और वेतन वृद्धि शामिल हैं। इस हड़ताल के कारण कई क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं, जबकि कुछ केंद्रों पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ा है।
बाह और जैतपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों सहित कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई हैं। टीबी, एचआईवी, मधुमेह, कैंसर और रक्तचाप के मरीज जांच व दवा के लिए शनिवार को दिन भर भटकते रहे। जैतपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एनएचएम कर्मियों ने प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. विनय कुमार को कार्य बहिष्कार का पत्र सौंपा। उन्होंने आकस्मिक सेवाओं और प्रसव कार्य जारी रखने का आश्वासन दिया। सैंया में एनआरएचएम कर्मचारियों की हड़ताल से टीकाकरण और प्रसव कार्य प्रभावित हुए हैं। यहां नौ एएनएम, 14 सीएचओ, बीसीपीएम और बीपीएम छह सूत्री मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। इससे गर्भवती महिलाओं और पांच वर्ष तक के बच्चों का टीकाकरण कार्य बाधित हो रहा है। हालांकि, 16 नियमित एएनएम को अतिरिक्त कार्य सौंपकर काम कराया जा रहा है, जिससे उन पर बोझ बढ़ा है। सीएचओ की हड़ताल के कारण क्षेत्र के आरोग्य मंदिर बंद पड़े हैं, जिससे ग्रामीणों को चिकित्सा कार्य के लिए परेशानी हो रही है।
अछनेरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के ग्रामीण इलाकों में टीकाकरण, प्रसव और अन्य बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो रही हैं। आशा संगिनियों ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी न होने तक वे काम पर वापस नहीं लौटेंगी। उनके लगातार कार्य बहिष्कार से सीएचसी अछनेरा की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था के तहत नियमित एएनएम, सीएचओ और अन्य कर्मचारियों से कार्य कराने का प्रयास कर रहा है। इससे नियमित कर्मचारियों पर काम का अतिरिक्त बोझ बहुत बढ़ गया है और ग्रामीण मरीजों को दिक्कतें हो रही हैं।
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कुछ केंद्रों पर हड़ताल का असर नहीं
किरावली सीएचसी पर राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की विगत दो दिन से चल रही हड़ताल का कोई असर नहीं पड़ा। यहां रोजाना की भांति रोगी उपचार कराने आ रहे हैं। सीएचसी अधीक्षक डॉ. राघवेन्द्र सिंह ने बताया कि शनिवार को 130 रोगियों को उपचार दिया गया। अकोला स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी शनिवार को स्वास्थ्य सेवाएं सुचारु रहीं। केंद्र अधीक्षक डॉ. के के शर्मा ने बताया कि बाह्य रोगी विभाग में कुल 235 मरीज उपचार कराने पहुंचे। कागारौल के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी हड़ताल का कोई असर नहीं पड़ा। शनिवार को लगभग 50 मरीजों ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लिया।
बरहन और इरादतनगर की स्थिति बरहन और आंवल खेड़ा क्षेत्र में संविदा कर्मियों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाओं पर शनिवार को आंशिक असर रहा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आंवलखेड़ा में संविदा पर कार्य करने वाली संगिनी और आशाओं ने आधे घंटे तक धरना प्रदर्शन किया। स्वास्थ्य केंद्र अधीक्षक आंवलखेड़ा शरद चन्द्र केसरी ने बताया कि सरकारी कर्मचारियों से स्वास्थ्य सेवाएं ली जा रही हैं। सरकारी कर्मियों की संख्या कम होने के कारण स्वास्थ्य सेवाओं और प्रसव पर असर होने लगा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बरहन पर एक प्रयोगशाला तकनीशियन के हड़ताल पर जाने से टीबी आदि रोगों की जांच प्रभावित हो रही है। इरादतनगर स्थित नव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी शनिवार को स्वास्थ्य सेवाएं सुचारु रहीं। यहां भी शनिवार को बाह्य रोगी विभाग में कुल 56 मरीज उपचार कराने पहुंचे।
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बाह और जैतपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों सहित कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई हैं। टीबी, एचआईवी, मधुमेह, कैंसर और रक्तचाप के मरीज जांच व दवा के लिए शनिवार को दिन भर भटकते रहे। जैतपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एनएचएम कर्मियों ने प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. विनय कुमार को कार्य बहिष्कार का पत्र सौंपा। उन्होंने आकस्मिक सेवाओं और प्रसव कार्य जारी रखने का आश्वासन दिया। सैंया में एनआरएचएम कर्मचारियों की हड़ताल से टीकाकरण और प्रसव कार्य प्रभावित हुए हैं। यहां नौ एएनएम, 14 सीएचओ, बीसीपीएम और बीपीएम छह सूत्री मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। इससे गर्भवती महिलाओं और पांच वर्ष तक के बच्चों का टीकाकरण कार्य बाधित हो रहा है। हालांकि, 16 नियमित एएनएम को अतिरिक्त कार्य सौंपकर काम कराया जा रहा है, जिससे उन पर बोझ बढ़ा है। सीएचओ की हड़ताल के कारण क्षेत्र के आरोग्य मंदिर बंद पड़े हैं, जिससे ग्रामीणों को चिकित्सा कार्य के लिए परेशानी हो रही है।
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अछनेरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के ग्रामीण इलाकों में टीकाकरण, प्रसव और अन्य बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो रही हैं। आशा संगिनियों ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी न होने तक वे काम पर वापस नहीं लौटेंगी। उनके लगातार कार्य बहिष्कार से सीएचसी अछनेरा की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था के तहत नियमित एएनएम, सीएचओ और अन्य कर्मचारियों से कार्य कराने का प्रयास कर रहा है। इससे नियमित कर्मचारियों पर काम का अतिरिक्त बोझ बहुत बढ़ गया है और ग्रामीण मरीजों को दिक्कतें हो रही हैं।
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कुछ केंद्रों पर हड़ताल का असर नहीं
किरावली सीएचसी पर राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की विगत दो दिन से चल रही हड़ताल का कोई असर नहीं पड़ा। यहां रोजाना की भांति रोगी उपचार कराने आ रहे हैं। सीएचसी अधीक्षक डॉ. राघवेन्द्र सिंह ने बताया कि शनिवार को 130 रोगियों को उपचार दिया गया। अकोला स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी शनिवार को स्वास्थ्य सेवाएं सुचारु रहीं। केंद्र अधीक्षक डॉ. के के शर्मा ने बताया कि बाह्य रोगी विभाग में कुल 235 मरीज उपचार कराने पहुंचे। कागारौल के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी हड़ताल का कोई असर नहीं पड़ा। शनिवार को लगभग 50 मरीजों ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लिया।
बरहन और इरादतनगर की स्थिति बरहन और आंवल खेड़ा क्षेत्र में संविदा कर्मियों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाओं पर शनिवार को आंशिक असर रहा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आंवलखेड़ा में संविदा पर कार्य करने वाली संगिनी और आशाओं ने आधे घंटे तक धरना प्रदर्शन किया। स्वास्थ्य केंद्र अधीक्षक आंवलखेड़ा शरद चन्द्र केसरी ने बताया कि सरकारी कर्मचारियों से स्वास्थ्य सेवाएं ली जा रही हैं। सरकारी कर्मियों की संख्या कम होने के कारण स्वास्थ्य सेवाओं और प्रसव पर असर होने लगा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बरहन पर एक प्रयोगशाला तकनीशियन के हड़ताल पर जाने से टीबी आदि रोगों की जांच प्रभावित हो रही है। इरादतनगर स्थित नव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी शनिवार को स्वास्थ्य सेवाएं सुचारु रहीं। यहां भी शनिवार को बाह्य रोगी विभाग में कुल 56 मरीज उपचार कराने पहुंचे।