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UP: पंजीकरण के लिए अस्पतालों ने किया खेल...एक ही चिकित्सक की डिग्री का कई जगह इस्तेमाल, 128 के लाइसेंस पर रोक

Sun, 28 Sep 2025 04:09 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: अरुन पाराशर Updated Sun, 28 Sep 2025 04:09 PM IST
सार

आगरा में लाइसेंस पाने के लिए अस्पताल और पैथोलाॅजी लैब संचालकों ने खेल किया। स्वास्थ्य विभाग की जांच में मामला पकड़ में आने के बाद 128 के लाइसेंस पर रोक लगा दी गई है। 

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Health Department suspended licenses of 128 hospitals for providing incorrect documents
अस्पताल सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

विस्तार

आगरा में अस्पतालों के पंजीकरण के आवेदन में संचालकों ने प्रमाणपत्र और एनओसी में खेल कर दिया। रिकार्ड की जांच में कई विभागों की पुरानी एनओसी मिलीं। यहां तक कि एक ही चिकित्सक की डिग्री को 3 से 5 अस्पताल व लैब के आवेदन में लगा दिया गया। सत्यापन में गड़बड़ी पर 128 अस्पताल और लैब के लाइसेंस पर रोक लगा दी गई है। एक सप्ताह में दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने पर आवेदन निरस्त कर दिए जाएंगे।
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स्वास्थ्य विभाग में 2024-25 में 1317 चिकित्सकीय संस्थान पंजीकृत थे। अब पांच साल के लिए 2030 तक के लिए लाइसेंस दिया जा रहा है। इनमें 128 अस्पताल और पैथोलॉजी लैब के रिकार्ड की जांच करने पर प्रमाणपत्र और एनओसी में गड़बड़ी मिली। इनमें बंद हो चुके अस्पताल व लैब के रिकार्ड भी लगा दिए हैं। कई की पुरानी एनओसी है। 
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फुल टाइम चिकित्सक के तौर पर 3 से 5 अस्पताल और पैथोलॉजी लैब में डॉक्टरों के चिकित्सकीय रिकार्ड लगाए गए हैं। इस वजह से लाइसेंस के नवीनीकरण पर रोक लगा दी है। बीते दिनों भी अधूरे और गड़बड़ी प्रमाणपत्रों के कारण 38 अस्पताल-लैब के आवेदन निरस्त कर दिए गए थे।
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चिकित्सकीय मानक अधूरे होने से इलाज में लापरवाही
चिकित्सकीय संस्थान के लाइसेंस के लिए 17 मानक तय हैं। इसमें मानकों की कमी और फुलटाइम चिकित्सक नहीं होने से मरीजों के इलाज में लापरवाही होती है। यही हाल पैथोलॉजी लैब का है। बिना चिकित्सक के ही बीमारियों की जांच की जाती है। जांच में आरोप सही होने पर 16 अस्पताल-लैब के लाइसेंस भी निरस्त किए गए थे।

 

भौतिक सत्यापन में मिलीं ये गड़बड़ी
- अग्निशमन उपकरण कार्य करते नहीं मिले। विभाग की एनओसी/ऑडिट रिपोर्ट नहीं थी।
- बायोमेडिकल वेस्ट का निस्तारण मानकों पर नहीं हो रहा था, लॉग बुक अपडेट नहीं थी।
- चिकित्सकीय सेवाओं और उसके शुल्क की सूची। चिकित्सकों का बोर्ड पर नाम।
- प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ। आईसीयू में विशेषज्ञ की कमी और बेड का खराब संयोजन।
- चिकित्सकीय संस्थान के प्रवेश द्वार और चिकित्सक के पैनल में सीसीटीवी कैमरे नहीं मिले।

 

सही रिकार्ड नहीं देने पर लाइसेंस करेंगे निरस्त
128 अस्पताल और लैब के लाइसेंस के लिए प्रमाणपत्र अधूरे मिले। फुलटाइम में चिकित्सक की एक से अधिक जगह डिग्री लगाई हैं, जबकि एक ही संस्थान में सेवा दे सकते हैं। नोटिस देकर रिकार्ड मांगे हैं। ऐसा नहीं करने पर लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं होगा। एक सप्ताह में रिकार्ड न देने पर आवेदन निरस्त कर दिया जाएगा। -डाॅ. अरुण श्रीवास्तव, सीएमओ

 

कई बार अस्पताल संचालक करते हैं दुरुपयोग
डॉक्टर फुलटाइम के लिए एक ही संस्थान के लिए आवेदन करें। कई बार अस्पताल बदलने के कारण संचालक चिकित्सक के प्रमाणपत्रों को लाइसेंस के लिए लगा देते हैं। ऐसे में चिकित्सक भी सजग रहें कि कोई उनके प्रमाणपत्रों को दुरुपयोग तो नहीं कर रहा है। -डॉ. अनूप दीक्षित, अध्यक्ष आईएमए

 

1317: चिकित्सकीय संस्थान हैं बीते साल पंजीकृत
492: क्लीनिक
487: अस्पताल
150 पैथोलॉजी लैब
103: डायग्नोस्टिक सेंटर
85: डेंटल क्लीनिक

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