हमारे प्रधान: श्रमिक से बने ग्राम प्रधान, कहा-बरहन में जलनिकासी की व्यवस्था प्राथमिकता
भूदेव ने बताया कि वह पल्लेदारी का काम करते हैं। उनके गांव की सबसे बड़ी समस्या पानी की निकासी की है।
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जिले की बड़ी ग्राम पंचायतों में शामिल बरहन में प्रधान पद पर भूदेव प्रसाद कोरी निर्वाचित हुए हैं। एक बार ग्राम पंचायत सदस्य रहने के अलावा उनके खानदान के किसी भी व्यक्ति का सियासत से कोई वास्ता नहीं है। वह और परिवार के अन्य सदस्य श्रमिक हैं। भूदेव ने बताया कि वह पल्लेदारी का काम करते हैं। उनके गांव की सबसे बड़ी समस्या पानी की निकासी की है। रेलवे की जमीन पर बहने वाला पानी वहां दीवार खड़ी हो जाने से रूक गया है। कहते हैं जलनिकासी की व्यवस्था हर हाल में कराएंगे।
ये हैं प्राथमिकताएं
- लोगों के घरों के पानी की निकासी के लिए तालाब की खोदाई कराएंगे, नालियों के माध्यम से पानी इसमें भरेगा।
- गांव में सफाई व्यवस्था भी बदहाल है। इसे भी दुरुस्त कराया जाएगा।
- घर-घर पानी की आपूर्ति कराने का भी प्रयास किया जाएगा।
ये हैं समस्याएं
- बरहन कस्बे जैसा बन गया है, लेकिन यहां जलनिकासी की अब तक कोई व्यवस्था नहीं हो सकी है।
- जंक्शन स्टेशन होने के बावजूद यहां एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव नहीं है।
- टंकी बने होने के बाद भी कई मजरों में जलापूर्ति की समस्या से लोगों को जूझना पड़ता है।
एक नजर में ग्राम पंचायत
ग्राम पंचायत बरहन की आबादी 2011 की जनगणना के मुताबिक करीब 17 हजार है। इसमें 22 छोटे बडे़ मजरे शामिल हैं। ग्राम पंचायत में रेलवे स्टेशन, स्कूल, इंटर कॉलेज और सरकारी अस्पताल भी है। लोग यहां बरसों से एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी यह मांग पूरी नहीं हो सकी है। इसका यहां के लोगों में रोष भी है।
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