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Agra News: हिंदी की दशा सुधारने के लिए सरकार अनिवार्य कदम उठाए
Sun, 25 Aug 2024 11:12 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Sun, 25 Aug 2024 11:12 PM IST
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किशनी में पत्रकारों से वार्ता करते डॉ. विष्णु सक्सेना।
किशनी। गीतकार डॉक्टर विष्णु सक्सेना ने कहा कि सरकारों की उपेक्षा से हिंदी पर ग्रहण लग रहा है। युवा पीढ़ी सोशल मीडिया सहित मंचों के माध्यम से कविता के क्षेत्र में उतर चुकी है। लेकिन ज्यादा तेजी के प्रयास में उनके लिए साहित्य की गहरी समझ रख पाना असंभव है। किशनी में गीतकार बलराम श्रीवास्तव के आवास पर वह पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे।
बलराम श्रीवास्तव ने उनको मुक्तक सम्राट लाखन सिंह भदौरिया सौमित्र की पुस्तक अभिनंदन ग्रंथ भेंट की। डॉ. विष्णु सक्सेना का हिंदी प्रेमियों ने स्वागत किया। दिबियापुर में भारत विकास परिषद द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन में भाग लेने के लिए जाते समय वह बलराम श्रीवास्तव के आवास पर रुके।
उन्होंने कहा कि पहले सरकारी संस्थानों द्वारा कवि सम्मेलन कराए जाते थे लेकिन अब काव्य प्रेमियों द्वारा कवि सम्मेलन कराने की संख्या बढ़ती जा रही है। कान्वेंट स्कूलों में हिंदी बोलने पर दंड दिया जाता है। जो हमारे देश का दुर्भाग्य है। सरकार हिंदी की दशा सुधारने के लिए अनिवार्य कदम उठाए तो सफलता मिल सकती है। पहले की अपेक्षा आज के समय में सोशल मीडिया के होने पर नए नए कवियों को सुनने का मौका मिल जाता है। पहले के समय में अखबार, टेलीविजन और रेडियो ही श्रोताओं तक पहुंचने के माध्यम थे। आज किसी भी कवि को सोशल मीडिया पर देखने का मौका मिल जाता है। देवेंद्र श्रीवास्तव, रामवीर पाल, मुकेश पाल मौजूद रहे।
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बलराम श्रीवास्तव ने उनको मुक्तक सम्राट लाखन सिंह भदौरिया सौमित्र की पुस्तक अभिनंदन ग्रंथ भेंट की। डॉ. विष्णु सक्सेना का हिंदी प्रेमियों ने स्वागत किया। दिबियापुर में भारत विकास परिषद द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन में भाग लेने के लिए जाते समय वह बलराम श्रीवास्तव के आवास पर रुके।
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उन्होंने कहा कि पहले सरकारी संस्थानों द्वारा कवि सम्मेलन कराए जाते थे लेकिन अब काव्य प्रेमियों द्वारा कवि सम्मेलन कराने की संख्या बढ़ती जा रही है। कान्वेंट स्कूलों में हिंदी बोलने पर दंड दिया जाता है। जो हमारे देश का दुर्भाग्य है। सरकार हिंदी की दशा सुधारने के लिए अनिवार्य कदम उठाए तो सफलता मिल सकती है। पहले की अपेक्षा आज के समय में सोशल मीडिया के होने पर नए नए कवियों को सुनने का मौका मिल जाता है। पहले के समय में अखबार, टेलीविजन और रेडियो ही श्रोताओं तक पहुंचने के माध्यम थे। आज किसी भी कवि को सोशल मीडिया पर देखने का मौका मिल जाता है। देवेंद्र श्रीवास्तव, रामवीर पाल, मुकेश पाल मौजूद रहे।
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