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जयंती पर विशेष: ताजनगरी से थी बेपनाह मोहब्बत, बेड़ई और कचौड़ी के दीवाने थे 'नीरज'

Mon, 04 Jan 2021 03:46 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला,आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Mon, 04 Jan 2021 03:46 PM IST
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Gopal Das Neeraj Birthday Special Fan Of Agra Bedai And kachori
Gopaldas Neeraj
पद्मभूषण गोपालदास नीरज को आगरा से बेपनाह मोहब्बत थी। वह जब भी आगरा आते, यहां की बेड़ई और कचौड़ी जरूर खाते। आसपास कहीं भी कवि सम्मेलन होता तो वह वहां से सीधे आगरा आते।
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यह कहना है उनके बल्केश्वर में रहने वाले सबसे छोटे बेटे शशांक प्रभाकर का।

उन्होंने बताया कि नीरजजी को गालिब और नजीर की लिखी शायरी ने काफी प्रभावित किया था। वे कहते थे कि आगरा की साहित्यिक हवा इतनी ताजा है कि यहां किसी की याद नहीं जा सकती। वह आगरा के कई कवियों से प्रभावित थे। नीरज के बेटे अरस्तू का कहना है कि काफी कम लोगों को यह मालूम है कि उन्हें ज्योतिष विद्या की भी काफी जानकारी थी।
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Gopal Das Neeraj Birthday Special Fan Of Agra Bedai And kachori
हास्य कवि रमेश मुस्कान - फोटो : अमर उजाला
उनके समीप जाने का सौभाग्य मुझे भी मिला
बचपन में जिस तारे को निहारते हुए कई रातों के सपने प्रकाशित हुए हों, जवानी में उसके समीप जाने का सौभाग्य मिला तो महसूस हुआ कि वह तारा वास्तव में एक ऐसा प्रखर सूर्य है जिसके आभामंडल में ठहरने मात्र से कंकड़-पत्थर चमक उठते हैं। नीरज का आगरा प्रवास मेरे लिए ऐसे ही आभामंडल के स्पर्श का अनुभव रहा। - रमेश मुस्कान कवि

जब मंच पर क्रोधित हो गए थे नीरज
मेरे पितृ तुल्य नीरजजी के साथ अनगिनत यादें जुड़ी हैं। उनके साथ न जाने कितने मंच साझा किए। एक मंच पर तथाकथित कवयित्री ने मेरा गीत पढ़ना शुरू कर दिया तो वो क्रोधित हो गए। आयोजकों को माइक पर डांटने लगे कि आप ऐसे कवियों को मंच से उतारें जो दूसरों की रचना चुरा रहे हैं वर्ना मैं मंच से उतर जाऊंगा। -डॉ. शशि तिवारी, कवयित्री

Gopal Das Neeraj Birthday Special Fan Of Agra Bedai And kachori
पवन आगरी - फोटो : amar ujala
‘जो मिट्टी का कर्ज चढ़ा दे, वो सच्चा इंसान है’
महाकवि नीरज के साथ मैं लगभग 40 वर्ष से जुड़ा था। अनेकों कवि सम्मेलनों मे उनके साथ मंच साझा किया। वे अपने से छोटों को हमेशा सराहते थे। उनके जाने से ऐसा लगता है कि कविता का वट वृक्ष अब नहीं है, जो हमारा मार्गदर्शन कर सके। उनके गीत ही अब हमारे प्रेरणा स्तंभ बने रहेंगे। मैं इन शब्दों में उन्हें याद करना चाहूंगा, ‘हम सब कर्जदार मिट्टी के, मिट्टी का अहसान है। जो मिट्टी पर कर्ज चढ़ा दे, वो सच्चा इंसान है’। -रामेन्द्र त्रिपाठी, कवि


उनके होठों से निकले शब्द गीत बन गए
नीरज कविता का हिमालय थे। उनके जैसा कोई नहीं हो सकता है। उनके होठों से जो शब्द निकले, वे गीत बन गए। उनके जन्मदिवस पर उनको समर्पित है, ‘शब्द जिनके होठों से निकलकर गीत बन गए, न जाने कितने बेबस लोगों के मीत बन गए, स्वर की गंगा में बहकर जब भी बोले नीरजजी, टूटे अनगित दिलों की प्रीत बन गए’। - पवन आगरी, कवि
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