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काले धन के गद्दारों का नाम बता दो मोदी जी....
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Mon, 23 Feb 2015 01:41 AM IST
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कभी हंसी की फुहार तो कभी राजनीति पर प्रहार। कभी देशभक्ति का जज्बा तो कभी मुहब्बत का एहसास। ताज महोत्सव में रविवार रात आयोजित कवि सम्मेलन में शृंगार रस बरसा तो ओज के कवियों ने श्रोताओं के रौंगटे खड़े कर दिए।
ताज महोत्सव में रविवार रात सूर एवं नजीर को समर्पित कवि सम्मेलन के नाम रही। सूरसदन की जगह पहली बार शिल्पग्राम में आयोजित कवि सम्मेलन का शुभारंभ पद्म विभूषण गोपाल दास नीरज ने किया। उदय प्रताप ने कहा कि ‘सारी दुनिया को वह झुका सकता है अपने सामने, मां के कदमों से लिपट कर जो दुआ ले जाएगा, सच को जीने के लिए जो मरने को तैयार है, वक्त ऐसे आदमी को करबला ले जाएगा’। वरिष्ठ कवि गोपाल दास नीरज ने कहा कि महाठगिनी ये सांस है, पल-पल आए जाए, रुक जाएगी कब ये सांसे, कोई जान न पाए। जीवन के सफर में हर कोई मुसाफिर है, इसे समझाते हुए कहा कि बिछड़ने के लिए है ये मेल-मिलाप, एक मुसाफिर हम यहां, एक मुसाफिर आप।
ओज के कवि हरिओम पवार ने जब कविता पाठ किया तो शिल्पग्राम में सभी लोग उनके सम्मान में खड़े हो गए। जब वे जाने लगे तो लोगों ने शोर मचा दिया। इस पर उन्हें दोबारा कविता पाठ करने आना पड़ा। सत्ता पर कड़े प्रहार करने वाले पवार कुछ नरम दिखे। कहा कि अभी केंद्र की सरकार नौ माह की हुई है। इसलिए शिशु पर हमला नहीं करना चाहता। उन्होंने पढ़ा कि काले धन के गद्दारों का नाम बता दो मोदी जी..... इसके बाद पढ़ा कि दुनिया को अहसास करा दो छप्पन इंची सीने का.... इसके बाद उन्होंने कई कविताएं पढ़ीं।
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मुक्ताकाशीय मंच पर देर रात तक पद्मश्री अशोक चक्रधर, पद्मश्री डा. सुरेंद्र दुबे, सोम ठाकुर, शिव ओम अंबर, अरुण जेमिनी, डा. विष्णु सक्सेना, सुरेंद्र सुकुमार, सर्वेश अस्थाना, रमेश शर्मा, डा. सुमन दुबे, पद्मिनी शर्मा ने अपनी कविताओं से कविता प्रेमियों को देर रात तक रोके रखा। मंडलायुक्त प्रदीप भटनागर, डीएम पंकज कुमार, प्रभारी अधिकारी कैप्टन प्रभांशु श्रीवास्तव और समन्वयक पवन आगरी मौजूद रहे।
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ताज महोत्सव में रविवार रात सूर एवं नजीर को समर्पित कवि सम्मेलन के नाम रही। सूरसदन की जगह पहली बार शिल्पग्राम में आयोजित कवि सम्मेलन का शुभारंभ पद्म विभूषण गोपाल दास नीरज ने किया। उदय प्रताप ने कहा कि ‘सारी दुनिया को वह झुका सकता है अपने सामने, मां के कदमों से लिपट कर जो दुआ ले जाएगा, सच को जीने के लिए जो मरने को तैयार है, वक्त ऐसे आदमी को करबला ले जाएगा’। वरिष्ठ कवि गोपाल दास नीरज ने कहा कि महाठगिनी ये सांस है, पल-पल आए जाए, रुक जाएगी कब ये सांसे, कोई जान न पाए। जीवन के सफर में हर कोई मुसाफिर है, इसे समझाते हुए कहा कि बिछड़ने के लिए है ये मेल-मिलाप, एक मुसाफिर हम यहां, एक मुसाफिर आप।
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ओज के कवि हरिओम पवार ने जब कविता पाठ किया तो शिल्पग्राम में सभी लोग उनके सम्मान में खड़े हो गए। जब वे जाने लगे तो लोगों ने शोर मचा दिया। इस पर उन्हें दोबारा कविता पाठ करने आना पड़ा। सत्ता पर कड़े प्रहार करने वाले पवार कुछ नरम दिखे। कहा कि अभी केंद्र की सरकार नौ माह की हुई है। इसलिए शिशु पर हमला नहीं करना चाहता। उन्होंने पढ़ा कि काले धन के गद्दारों का नाम बता दो मोदी जी..... इसके बाद पढ़ा कि दुनिया को अहसास करा दो छप्पन इंची सीने का.... इसके बाद उन्होंने कई कविताएं पढ़ीं।
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मुक्ताकाशीय मंच पर देर रात तक पद्मश्री अशोक चक्रधर, पद्मश्री डा. सुरेंद्र दुबे, सोम ठाकुर, शिव ओम अंबर, अरुण जेमिनी, डा. विष्णु सक्सेना, सुरेंद्र सुकुमार, सर्वेश अस्थाना, रमेश शर्मा, डा. सुमन दुबे, पद्मिनी शर्मा ने अपनी कविताओं से कविता प्रेमियों को देर रात तक रोके रखा। मंडलायुक्त प्रदीप भटनागर, डीएम पंकज कुमार, प्रभारी अधिकारी कैप्टन प्रभांशु श्रीवास्तव और समन्वयक पवन आगरी मौजूद रहे।