फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Gas vendors was illegal charge for cylinder during oxygen crisis in agra

महामारी में मनमानी: आगरा में ऑक्सीजन किल्लत के दौरान वसूले गए मनमाने रेट, अब सामने आ रहे बिल

Sat, 26 Jun 2021 01:22 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 26 Jun 2021 01:22 PM IST
सार

अप्रैल में जब आगरा ऑक्सीजन संकट से जूझ रहा था, जब गैस वेंडरों ने मनमाने रेट वसूले। इनके बिल अब सामने आ रहे हैं। 

विज्ञापन
Gas vendors was illegal charge for cylinder during oxygen crisis in agra
ऑक्सीजन प्लांट में सिलिंडर भरता कर्मचारी (फाइल) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अप्रैल में ऑक्सीजन की कमी की बात को प्रशासन भले न माने, लेकिन आगरा के अस्पताल और मरीज ऑक्सीजन की किल्लत से जूझते रहे। इसी किल्लत के बीच गैस वेंडरों ने ऑक्सीजन के मनमाने रेट वसूले। इनके बिल भी अब सामने आ रहे हैं। 

विज्ञापन


27,475 रुपये के 128 गैस सिलिंडर भरे गए, लेकिन इनके हैंडलिंग चार्ज के रूप में 98,125 रुपये वसूले गए। ऐसे एक दो नहीं, बल्कि दर्जनों बिल हैं। यही नहीं, जो ऑक्सीजन सप्लाई की गई, वह मेडिकल ग्रेड की जगह औद्योगिक उपयोग की थी। अप्रैल में जारी किए गए बिलों में इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन लिखा गया है।
विज्ञापन


बाईपास रोड स्थित अस्पताल में सांभवी गैस ने ऑक्सीजन सिलिंडर री-फिलिंग करने में 24 हजार रुपये गैस के और 86 हजार रुपये हैंडलिंग चार्ज के वसूले। कभी 763 रुपये का सिलिंडर दिया गया तो कभी 1050 रुपये का सिलिंडर सप्लाई हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन


एक अन्य अस्पताल में सांभवी गैस ने 6300 रुपये की ऑक्सीजन दी, जबकि 22000 रुपये हैंडलिंग चार्ज, सैनिटाइजेशन के लिए। उसी अस्पताल में एक बार 98 हजार रुपये, दूसरी बार 86 हजार रुपये हैंडलिंग के लिए गए।

मेडिकल की जगह औद्योगिक ऑक्सीजन दी
अप्रैल में प्रदेश सरकार ने 20 तारीख को ऑक्सीजन संकट देखते हुए उद्योगों को ऑक्सीजन की सप्लाई बंद कर अस्पतालों को देने के निर्देश दिए। इसके लिए 25 अप्रैल को फिर से रिमाइंडर जारी किया गया। ऑक्सीजन की भारी किल्लत के बीच अस्पतालों को औद्योगिक उपयोग वाली आक्सीजन की सप्लाई दी गई। 

अस्पतालों को जो बिल जारी किए गए, उन पर स्पष्ट लिखा गया है कि ऑक्सीजन औद्योगिक उपयोग के लिए है। औद्योगिक उपयोग की ऑक्सीजन के इस्तेमाल से बाद में मरीजों में कई तरह की समस्याएं आईं, जिनमें ब्लैक फंगस प्रमुख है।

औद्योगिक ऑक्सीजन की शुद्धता कम
- ऑक्सीजन शुद्धता 94 से 97 फीसदी रहती है।
- सिलिंडर में निगेटिव प्रेशर से धूल, मिट्टी ज्यादा रहती है।
- सिलिंडर की गुणवत्ता जांच पर ज्यादा जोर नहीं दिया जाता।
- फैक्टरियों में सिलिंडर की सफाई पर ध्यान नहीं दिया जाता है।

मेडिकल की जांच जरूरी
- ऑक्सीजन की शुद्धता 99.67% होनी चाहिए।
- शुद्धता जांच के लिए प्लांट में लैब जरूरी है।
- सिलिंडर में प्रेशर पर फोकस, ताकि गंदगी न जाए।
- सिलिंडर में कार्बन गैसें न पहुंचें, इस पर फोकस।
- रीफिल करने से पहले वैक्यूम प्रेशर से सिलिंडर की सफाई जरूरी है।
- सिलिंडर की बाहरी और आंतरिक सफाई व सैनिटाइजेशन।

उन दिनों ऑक्सीजन के लिए ये थीं कीमतें
ऑक्सीजन संकट के समय प्रशासन ने 29 अप्रैल को बैठक कर रेट तय किए, जिनमें अस्पताल के लिए 350 रुपये और वेंडर के लिए 400 रुपये तय किए गए। इसके बाद भी मई के महीने में अस्पतालों को जो बिल भेजे गए, उनमें ऑक्सीजन के मुकाबले सैनिटाइजेशन और हैंडलिंग चार्ज तीन से चार गुना ज्यादा वसूला गया है।
 

दूर से गैस लाने पर ज्यादा खर्च
सांभवी गैस के पार्थ त्यागी ने बताया कि अप्रैल में संकट के समय बाहर से ही ज्यादा कीमत पर गैस मिल रही थी। दूर दराज से गैस लाने पर खर्च ज्यादा था। इसलिए हैंडलिंग चार्ज बढ़ाए गए, गैस की कीमतें हमने नहीं बढ़ाई। जो प्रशासन ने रेट तय किए, वही लिए हैं। 

‘इंडस्ट्रियल’ गलती से लिखा रह गया
एडवांस गैस विकास अग्रवाल ने कहा कि ऑक्सीजन संकट के दौर में केवल एक ऑपरेटर था, जिस पर बिल का लोड ही ज्यादा था, इस वजह से बिल पर इंडस्ट्रियल गैस लिखा रहा, जो बदल नहीं पाया। प्रशासन लगातार मॉनीटरिंग कर रहा था। हमने मेडिकल गैस ही सप्लाई की है। 
जो मिली उसी का उपयोग किया गया

आईएमए के पूर्व सचिव डॉ. संजय चतुर्वेदी ने कहा कि मरीजों की जान बचाना पहली प्राथमिकता थी। गैस कहीं से भी मिल रही थी, तो उसकी उपलब्धता पर फोकस था। अस्पतालों को वेंडर ने जो गैस दी, उसका उपयोग किया गया। गैस का क्या ग्रेड था, यह पता नहीं चलता। 

ये सवाल उठे 
- बिल पर इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन क्या चोरी छिपे फैक्टरियों को दी गई।
- क्या मेडिकल ऑक्सीजन में बदले बिना इंडस्ट्रियल आक्सीजन मिली।
- क्या क्वालिटी कंट्रोल से बचने के लिए बिल में औद्योगिक दर्ज किया।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed