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गैस संकट से उद्योग बेहाल: 40 से 150 रुपये पहुंचा बिल, कीमतों में बेतहाशा वृद्धि ने तोड़ दी कारोबारियों की कमर
Wed, 01 Apr 2026 10:24 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Wed, 01 Apr 2026 10:24 AM IST
सार
टीटीजेड क्षेत्र में गैस आपूर्ति में कटौती और कीमतों में भारी वृद्धि से उद्योगों पर संकट गहरा गया है। औसत गैस बिल 40 रुपये से बढ़कर 150 रुपये प्रति एससीएम तक पहुंच गया है, जिससे कारोबार प्रभावित हो रहा है।
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कॉर्मिशयल सिलिंडर ।संवाद
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विस्तार
पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) के उद्योगों पर संकट के बादल गहरा गए हैं। गेल की ओर से री-लिक्विड नेचुरल गैस (आरएलएनजी) की आपूर्ति में की गई 45 फीसदी की कटौती और कीमतों में बेतहाशा वृद्धि ने कारोबारियों की कमर तोड़ दी है। जो गैस पहले औसतन 40 रुपये प्रति एससीएम (स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर) पड़ती थी। अब अतिरिक्त खपत पर उसका बिल 150 रुपये तक पहुंच रहा है।
टीटीजेड के 347 उद्योगों को प्रतिदिन करीब 14 लाख घन मीटर गैस की आवश्यकता होती है। इसकी पूर्ति दो माध्यमों से होती है। एपीएम (एडमिनिस्टर्ड प्राइज मैकेनिज्म) से 11 लाख घन मीटर का आवंटन करीब 26 रुपये प्रति एससीएम की रियायती दर पर होता है। वहीं आरएलएनजी से शेष तीन लाख घन मीटर की आपूर्ति होती थी। संकट के बाद गेल ने आरएलएनजी की आपूर्ति घटाकर 55 फीसदी कर दी है, यानी उद्योगों के लिए प्रतिदिन 1.35 लाख घन मीटर गैस कम हो गई है।
नेशनल चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स के अध्यक्ष मनोज बंसल के मुताबिक, उद्योगों के लिए अब गणित पूरी तरह बिगड़ चुका है। 55 फीसदी से अधिक की खपत करने पर उद्योगों को 90 रुपये प्रति एससीएम की दर से भुगतान करना पड़ रहा है। पुरानी व्यवस्था में एपीएम और आरएलएनजी मिलाकर औसत बिल 40 रुपये आता था, लेकिन अब अतिरिक्त गैस लेने पर यह औसत 150 रुपये प्रति एससीएम तक जा रहा है।
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उत्पाद महंगे, बाजार में टिकना मुश्किल
गैस की आसमान छूती कीमतों के कारण उत्पादन लागत बढ़ गई है। उद्यमियों का कहना है कि बढ़ी हुई लागत के कारण बाजार में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल होता जा रहा है। यदि जल्द ही आपूर्ति और कीमतों में संतुलन नहीं बना, तो टीटीजेड के दर्जनों उद्योगों में उत्पादन ठप हो सकता है।
प्रभावित हो रहा कारोबार
नेशनल चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स के अध्यक्ष मनोज बंसल ने बताया कि गैस की किल्लत और बढ़ी हुई कीमतों ने उद्योगों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है। उत्पाद इतने महंगे हो रहे हैं कि कारोबार प्रभावित हो रहा है।
दूर कराएंगे गैस किल्लत
टीटीजेड सदस्य विजय गुप्ता का कहना है कि उद्योगों के लिए गैस की समस्या को खत्म कराएंगे। गेल से वार्ता करेंगे। पर्यावरण दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में विशेष रियायत मिलनी चाहिए।
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टीटीजेड के 347 उद्योगों को प्रतिदिन करीब 14 लाख घन मीटर गैस की आवश्यकता होती है। इसकी पूर्ति दो माध्यमों से होती है। एपीएम (एडमिनिस्टर्ड प्राइज मैकेनिज्म) से 11 लाख घन मीटर का आवंटन करीब 26 रुपये प्रति एससीएम की रियायती दर पर होता है। वहीं आरएलएनजी से शेष तीन लाख घन मीटर की आपूर्ति होती थी। संकट के बाद गेल ने आरएलएनजी की आपूर्ति घटाकर 55 फीसदी कर दी है, यानी उद्योगों के लिए प्रतिदिन 1.35 लाख घन मीटर गैस कम हो गई है।
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नेशनल चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स के अध्यक्ष मनोज बंसल के मुताबिक, उद्योगों के लिए अब गणित पूरी तरह बिगड़ चुका है। 55 फीसदी से अधिक की खपत करने पर उद्योगों को 90 रुपये प्रति एससीएम की दर से भुगतान करना पड़ रहा है। पुरानी व्यवस्था में एपीएम और आरएलएनजी मिलाकर औसत बिल 40 रुपये आता था, लेकिन अब अतिरिक्त गैस लेने पर यह औसत 150 रुपये प्रति एससीएम तक जा रहा है।
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उत्पाद महंगे, बाजार में टिकना मुश्किल
गैस की आसमान छूती कीमतों के कारण उत्पादन लागत बढ़ गई है। उद्यमियों का कहना है कि बढ़ी हुई लागत के कारण बाजार में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल होता जा रहा है। यदि जल्द ही आपूर्ति और कीमतों में संतुलन नहीं बना, तो टीटीजेड के दर्जनों उद्योगों में उत्पादन ठप हो सकता है।
प्रभावित हो रहा कारोबार
नेशनल चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स के अध्यक्ष मनोज बंसल ने बताया कि गैस की किल्लत और बढ़ी हुई कीमतों ने उद्योगों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है। उत्पाद इतने महंगे हो रहे हैं कि कारोबार प्रभावित हो रहा है।
दूर कराएंगे गैस किल्लत
टीटीजेड सदस्य विजय गुप्ता का कहना है कि उद्योगों के लिए गैस की समस्या को खत्म कराएंगे। गेल से वार्ता करेंगे। पर्यावरण दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में विशेष रियायत मिलनी चाहिए।