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अनुदानित कृषि यंत्रों में फर्जीवाड़ा: ट्रैक्टर पर नहीं मिला नंबर, कहीं कृषि संयंत्र ही गायब
Fri, 17 Mar 2023 01:30 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 17 Mar 2023 01:30 PM IST
सार
कृषि विभाग से संचालित योजनाओं में कंपनियों और कर्मचारियों ने सांठगांठ कर फर्जीवाड़ा कर लिया। नुदान के रूप में मिलने वाली मोटी धनराशि को हड़प ली।
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कृषि यंत्र
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
एटा में कंपनियों और कर्मचारियों ने सांठगांठ कर किसानों के साथ मिलकर खूब फर्जीवाड़ा किया। कृषि संयंत्रों पर अनुदान के रूप में मिलने वाली मोटी धनराशि को हड़प कर लिया गया।
विकासखंड सकीट के गांव सलेमपुर साहनी में किसान को कृषि संयंत्र के रूप में ट्रैक्टर और लेवलर अनुदान पर दिया गया था। लेकिन कृषि विभाग के कर्मचारियों की सांठ-गांठ के चलते लेवलर पर लगी नंबर प्लेट को हटा दिया गया। जिससे टीम द्वारा इस यंत्र का सत्यापन नहीं हो सका।
वहीं विकासखंड शीतलपुर के गांव कासोन में एक किसान को कृषि संयंत्र देकर लाभांवित कर दिया गया। जब सत्यापन करने टीम पहुंची तो मौके पर संंयंत्र नहीं मिला। जिसकी वजह से टीम को संयंत्र खरीद पर संदेह प्रतीत हुआ। कृषि विभाग से अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था। उप कृषि निदेशक रोताश सिंह ने कहा कि कृषि संयंत्र बेचने वाली सात कंपनी को शासन स्तर से ब्लैक लिस्टेड किया गया है। वहीं किसानों को चेतावनी दी गई है। अगर इन सात कंपनी से कोई संयंत्र खरीदता है तो उसे अनुदान का लाभ नहीं दिया जाएगा।
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ये भी पढ़ें- 11वीं के छात्र का कमाल: आवारा पशुओं से परेशान पिता के लिए तैयार की ऐसी डिवाइस, फसलों को नहीं होगा नुकसान
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विकासखंड सकीट के गांव सलेमपुर साहनी में किसान को कृषि संयंत्र के रूप में ट्रैक्टर और लेवलर अनुदान पर दिया गया था। लेकिन कृषि विभाग के कर्मचारियों की सांठ-गांठ के चलते लेवलर पर लगी नंबर प्लेट को हटा दिया गया। जिससे टीम द्वारा इस यंत्र का सत्यापन नहीं हो सका।
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वहीं विकासखंड शीतलपुर के गांव कासोन में एक किसान को कृषि संयंत्र देकर लाभांवित कर दिया गया। जब सत्यापन करने टीम पहुंची तो मौके पर संंयंत्र नहीं मिला। जिसकी वजह से टीम को संयंत्र खरीद पर संदेह प्रतीत हुआ। कृषि विभाग से अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था। उप कृषि निदेशक रोताश सिंह ने कहा कि कृषि संयंत्र बेचने वाली सात कंपनी को शासन स्तर से ब्लैक लिस्टेड किया गया है। वहीं किसानों को चेतावनी दी गई है। अगर इन सात कंपनी से कोई संयंत्र खरीदता है तो उसे अनुदान का लाभ नहीं दिया जाएगा।
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सात कंपनियां ब्लैक लिस्टेड
जांच के दौरान कृषि संयंत्रों के नंबरों में अंतर पाया गया। इस पर शासन स्तर से सात कंपनियों को ब्लैक लिस्टेड किया गया है। इन कंपनियों से जिले में भी बड़ी संख्या में कृषि यंत्र खरीदे गए थे।ये भी पढ़ें- 11वीं के छात्र का कमाल: आवारा पशुओं से परेशान पिता के लिए तैयार की ऐसी डिवाइस, फसलों को नहीं होगा नुकसान