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बच्चों पर टीकों के दुष्प्रभाव की डाटा फीडिंग में फर्जीवाड़ा
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आगरा। पांच साल से कम उम्र के बच्चों को नियमित लगाए जाने वाले टीकों के दुष्प्रभाव के डाटा फीडिंग में फर्जीवाड़ा हो गया। माह अप्रैल से जून तक हेल्थ मैनेजमेंट इन्फॉरमेशन सिस्टम (एचएमआईएस) और एडवर्स इवेंट्स फॉलोइंग इम्यूनाइजेशन (एईएफआई) के डाटा में भिन्नता मिलने पर यह खुलासा हुआ, जिसके बाद मिशन निदेशक ने डीएम व सीएमओ को नोटिस जारी करते हुए डाटा फीडिंग की जांच व सही डाटा फीड कराने के निर्देश दिए हैं।
इस डाटा से ही टीकाकरण के बाद बच्चों की निगरानी होती है। एचएमईएस के डाटा में टीकाकरण के बाद 3907 बच्चों पर दुष्प्रभाव के मामले सामने आए हैं, जबकि सीएमओ कार्यालय से की गई फीडिंग में शून्य मामले दर्शाए हैं। एचएमईएस के डाटा में किसी भी बच्चे की मृत्यु नहीं दर्ज है। एईएफआई के डाटा में दो बच्चों की मृत्यु दर्ज है। दोनों डाटा में भिन्निता से बच्चों की निगरानी नहीं हो पा रही है। इस संबंध में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक अपर्णा उपाध्याय ने डीएम व सीएमओ को डाटा की गड़बड़ी में सुधार के निर्देश दिए हैं। जिले में करीब 3.50 लाख से अधिक बच्चे हैं। जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए नियमित सामुदायिक टीकाकरण किया जाता है। इस दौरान टीकाकरण के दुष्प्रभाव की राष्ट्रीय पोर्टल पर रिपोर्ट भेजी जाती है। इस रिपोर्ट में गड़बड़ी सामने आने के बाद अब टीकाकरण की रिपोर्टिंग पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है।
शून्य से पांच साल तक के बच्चों को टीवी की रोकथाम के लिए (बीसीजी) , ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी), खसरा (मिजल्स), रोटावायरस और यलो फीवर के टीके लगाए जाते हैं। टीकाकरण के बाद बच्चों में होने वाले दुष्प्रभाव की जांच होती है। जिसका डाटा पोर्टल पर फीड होता है। फीड डाटा के आधार पर ही ऐसे बच्चों की निगरानी की जाती है।
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मिशन निदेशक का पत्र मिला था। मुख्य चिकित्सा अधिकारी व प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक से रिपोर्ट मांगी गई है। पोर्टल को अपडेट कराया जा रहा है। - प्रभु एन सिंह, जिलाधिकारी
बच्चों का नियमित टीकाकरण सभी केंद्रों पर हो रहा है। डाटा फीडिंग में कैसे गड़बड़ी हुई इसकी जांच करा रहे हैं। दोबारा सही डाटा पोर्टल पर फीड कराया जा रहा है। - अरुण श्रीवास्तव, सीएमओ
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इस डाटा से ही टीकाकरण के बाद बच्चों की निगरानी होती है। एचएमईएस के डाटा में टीकाकरण के बाद 3907 बच्चों पर दुष्प्रभाव के मामले सामने आए हैं, जबकि सीएमओ कार्यालय से की गई फीडिंग में शून्य मामले दर्शाए हैं। एचएमईएस के डाटा में किसी भी बच्चे की मृत्यु नहीं दर्ज है। एईएफआई के डाटा में दो बच्चों की मृत्यु दर्ज है। दोनों डाटा में भिन्निता से बच्चों की निगरानी नहीं हो पा रही है। इस संबंध में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक अपर्णा उपाध्याय ने डीएम व सीएमओ को डाटा की गड़बड़ी में सुधार के निर्देश दिए हैं। जिले में करीब 3.50 लाख से अधिक बच्चे हैं। जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए नियमित सामुदायिक टीकाकरण किया जाता है। इस दौरान टीकाकरण के दुष्प्रभाव की राष्ट्रीय पोर्टल पर रिपोर्ट भेजी जाती है। इस रिपोर्ट में गड़बड़ी सामने आने के बाद अब टीकाकरण की रिपोर्टिंग पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है।
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शून्य से पांच साल तक के बच्चों को टीवी की रोकथाम के लिए (बीसीजी) , ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी), खसरा (मिजल्स), रोटावायरस और यलो फीवर के टीके लगाए जाते हैं। टीकाकरण के बाद बच्चों में होने वाले दुष्प्रभाव की जांच होती है। जिसका डाटा पोर्टल पर फीड होता है। फीड डाटा के आधार पर ही ऐसे बच्चों की निगरानी की जाती है।
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मिशन निदेशक का पत्र मिला था। मुख्य चिकित्सा अधिकारी व प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक से रिपोर्ट मांगी गई है। पोर्टल को अपडेट कराया जा रहा है। - प्रभु एन सिंह, जिलाधिकारी
बच्चों का नियमित टीकाकरण सभी केंद्रों पर हो रहा है। डाटा फीडिंग में कैसे गड़बड़ी हुई इसकी जांच करा रहे हैं। दोबारा सही डाटा पोर्टल पर फीड कराया जा रहा है। - अरुण श्रीवास्तव, सीएमओ