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मैनपुरी: अंधविश्वास ने ले ली चार माह के बच्चे की जान, परिवार में मचा कोहराम
Tue, 30 Jul 2019 11:19 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 30 Jul 2019 11:19 AM IST
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मासूम की मौत के बाद जिला अस्पताल के बाहर विलाप करते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
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अंध विश्वास ने चार माह के मासूम की जान ले ली। डायरिया से पीड़ित बच्चे को इलाज की जरूरत थी जबकि परिजन झाड़-फूंक कराते रहे। इटावा जनपद के थाना कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला अकालगंज निवासी मोहम्मद रशीद के चार माह का पुत्र आहिल पिछले चार दिनों से डायरिया से पीड़ित था।
परिजनों को किसी ने सलाह दे दी कि उनके बच्चे पर कोई दैवीय प्रकोप है। मैनपुरी में किला क्षेत्र के पास एक फकीर बैठता है उसे दिखा दें। पिता रशीद अपने बच्चे को लेकर मैनपुरी आ गए। बच्चे की तीन दिन से फकीर के यहां झाड़ फूंक चल रही थी। सोमवार की दोपहर बच्चे की झाड़ फूंक के दौरान मौत हो गई।
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परिजनों को किसी ने सलाह दे दी कि उनके बच्चे पर कोई दैवीय प्रकोप है। मैनपुरी में किला क्षेत्र के पास एक फकीर बैठता है उसे दिखा दें। पिता रशीद अपने बच्चे को लेकर मैनपुरी आ गए। बच्चे की तीन दिन से फकीर के यहां झाड़ फूंक चल रही थी। सोमवार की दोपहर बच्चे की झाड़ फूंक के दौरान मौत हो गई।
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इसके बाद फकीर ने बच्चे को जिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी। परिजन जिला अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बच्चे की मौत की जानकारी होते ही मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। हालांकि उन्होंने इसके बाद भी फकीर की कोई शिकायत नहीं की।
इलाज कराते तो नहीं होती मौत
जिला अस्पताल में बच्चे का परीक्षण करने वाले ईएमओ डॉक्टर राजकुमार ने बताया कि बच्चे की मौत एक घंटे पहले ही हो चुकी थी। परिजनों ने बताया कि बच्चे को पिछले चार दिन से उल्टियां हो रही थीं। वह डायरिया से पीड़ित था। परिजन समय से उसका विशेषज्ञ चिकित्सक से इलाज कराते तो उसकी मौत नहीं होती।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एके पांडेय का कहना है कि यदि कोई बीमार होता है तो परिजन उसका उपचार कराएं। झाड़ फूंक के चक्कर में न पड़ें। झाड़ फूंक से कोई बीमारी ठीक नहीं होती है।
इलाज कराते तो नहीं होती मौत
जिला अस्पताल में बच्चे का परीक्षण करने वाले ईएमओ डॉक्टर राजकुमार ने बताया कि बच्चे की मौत एक घंटे पहले ही हो चुकी थी। परिजनों ने बताया कि बच्चे को पिछले चार दिन से उल्टियां हो रही थीं। वह डायरिया से पीड़ित था। परिजन समय से उसका विशेषज्ञ चिकित्सक से इलाज कराते तो उसकी मौत नहीं होती।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एके पांडेय का कहना है कि यदि कोई बीमार होता है तो परिजन उसका उपचार कराएं। झाड़ फूंक के चक्कर में न पड़ें। झाड़ फूंक से कोई बीमारी ठीक नहीं होती है।