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Agra News: पूर्व उप सभापति बोले, टेंडर बॉक्स से हुए कार्य पूरी तरह वैध
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पूर्व उपसभापति रवि बिहारी माथुर
आगरा। नगर निगम में टेंडर बॉक्स के जरिए हुए कार्यों में नौ करोड़ रुपये के गबन के आरोपों पर अब राजनीति गरमा गई है। भाजपा के पूर्व उपसभापति रवि बिहारी माथुर ने बुधवार को यमुना किनारा स्थित प्रेसवार्ता में इन आरोपों को सिरे से खारिज किया और कहा कि टेंडर प्रक्रिया में किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ है।
पूर्व उप सभापति ने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान ही टेंडर बॉक्स से कार्य कराने का प्रस्ताव रखा गया था। उन्होंने शासनादेश का हवाला देते हुए बताया कि 10 लाख रुपये से कम लागत वाले कार्य टेंडर बॉक्स के माध्यम से कराए जा सकते हैं, जो पूरी तरह वैधानिक है। माथुर ने वर्तमान व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि नियमानुसार तीन साल के कार्यकाल में 17 सदन होने चाहिए थे, लेकिन महापौर और नगरायुक्त की आपसी खींचतान के कारण सदन की बैठकें नहीं हो सकीं। उन्होंने तीखा कटाक्ष किया कि नगर निगम वर्तमान में राम भरोसे चल रहा है। एक्ट और नियमावली का पालन न होने का खामियाजा पार्षदों और जनता को भुगतना पड़ रहा है। ज्ञात हो कि हाल ही में महापौर हेमलता दिवाकर ने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर एक शिकायती पत्र सौंपा था। इसमें उन्होंने नगरायुक्त अंकित खंडेलवाल पर टेंडर बॉक्स की आड़ में नौ करोड़ रुपये के गबन का गंभीर आरोप लगाया था। हालांकि, नगरायुक्त ने इन आरोपों को पहले ही निराधार और भ्रामक करार दिया था।
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पूर्व उप सभापति ने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान ही टेंडर बॉक्स से कार्य कराने का प्रस्ताव रखा गया था। उन्होंने शासनादेश का हवाला देते हुए बताया कि 10 लाख रुपये से कम लागत वाले कार्य टेंडर बॉक्स के माध्यम से कराए जा सकते हैं, जो पूरी तरह वैधानिक है। माथुर ने वर्तमान व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि नियमानुसार तीन साल के कार्यकाल में 17 सदन होने चाहिए थे, लेकिन महापौर और नगरायुक्त की आपसी खींचतान के कारण सदन की बैठकें नहीं हो सकीं। उन्होंने तीखा कटाक्ष किया कि नगर निगम वर्तमान में राम भरोसे चल रहा है। एक्ट और नियमावली का पालन न होने का खामियाजा पार्षदों और जनता को भुगतना पड़ रहा है। ज्ञात हो कि हाल ही में महापौर हेमलता दिवाकर ने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर एक शिकायती पत्र सौंपा था। इसमें उन्होंने नगरायुक्त अंकित खंडेलवाल पर टेंडर बॉक्स की आड़ में नौ करोड़ रुपये के गबन का गंभीर आरोप लगाया था। हालांकि, नगरायुक्त ने इन आरोपों को पहले ही निराधार और भ्रामक करार दिया था।
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