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रेस्क्यू सेंटर में रखे जाएंगे दो हजार 'अल्फा' बंदर, इस योजना पर 55 करोड़ रुपये होंगे खर्च

Tue, 21 May 2019 12:48 PM IST
मुकेश कुमार अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला, आगरा
अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Tue, 21 May 2019 12:48 PM IST
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forest department team caught alpha monkeys in agra
ताजमहल में बंदर - फोटो : अमर उजाला
आगरा के कीठम में भालू संरक्षण केंद्र और चुरमुरा में हाथी कैंप की तरह ही शहर के उत्पाती, खूंखार बंदरों को अलग जगह पर रखने के लिए रेस्क्यू सेंटर बनाया जाएगा। बंदरों के बंध्याकरण की जगह इन्हें रेस्क्यू सेंटर बनाकर रखने का प्रोजेक्ट बनाया गया है, जिसमें शहर के 2 हजार से ज्यादा अल्फा बंदरों को पकड़ कर रखा जाएगा। इस सेंटर के लिए कीठम के पास और मथुरा के गोवर्धन में 25 से 30 एकड़ जमीन की तलाश की जा रही है।
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शहर में ताजमहल, सिकंदरा, एसएन मेडिकल कॉलेज, बेलनगंज, रावतपाड़ा, दरेसी, किनारी बाजार, जामा मस्जिद, आगरा किला समेत ज्यादातर जगहों पर बंदरों का आतंक है। इन बंदरों को पकड़ने के लिए वाइल्ड लाइफ एसओएस ने नया प्रोजेक्ट तैयार किया है, जिस पर 55 करोड़ रुपये खर्च होंगे। शुरुआती योजना में 2 हजार खूंखार बंदरों को पकड़ा जाएगा। 
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कीठम या जिले में कहीं भी 25 से 30 एकड़ जमीन पर यह सेंटर बनाया जाएगा, जहां बंदर रखे जाएंगे और उनके भोजन आदि की व्यवस्था रखी जाएगी। गोवर्धन में मयूर संरक्षण केंद्र के पीछे वाली जगह पर भी इस सेंटर को बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है।
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वाइल्ड लाइफ एसओएस के बैजूराज के मुताबिक बंदर टोलियों में चलते हैं। इनमें से इस टोली का नेतृत्व करने वाला ही (अल्फा) सबसे आक्रामक होता है। उसकी पहचान कर उसे पकड़कर रेस्क्यू सेंटर में छोड़ा जाएगा। हालांकि टोलियों में उसके बाद अन्य बंदर अल्फा बन जाएंगे, लेकिन उन पर भी निगाह रख पकड़कर सेंटर भेजा जाएगा। इससे उन टोलियों का आतंक कम होगा।

बंदरों के बंध्याकरण पर वन्य जीव विशेषज्ञों का इंकार

पूर्व में एसएन मेडिकल कॉलेज के बंदरों को पकड़कर बंध्याकरण (स्टरलाइजेशन) करने के लिए दो करोड़ रुपये की लागत से वाइल्ड लाइफ एसओएस ने हास्पिटल तैयार किया है, लेकिन बंदरों के बंध्याकरण पर वन्य जीव विशेषज्ञ एकमत नहीं है। ज्यादातर विशेषज्ञ इसे बंदरों के लिए खतरनाक मानते हैं।

इस प्रक्रिया के बाद बंदरों के और आक्रामक होने की आशंका वन्य जीव विशेषज्ञ जता रहे हैं। शिमला और पहाड़ी इलाकों में ऐसे प्रयोग के बाद बंदर और आक्रामक हुए हैं और इंसानों पर हमले बढ़े हैं। इस डर से आगरा में वन्य जीव विशेषज्ञ और विभाग फिलहाल इंकार कर रहे हैं। 

शहर में उत्पात मचाने वाले बंदरों को पकड़कर अलग स्थान पर रखने के लिए काफी जगह चाहिए, जिसके लिए प्रशासन से जमीन की मांग की गई है। वाइल्ड लाइफ एसओएस ने रेस्क्यू सेंटर के लिए प्रस्ताव भेजा है। - मनीष मित्तल, डीएफओ, आगरा

हमने आगरा और मथुरा में बंदरों के लिए रेस्क्यू सेंटर का प्रोजेक्ट बनाया है। अल्फा बंदर यानी बंदरों के नेतृत्वकर्ता को पकड़ कर इन सेंटर में ले जाया जाएगा, इससे शहर में बंदरों के आतंक में कमी आएगी। - बैजूराज, वाइल्ड लाइफ एसओएस
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