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एक ही परिवार के छह लोग फूड प्वाइजनिंग का हुए शिकार
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मैनपुरी। दन्नाहार क्षेत्र के गांव रठेरा में चावल और आलू खाने के बाद एक परिवार के छह सदस्यों की हालत बिगड़ गई। हालत खराब होने पर पहले उन्हें एक निजी डॉक्टर के यहां भर्ती कराया गया। बाद में पड़ोसियों की सूचना पर कोरोना के भय से प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने एंबुलेंस भेजकर चार गंभीर पीड़ितों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया है।
गांव रठेरा निवासी रामसेवक यादव के परिवार में बुधवार की शाम चावल बने। पूरे परिवार ने सुबह के रखे मठ्ठा के आलू के साथ चावल खा लिया। देर शाम सबसे पहले 65 वर्षीय रामसेवक की हालत बिगड़ी। परिजन उन्हें एक निजी डॉक्टर के यहां ले गए। इसके बाद उनके साथ आए 19 वर्षीय पुत्र विमल व पत्नी ज्ञान देवी की भी हालत बिगड़ गई। जब तक इनका उपचार कराया जाता तब तक घर पर मौजूद 30 वर्षीय पुत्र मानेश, 22 वर्षीय पुत्री गीता व 18 वर्षीय पुत्री रुचि की भी हालत बिगड़ गई। अचानक एक साथ पूरे परिवार की हालत बिगड़ी तो गांव के लोग दहशत में आ गए। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को जानकारी दी। ज्ञानदेवी और मानेश को तो निजी डॉक्टर से ही राहत मिल गई लेकिन रामसेवक, विमल, रुचि व गीता को गंभीर हालत में रात में ही जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
दूसरी तरफ बृहस्पतिवार की सुबह गांव में दहशत फैल गई कि पूरा परिवार कोरोना वायरस की चपेट में आ गया है। इस पर लोग उन्हें देखने भी नहीं गए। बाद में युवा शक्ति टीम रठेरा ने व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से ग्रामीणों को जानकारी दी कि वे लोग उल्टी दस्त के शिकार हुए हैं कोरोना से नहीं। डॉक्टर ने उन्हें फूड प्वाइजनिंग का शिकार बताया है। इसके बाद गांव के लोगों ने राहत की सांस ली।
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रामसेवक व उनके परिवार के चार सदस्य जिला अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं। जिनका मेरी देख रेख में उपचार चल रहा है। उन लोगों की हालत दूषित भोजन खाने से बिगड़ी है। किसी प्रकार की घबराने की बात नहीं है। सभी स्वस्थ हैं।
डॉ. जेजे राम वरिष्ठ फिजीशियन जिला अस्पताल
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गांव रठेरा निवासी रामसेवक यादव के परिवार में बुधवार की शाम चावल बने। पूरे परिवार ने सुबह के रखे मठ्ठा के आलू के साथ चावल खा लिया। देर शाम सबसे पहले 65 वर्षीय रामसेवक की हालत बिगड़ी। परिजन उन्हें एक निजी डॉक्टर के यहां ले गए। इसके बाद उनके साथ आए 19 वर्षीय पुत्र विमल व पत्नी ज्ञान देवी की भी हालत बिगड़ गई। जब तक इनका उपचार कराया जाता तब तक घर पर मौजूद 30 वर्षीय पुत्र मानेश, 22 वर्षीय पुत्री गीता व 18 वर्षीय पुत्री रुचि की भी हालत बिगड़ गई। अचानक एक साथ पूरे परिवार की हालत बिगड़ी तो गांव के लोग दहशत में आ गए। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को जानकारी दी। ज्ञानदेवी और मानेश को तो निजी डॉक्टर से ही राहत मिल गई लेकिन रामसेवक, विमल, रुचि व गीता को गंभीर हालत में रात में ही जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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दूसरी तरफ बृहस्पतिवार की सुबह गांव में दहशत फैल गई कि पूरा परिवार कोरोना वायरस की चपेट में आ गया है। इस पर लोग उन्हें देखने भी नहीं गए। बाद में युवा शक्ति टीम रठेरा ने व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से ग्रामीणों को जानकारी दी कि वे लोग उल्टी दस्त के शिकार हुए हैं कोरोना से नहीं। डॉक्टर ने उन्हें फूड प्वाइजनिंग का शिकार बताया है। इसके बाद गांव के लोगों ने राहत की सांस ली।
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रामसेवक व उनके परिवार के चार सदस्य जिला अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं। जिनका मेरी देख रेख में उपचार चल रहा है। उन लोगों की हालत दूषित भोजन खाने से बिगड़ी है। किसी प्रकार की घबराने की बात नहीं है। सभी स्वस्थ हैं।
डॉ. जेजे राम वरिष्ठ फिजीशियन जिला अस्पताल