आगरा के पुष्पांजलि हाइट्स में लगी आग: फायर एनओसी नहीं, अलार्म बजा न पाइपों से निकला पानी, फंसे थे सैकड़ों लोग
आगरा के पुष्पांजलि हाइट्स में दो दिन पहले आग लगने की घटना हुई। जांच करने पर पता चला कि इसकी फायर एनओसी ही नहीं थी। तभी आग लगने पर न तो अलार्म बजा और न ही पाइपों से पानी निकला। इस दौरान सैकड़ों लोग घरों में फंसे हुए थे।
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उत्तर प्रदेश के आगरा में पुष्पांजलि हाइट्स में बिना फायर एनओसी के फ्लैट बेच दिए गए। रविवार रात आग लगने पर न फायर अलार्म बजा और न ही पाइपों से पानी निकला। दमकलकर्मियों को दिक्कत हुई। मुख्य अग्निशमन अधिकारी देवेंद्र सिंह का कहना है कि बिल्डर को नोटिस देंगे।
पुष्पांजलि हाइट्स के तीनों टावरों में 248 फ्लैट हैं। सभी में लोग रह रहे हैं। मुख्य अग्निशमन अधिकारी ने बताया कि बिल्डर ने विभाग से एनओसी नहीं ली। इस वजह से विभाग ने कभी मॉक ड्रिल नहीं कराई। फ्लैट वालों को बताया गया था कि अत्याधुनिक फायर सिस्टम लगा है।
इसके अलावा आग लगने पर अलार्म भी नहीं बजा। पाइपों में पानी नहीं था। अग्निशमन उपकरण काम करते तो फ्लैट संख्या 702 पर ही आग पर काबू हो जाता। जांच की जा रही है। पुष्पांजलि बिल्डर को नोटिस देंगे। फायर सिस्टम सुचारू और एनओसी होने पर रजिस्ट्री की जा सकती है। लोगों को भी नहीं रहना चाहिए।
शुक्र है पड़ोसी ने किया कॉल, बच गई जान
फ्लैट में आग लगने से धुआं कमरों में भर गया। सभी लोग सो रहे थे। इससे आग का अहसास तक नहीं हुआ। तभी एक कॉल आई। पड़ोस के फ्लैट की रीता बोल रही थीं। कहा कि आग लगी है। जल्दी बाहर आ जाओ। पति को जगाया। बेटियों को बाहर निकाला। जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी। यह कहा निधि सक्सेना ने। आग से उनका फ्लैट बर्बाद हो गया।
फ्लैट संख्या 802 में सीडीओ ऑफिस के सहायक अभियंता राजीव सक्सेना, पत्नी निधि और दो बेटियों के साथ रहते हैं। निधि शिक्षिका हैं। उन्होंने बताया कि फ्लैट संख्या 702 की बालकनी में आउटडोर यूनिट के अलावा आयल हीटर रखा हुआ था। इस वजह से आग ज्यादा भड़की। उन्हें सिक्योरिटी स्टाफ ने आग लगने की जानकारी नहीं दी। आग उनके दो कमरों तक पहुंच गई। शुक्र है रीता ने काॅल कर दिया। जान बच गई। अग्निशमन उपकरण काम नहीं कर रहे थे। इससे दिक्कत हुई। लाखों का नुकसान हुआ है। एसी, पंखा, मंदिर, बेड, अलमारी, कपड़े तक जल गए।
महिलाएं बोलीं, बिल्डर को बुलाओ
पुष्पांजलि हाइट्स में फायर सिस्टम की हकीकत सामने आने पर लोगों में आक्रोश है। कर्मचारी जले हुए सामान को हटाने लगे तो महिलाओं ने हंगामा किया। कहा कि बिल्डर को बुलाया जाए। उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इसके बाद ही सामान को हटाया जाएगा। बिल्डर ने पहले फायर सिस्टम अच्छा बताया था। उनके साथ धोखा हुआ है।
फ्लैट संख्या 803 के बाथरूम में फटा गीजर
राजीव सक्सेना के फ्लैट के बगल में ही मोनिका ओबेराय का फ्लैट है। उन्होंने बताया कि वह सो रही थीं। बेटा कुनाल दूसरे कमरे में था। अचानक बाथरूम में धमाके से कुनाल जाग गया। वह बाथरूम में गया तो लपटें उठ रही थीं। गीजर जल रहा था। उन्हें जगाया। इसके बाद बाहर भागा।
एक घंटे तक अफरातफरी
आग लगने पर एक घंटे तक अफरातफरी रही। भूतल पर जो भी आया, वो अपने लोगों को कॉल करके अग्निकांड के बारे में बताने लगा। गनीमत रही कि बड़ा हादसा नहीं हुआ। फ्लैट संख्या 902 में एडी आहूजा रहते हैं। उन्होंने बताया कि किसी ने गेट खटखटाया। वह बाहर आ गए। वह परिवार के लोगों को बाहर निकालने लगे। मां बसंती देवी 93 साल की हैं। वह व्हीलचेयर पर रहती हैं। जब लोग भूतल पर जा रहे थे तो सीढि़यों का प्रयोग कर रहे थे। परिजन ने उनको गोद में उठाया, तब नीचे ला सके।
नहीं जागे अफसर
शाहगंज स्थित खेरिया मोड़ स्थित आर मधुराज अस्पताल में सात महीने पहले आग लगी थी। इस घटना में डॉक्टर पिता, बेटे और बेटी की मौत हो गई थी। इस घटना ने हॉस्पिटलों में अग्निशमन इंतजामों को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। अभियान चला, नोटिस दिए गए। मगर, कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूरी हुई।