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जुबानी जंग तो बहुत होती है, लेकिन 'चौकीदार' बने किसानों की सुध लेने वाला कोई नहीं

Sat, 30 Mar 2019 07:13 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 30 Mar 2019 07:13 PM IST
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farmers became chowkidar for save his crops from strays animals in agra
आवारा पशुओं को भगाता किसान - फोटो : अमर उजाला
लोकसभा चुनाव से पहले 'चौकीदार' को लेकर जुबानी जंग छिड़ी हुई है, लेकिन चौकीदार बने किसानों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। आगरा जिले में आवारा पशुओं से फसल बचाने के लिए किसान चौकीदार बन गए हैं। अभी तक किसान खेतों से चिड़ियां ही उड़ाते थे, बीते कुछ सालों से आवारा पशु मुसीबत बन गए हैं। किसान फसल बचाने के लिए दिन-रात आवारा पशु हांकने में लगे रहते हैं।
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जिले में गेहूं, सरसों, आलू, बाजरा प्रमुख फसल हैं। दाल और सब्जी भी उगाई जाती है। इनमें से कई फसलों को पक्षी बहुत नुकसान पहुंचाते हैं। इनसे बचाने को खेतों में बुत और मचान लगाकर किसान पक्षी उड़ाते हैं। अब आवारा पशु फसलों के दुश्मन बन गए हैं। 
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खेतों में पशुओं के झुंड घुसकर फसल को नष्ट कर देते हैं। इनसे फसल बचाने के लिए किसानों को दिन-रात खेतों की पहरेदारी करनी पड़ रही है। सैकड़ों की संख्या होने के कारण खेतों की बाड़बंदी भी काम नहीं आ रही। किसान चाहते हैं कि सरकार ब्लाक स्तर पर बड़ी-बड़ी गोशाला बनाकर आवारा पशुओं से छुटकारा दिलाए। 
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रखवाली के लिए छह हजार रुपये तक दे ररहे किसान 

बड़े काश्तकार छह हजार रुपये महीने तक देकर खेतों की रखवाली करा रहे हैं। रात में टोली खेतों की रखवाली करती है। इससे किसानों पर अतिरिक्त खर्च और बढ़ गया है। छोटे किसान महीनेदारी पर रखवाली कराने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में वो खुद ही पशुओं को हांकने में लगे रहते हैं। 

स्कूलों में बंद कर दिए थे आवारा पशु

फसलों को बरबाद होते देख किसानों में आक्रोश फैल गया। गांव-गांव में किसानों ने आवारा पशुओं को सरकारी स्कूलों में बंद कर इस समस्या के निदान के लिए शासन-प्रशासन का ध्यान खींचा। पूरे जिले में ऐसा आंदोलन होने पर शासन गोशालाएं जरूर बनवा रहा है, लेकिन वो भी कम हैं। 

किसानों का ये है कहना 

किसान श्याम सिंह चाहर का कहना है कि खेती में पहले से ही नुकसान हो रहा है, आवारा पशु फसल नष्ट कर और मुसीबत खड़ी कर रहे हैं। पशुओं के हमले में कई किसान और बच्चे घायल हो चुके हैं। हर ब्लाक स्तर पर गोशालाएं बनवाने से ही राहत मिलेगी। 

किसान यतेंद्र सिंह ने कहा कि गेहूं, सब्जी की खेती करता हूं। आवारा पशुओं ने कई बीघा गेहूं और सब्जी नष्ट कर दी। इससे बचने के लिए छह हजार रुपये महीने पर मजदूर लगाए हैं, जो दिन-रात पशुओं को हांकते हैं। कई किसानों ने ऐसा किया है।
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